मैंने हिंदुत्ववादी नेताओं को गिरफ्तार न करने की कीमत चुकाई...महाराष्ट्र ATS के पूर्व प्रमुख के. पी. रघुवंशी

एटीएस के पूर्व प्रमुख के.पी. रघुवंशी ने अपनी किताब में दावा किया है कि यूपीए सरकार ने उन पर बाल ठाकरे और इंद्रेश कुमार जैसे हिंदुत्ववादी नेताओं की गिरफ्तारी का दबाव डाला था, लेकिन इनकार करने पर उन्हें पद से हटाने जैसे परिणाम झेलने पड़े.

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यह भी दावा है कि तत्कालीन मुख्यमंत्री विलासराव देशमुख ने भी कार्रवाई के लिए दबाव डाला.
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  • रघुवंशी का आरोप: यूपीए सरकार ने बाल ठाकरे और इंद्रेश कुमार की गिरफ्तारी का दबाव डाला
  • गिरफ्तारी से इनकार की कीमत: सबूत न होने का हवाला दिया तो एटीएस प्रमुख पद से हटा दिए गए
  • कांग्रेस मंत्री पर आरोप: पुरोहित से पुरानी तस्वीर के कारण रघुवंशी पर मिलीभगत का शक
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पूर्व भारतीय पुलिस सेवा अधिकारी के. पी. रघुवंशी ने केंद्र की पूर्व UPA  सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं. उनका कहना है कि उन्होंने राजनीतिक दबाव में शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे और आरएसएस के इंद्रेश कुमार जैसे बड़े हिंदुत्व नेताओं को गिरफ्तार करने से इनकार किया, जिसकी उन्हें कीमत चुकानी पड़ी. इन बातों का उल्लेख उनकी जीवनी Troubleshooter में है, जिसे जितेंद्र दीक्षित ने लिखा है.

35 साल के अपने लंबे करियर में 1980 बैच के इस अधिकारी ने कई अहम जिम्मेदारियां निभाईं. उन्होंने स्पेशल टास्क फोर्स की अगुवाई की, जिसे मुंबई दंगों पर बनी श्रीकृष्ण आयोग की रिपोर्ट लागू करने का काम दिया गया था. इसके अलावा वे महाराष्ट्र एंटी टेररिज्म स्क्वॉड और ठाणे पुलिस आयुक्तालय के प्रमुख भी रहे. रघुवंशी को गढ़चिरोली में नक्सल विरोधी कमांडो फोर्स सी-60 खड़ी करने का श्रेय भी दिया जाता है.

मालेगांव ब्लास्ट और इंद्रेश कुमार

साल 2010 में रघुवंशी को कार्यकाल पूरा होने से पहले ही महाराष्ट्र एटीएस प्रमुख पद से हटा दिया गया. किताब के मुताबिक, यूपीए सरकार के एक वरिष्ठ कांग्रेसी मंत्री ने उन पर 2008 के मालेगांव ब्लास्ट मामले में आरएसएस पदाधिकारी इंद्रेश कुमार को गिरफ्तार करने का दबाव डाला. रघुवंशी ने सबूतों की कमी का हवाला देते हुए गिरफ्तारी से इनकार कर दिया.

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इसके बाद मंत्री को शक हुआ कि रघुवंशी आरोपियों से मिले हुए हैं. किताब में बताया गया है कि एटीएस में अपनी पिछली तैनाती के दौरान रघुवंशी ने एक अन्य आरोपी लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद पुरोहित को अधिकारियों के लिए वर्कशॉप लेने के लिए बुलाया था. उस समय पुरोहित मिलिट्री इंटेलिजेंस में थे और रघुवंशी उन्हें ट्रेनिंग के लिए उपयोगी मानते थे. बाद में पुरोहित की गिरफ्तारी के बाद उनकी एक तस्वीर वायरल हुई, जिसमें रघुवंशी उनका स्वागत करते दिख रहे थे. इससे मंत्री के मन में संदेह और बढ़ गया.

