- हाईकोर्ट ने जमीन के बदले नौकरी मामले में लालू यादव की सीबीआई FIR और आरोपपत्र रद्द करने की याचिका खारिज की
- मामला 2004 से 2009 के बीच रेल मंत्री लालू के समय एमपी के जबलपुर रेलवे जोन में ग्रुप डी नियुक्तियों से जुड़ा है
- आरोप है कि नियुक्तियां उन उम्मीदवारों को दी गईं जिन्होंने RJD प्रमुख परिवार या सहयोगियों के नाम पर जमीन दी
दिल्ली हाईकोर्ट ने ‘‘जमीन के बदले नौकरी'' विवाद में सीबीआई की प्राथमिकी और आरोपपत्र रद्द करने की लालू प्रसाद यादव की याचिका खारिज कर दी. न्यायमूर्ति रविंदर डुडेजा ने पूर्व रेल मंत्री एवं बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री यादव की याचिका खारिज कर दी, जिसमें 2022, 2023 और 2024 में दायर तीन आरोपपत्रों और बाद के संज्ञान लेने के आदेशों को रद्द करने का अनुरोध भी किया गया था. न्यायाधीश ने फैसला सुनाते हुए कहा, 'याचिका में कोई दम नहीं है, इसलिए इसे खारिज किया जाता है.'
क्या है मामला
सीबीआई के अनुसार, 'जमीन के बदले नौकरी' का यह मामला 2004 से 2009 के बीच लालू प्रसाद के रेल मंत्री रहने के दौरान मध्य प्रदेश के जबलपुर स्थित भारतीय रेलवे के पश्चिम मध्य जोन में की गई ग्रुप डी नियुक्तियों से संबंधित है. आरोप है कि ये नियुक्तियां उन उम्मीदवारों को दी गईं, जिन्होंने राजद प्रमुख के परिवार या सहयोगियों के नाम पर भूखंड उपहार में दिए या स्थानांतरित किए थे.
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फैसले की विस्तृत प्रति की प्रतीक्षा है. लालू यादव ने दलील दी थी कि इस मामले में जांच, प्राथमिकी, जांच की प्रक्रिया और बाद में दाखिल आरोपपत्र कानूनी रूप से टिकाऊ नहीं हैं, क्योंकि केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो ने भ्रष्टाचार निरोधक कानून की धारा 17ए के तहत पूर्व मंजूरी नहीं ली थी. यह मामला 18 मई, 2022 को यादव और उनकी पत्नी, दो बेटियों, अज्ञात सरकारी अधिकारियों और निजी व्यक्तियों सहित अन्य लोगों के खिलाफ दर्ज किया गया था. लालू प्रसाद यादव (77) और अन्य लोग फिलहाल जमानत पर बाहर हैं.
अप्रयुक्त दस्तावेजों की मांग पर अदालत की सख्ती
पूर्व रेल मंत्री एवं राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की उन याचिकाओं को खारिज कर दिया, जिनमें अप्रयुक्त दस्तावेजों की मांग की गई थी. अदालत ने कहा कि ये दस्तावेज एक साथ उपलब्ध कराना न केवल 'बैलगाड़ी को घोड़े के आगे रखने' (उल्टा काम करने) जैसा होगा, बल्कि न्यायिक प्रक्रिया को 'पूरी तरह से अव्यवस्थित' भी कर देगा.
अन्य आरोपियों की अर्ज़ियां भी खारिज
अप्रयुक्त दस्तावेज वे होते हैं, जिन्हें जांच एजेंसियां जब्त तो करती हैं, लेकिन आरोपपत्र में उनका उपयोग नहीं किया जाता. निचली अदालत ने दो अन्य आरोपियों द्वारा दायर इसी तरह के आवेदनों को भी खारिज कर दिया. इनमें लालू प्रसाद के निजी सचिव आर.के. महाजन द्वारा एक अप्रयुक्त दस्तावेज और रेलवे के पूर्व महाप्रबंधक एवं पूर्व नियुक्ति प्राधिकारी महीप कपूर द्वारा 23 अप्रयुक्त दस्तावेजों की मांग की गई थी.














