- ED ने महादेव एप मनी लॉन्ड्रिंग मामले में सौरभ चंद्राकर से जुड़ी 1700 करोड़ रुपये की संपत्तियां अटैच की हैं
- जांच में पाया गया कि दुबई के बुर्ज खलीफा में महंगे विला समेत कई संपत्तियां अवैध धन से खरीदी गई थीं
- इस मामले में अब तक कुल 4300 करोड़ रुपये की संपत्तियां प्रवर्तन निदेशालय द्वारा अटैच की जा चुकी हैं
महादेव एप मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी सौरभ चंद्राकर से जुड़ी 1700 करोड़ रुपये की संपत्तियां अटैच कर ली है. इन संपत्तियों में दुबई के बुर्ज खलीफा के महंगे विला और घर भी शामिल हैं. सौरभ चंद्राकर भी अभी दुभी में है. आपको बता दें कि इस केस में ईडी अभी तक कुल 4300 करोड़ रुपये की संपत्तियां अटैच कर चुकी है.
महादेव ऑनलाइन बुक बेटिंग केस में प्रवर्तन निदेशालय ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाइयों में से एक को अंजाम दिया है. ED के रायपुर ज़ोनल ऑफिस ने 24 मार्च 2026 को प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत करीब 1700 करोड़ रुपये की संपत्तियों को अटैच कर दिया है. इस कार्रवाई में दुबई की 18 और नई दिल्ली की 2 प्रॉपर्टीज़ शामिल हैं, जो सभी हाई-प्रोफाइल और प्राइम लोकेशन पर स्थित हैं.जांच एजेंसी के मुताबिक, दुबई में अटैच की गई संपत्तियां किसी आम निवेश का हिस्सा नहीं हैं, बल्कि इनमें दुनिया की सबसे महंगी और लग्ज़री रियल एस्टेट शामिल है. दुबई हिल्स एस्टेट में आलीशान विला और अपार्टमेंट, हिल्स व्यू, फेयरवे रेसीडेंसी और सिडरा जैसी प्रीमियम सोसाइटीज़, बिजनेस बे के हाई-एंड फ्लैट्स, SLS होटल एंड रेजिडेंस के लक्ज़री अपार्टमेंट्स, और यहां तक कि बुर्ज खलीफा में मौजूद प्रॉपर्टीज़ भी इस लिस्ट में शामिल हैं. ये सभी प्रॉपर्टीज़ करोड़ों-अरबों रुपये की बताई जा रही हैं.
ED की जांच में खुलासा हुआ है कि ये पूरा साम्राज्य महादेव ऑनलाइन बुक नाम के अवैध बेटिंग प्लेटफॉर्म के जरिए खड़ा किया गया. इस ऐप के जरिए देश ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सट्टेबाजी का नेटवर्क चलाया जा रहा था. Tiger Exchange, Gold365 और Laser247 जैसे कई ऑनलाइन प्लेटफॉर्म इसके हिस्से थे, जिनके जरिए हजारों करोड़ रुपये का काला पैसा बनाया गया.इस पूरे सिंडिकेट का मास्टरमाइंड सौरभ चंद्राकर और उसका करीबी रवि उप्पल बताया जा रहा है, जो दुबई से बैठकर इस नेटवर्क को ऑपरेट करते थे. इनके साथ कई अन्य सहयोगी जैसे विकास छपरिया, रोहित गुलाटी, अतुल अरोड़ा, नितिन तिबरेवाल और सुरेंद्र बागड़ी भी इस नेटवर्क को चलाने में अहम भूमिका निभा रहे थे. इन लोगों ने कंपनियों और फर्जी एंटिटीज़ के नाम पर संपत्तियां खरीदीं, ताकि असली मालिकाना हक छिपाया जा सके.
अंत में यही पैसा दुबई और भारत में महंगी संपत्तियों में निवेश कर दिया गया.ED ने अपनी जांच में यह भी पाया है कि इस नेटवर्क के तार कई राज्यों से जुड़े हुए हैं. छत्तीसगढ़, आंध्र प्रदेश और पश्चिम बंगाल में दर्ज FIRs के आधार पर यह जांच शुरू हुई थी. इन FIRs में IPC और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत केस दर्ज किए गए थे, जिनमें सरकारी अधिकारी भी शामिल पाए गए.इस केस में अब तक ED ने देशभर में 175 से ज्यादा ठिकानों पर छापेमारी की है. 13 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है और 74 लोगों को आरोपी बनाया गया है. रायपुर की स्पेशल PMLA कोर्ट में 5 चार्जशीट भी दाखिल की जा चुकी हैं.
इस मामले में ED की इस तरह की यह कोई पहली कार्रवाई नहीं है. जनवरी में भी महादेव ऑनलाइन बुक और Skyexchange.com से जुड़े अवैध सट्टेबाजी नेटवर्क पर एक बार फिर बड़ी कार्रवाई की थी.इस कार्रवाई के तहत ED ने मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम कानून यानी PMLA के तहत 91.82 करोड़ रुपये की चल-अचल संपत्तियां अस्थायी रूप से अटैच की थी. ED की इस ताज़ा कार्रवाई में 74.28 करोड़ रुपये से ज्यादा की बैंक मनी अटैच की गई थी, जो दुबई की दो कंपनियों परफेक्ट प्लान इन्वेस्टमेंट एलएलसी और एग्जिम जनरल ट्रेडिंग के खातों में जमा थीं.
ED की जांच में सामने आया है कि ये कंपनियां सौरभ चंद्राकर, अनिल कुमार अग्रवाल और विकास छपरिया से जुड़ी हुई हैं और इनका इस्तेमाल अवैध सट्टेबाजी से कमाए गए पैसे को वैध दिखाने के लिए किया जा रहा था. इसके अलावा ED ने 17.5 करोड़ रुपये की संपत्तियां भी अटैच की थी, जो गगन गुप्ता के नाम और उनके परिवार के सदस्यों के नाम पर थीं.गगन गुप्ता, Skyexchange.com के मालिक हरि शंकर तिबरेवाल का करीबी बताया जा रहा है. ED का कहना है कि ये महंगी प्रॉपर्टी और लिक्विड एसेट्स नकद में कमाए गए अवैध पैसों से खरीदे गए थे.
कैसे चलता था अवैध सट्टेबाजी का पूरा खेल
ED की जांच में खुलासा हुआ था कि महादेव ऑनलाइन बुक, Skyexchange.com जैसे कई अवैध बेटिंग ऐप्स और वेबसाइट्स के ज़रिए हजारों करोड़ रुपये का काला धन पैदा किया गया. महादेव ऑनलाइन बुक ऐप को इस तरह डिजाइन किया गया था कि वह अलग-अलग अवैध बेटिंग ऐप्स को ग्राहक उपलब्ध कराए और उनके पैसों का पूरा लेन-देन संभाले.जांच एजेंसी के मुताबिक, ये वेबसाइट्स और ऐप्स जानबूझकर इस तरह से रिग की गई थीं कि आखिर में ग्राहक को नुकसान ही हो.लोगों से करोड़ों रुपये वसूले गए और तय हिस्सेदारी के फॉर्मूले पर रकम बांटी जाती थी.
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