रघुवंशी का दावा है कि उन्हें एटीएस से हटाने की साजिश इसी मंत्री ने रची और आरोप लगाया गया कि ONGC के केंद्र को उड़ाने की आतंकी साजिश की जानकारी उन्होंने मीडिया को लीक की, जबकि वह जानकारी पहले से ही एफआईआर का हिस्सा थी और एक सार्वजनिक दस्तावेज थी.

"आप बाल ठाकरे को गिरफ्तार करने से डर क्यों रहे हैं?"

जीवनी में यह भी बताया गया है कि 1993 मुंबई दंगों के मामले में शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे की गिरफ्तारी को लेकर तत्कालीन महाराष्ट्र गृह मंत्री छगन भुजबल ने उन्हें अपमानित किया. बताया जाता है कि साल 2000 में जब रघुवंशी ने कहा कि वे ठाकरे को गिरफ्तार नहीं कर सकते, तब भुजबल ने कहा कि रघुवंशी या सूर्यवंशी, तुम जो भी हो, बाल ठाकरे को गिरफ्तार करने से डर क्यों रहे हो?

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श्रीकृष्ण आयोग ने ठाकरे पर हिंसा भड़काने का आरोप लगाया था और उनकी तुलना फौज के जनरल से की थी. लेकिन एसटीएफ के कानूनी सलाहकार एडवोकेट पी.आर. वकील ने मुकदमा चलाने के खिलाफ राय दी. कारण यह था कि दो मुख्य गवाह—कांग्रेसी नेता चंद्रकांत हंडोरे और पत्रकार युवराज मोहिते—बयान देने के लिए पेश नहीं हुए.

निजी दुश्मनी और राजनीतिक वादे

किताब में कहा गया है कि भुजबल की सख्ती के पीछे निजी दुश्मनी भी थी. 1991 में वे शिवसेना छोड़कर शरद पवार के साथ कांग्रेस में शामिल हो गए थे. 1997 में शिवसैनिकों ने उनके बंगले पर हमला किया था, जिससे बचने के लिए उन्हें बाथरूम में बंद होना पड़ा. रघुवंशी ने दबाव का विरोध किया क्योंकि वे जुलाई 2000 जैसी स्थिति दोबारा नहीं चाहते थे, जब समयसीमा खत्म होने के कारण अदालत ने ठाकरे के खिलाफ मामला कुछ ही मिनटों में खारिज कर दिया था.

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सोनिया गांधी के सामने पेशी

किताब में यह भी दावा है कि तत्कालीन मुख्यमंत्री विलासराव देशमुख ने भी कार्रवाई के लिए दबाव डाला. देशमुख रघुवंशी को दिल्ली ले गए ताकि वे उन्हें मामले की प्रगति की जानकारी दे सकें. 1999 के चुनाव घोषणा पत्र में कांग्रेस ने श्रीकृष्ण आयोग द्वारा दोषी ठहराए गए लोगों के खिलाफ कार्रवाई का वादा किया था और नागरिक अधिकार संगठनों तथा मुस्लिम समूहों की ओर से उस वादे को पूरा करने का दबाव था.

संघर्षों से भरा करियर

Troubleshooter में रघुवंशी के करियर की कई घटनाएं शामिल हैं. चाहे वह नक्सल प्रभावित गढ़चिरोली का दौर हो या नेताओं, आतंकियों, गैंगस्टरों और अपने ही विभाग के अधिकारियों से टकराव. के. पी. रघुवंशी 2015 में महाराष्ट्र सिक्योरिटी फोर्स के महानिदेशक पद से सेवानिवृत्त हुए. वर्तमान में वे आईपीएल टीम राजस्थान रॉयल्स की एथिक्स और विजिलेंस यूनिट के प्रमुख हैं.

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