क्या होता है राजनीतिक पार्टियों का व्हिप और कौन करता है जारी, न मानने पर क्या जा सकती है सदस्यता

सरकार आज लोकसभा में वक्फ (संशोधन) बिल पेश करेगी. इस पर आज आठ की चर्चा तय की गई है. इसे देखते हुए राजनीतिक दलों ने अपने सदस्यों के लिए तीन लाइन का व्हिप जारी किया है. आइए जानते हैं कि क्या होता है ह्विप.

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नई दिल्ली:

सरकार वक्फ (संशोधन) बिल को आज लोकसभा में पेश करेगी. इसको लेकर संसद में काफी गहमा-गहमी है. सभी राजनीतिक दलों ने अपने अपने सदस्यों के लिए तीन लाइन का व्हिप जारी किया है. राजनीतिक दलों ने अपने सदस्यों से कहा है कि अगले कुछ दिनों तक सदन की बैठक में हाजिर रहें और पार्टी की नीति के मुताबिक मतदान करें. आइए जानते हैं कि क्या होता है व्हिप और इसे कौन जारी करता है. हम यह भी बताएंगे कि कितने तरह का होता है व्हिप और इसे न मानने का प्रभाव क्या हो सकता है.   

क्या होता है व्हिप

व्हिप का राजनीतिक दलों के निर्देश या आदेश की तरह होता है. इसे राजनीतिक दल अपने सदस्यों को किसी विशेष अवसर पर सदन में मौजूद रहने और मतदान में हिस्सा लेने के लिए जारी करते हैं. यह एक लिखित आदेश होता है. इसका मुख्य उद्देश्य सदन में पार्टी के सदस्यों में अनुशासन बनाए रखना होता है. इस आदेश का पालन करना व्हिप जारी करने वाले दल के हर सदस्य के लिए जरूरी होता है. इसका पालन न करने पर संबंधित सदस्य की सदस्यता भी जा सकती है.  

कौन जारी करता है व्हिप

हर राजनीतिक दल अपने एक वरिष्ठ सदस्य को मुख्य सचेतक (चीफ व्हिप) नियुक्त करता है. मुख्य सचेतक यह सुनिश्चित करता है कि पार्टी के सभी सदस्य व्हिप का पालन करें. हर राजनीतिक दल के पास व्हिप जारी करने का अधिकार होता है. 

कितनी तरह का होता है व्हिप

व्हिप तीन तरह के होते हैं-एक लाइन का व्हिप, दो लाइन का व्हिप और तीन लाइन का व्हिप. एक लाइन के व्हिप जब जारी किया जाता है, तो सदस्यों से अपेक्षा की जाती है कि वो सदन में उपस्थिति दर्ज कराएं. वहीं दो लाइन के व्हिप में सदस्यों को निर्देश दिया जाता है कि वो सदन में मौजूद रहकर पार्टी लाइन के अनुसार मतदान करें. तीन लाइन व्हिप में राजनीतिक दल अपने सदस्यों से अपेक्षा करते हैं कि वे सदन में किसी विशेष विधेयक या मुद्दे पर चर्चा के दौरान और मतदान के समय मौजूद रहें.इसे सबसे सख्त व्हिप माना जाता है. 

अगर व्हिप का पालन नहीं किया तो क्या होगा

व्हिप का पालन करना राजनीतिक दल के हर सदस्य के लिए जरूरी होता है. व्हिप का उल्लंघन करने पर संबंधित दल सख्त कदम उठा सकता है.व्हिप का उल्लंघन करने पर दलबदल विरोधी कानून के तहत कार्रवाई की जा सकती है. इसका दोषी पाए जाने पर संबंधित सदस्य की सदस्यता भी जा सकती है. 

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