IMD की रिपोर्ट से बढ़ी चिंता, बिहार, यूपी और दिल्ली समेत देश के 30 सब-डिवीजन में सामान्य से कम बरसे बादल

सोमवार को महाराष्ट्र से लेकर कर्नाटक, छत्तीसगढ़, झारखण्ड और ओडिशा में कई जगहों पर अच्छी बारिश रिकॉर्ड की गयी है.

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  • इस मॉनसून सीजन में देश के अधिकांश हिस्सों में औसत से 20 प्रतिशत कम बारिश रिकॉर्ड की गई है
  • 1 जून से 6 जुलाई के बीच 36 मौसम उप-मंडलों में से 30 में सामान्य से कम बारिश हुई है
  • अगले दिनों मध्य भारत में मॉनसून सक्रिय रहेगा, लेकिन अल नीनो के प्रभाव से बारिश की कमी बढ़ने की आशंका है
नई दिल्ली:

दक्षिण झारखंड और उससे सटे उत्तर-आंतरिक ओडिशा (North Interior Odisha) पर स्थित अवदाब (Depression) सोमवार को आगे बढ़ा जिसकी वजह से ओडिशा और झारखण्ड में काफी अच्छी बारिश रिकॉर्ड की गयी. ​अगले 24 घंटों के दौरान​, इसके उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ते हुए झारखंड, उत्तर छत्तीसगढ़ तथा उससे सटे पूर्वी मध्य प्रदेश के ऊपर से गुजरने की संभावना है. इसकी वजह से मंगलवार को झारखण्ड, छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश में अच्छी बारिश का पूर्वानुमान है.

भारत मौसम विभाग के वरिष्ठ वैज्ञानिक, डॉ. शशिकांत ने एनडीटीवी से कहा, "आज महाराष्ट्र से बंगाल की खाड़ी तक घने बादल छाए हुए हैं. महाराष्ट्र, झारखंड, छत्तीसगढ़ और उड़ीसा में अभी भारी बारिश हो रही है. जुलाई महीने में बारिश में सुधार होने से मध्य प्रदेश और उड़ीसा में बारिश की कमी खत्म हो गई है. हालांकि, इस सीजन के दौरान महाराष्ट्र में अभी भी बारिश की कमी है. मध्य भारत के इलाके अब तक बारिश की कमी से जूझ रहे थे लेकिन अब वे पॉजिटिव होने की तरफ आगे बढ़ रहे हैं."

लेकिन देश के अधिकतर हिस्सों में इस मॉनसून सीजन के दौरान औसत से कम बारिश रिकॉर्ड की गयी है, जिसको लेकर चिंता बढ़ रही है.

सोमवार को जारी भारत मौसम विभाग की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, इस साल 01 जून से 06 जुलाई के बीच देश में बारिश औसत से 20% कम रिकॉर्ड की गयी है. आमतौर पर 01 जून से 06 जुलाई के बीच देश में औसतन 213.3 मिलीमीटर बारिश होती है, लेकिन इस साल 06 जुलाई तक सिर्फ 170.7 मिलीमीटर बारिश हुई है.

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भारत मौसम विज्ञान के आकंड़ों के मुताबिक, 01 जून से 06 जुलाई, 2026 के बीच देश के 36 मौसम उप-मंडलों (Met Subdivisions) में से 30 में 'सामान्य से कम' बारिश दर्ज की गई है.

सिर्फ 6 मौसम उप-मंडल (Met Subdivisions) ऐसे हैं, जहां सामान्य से अधिक मॉनसून की बारिश दर्ज की गई है. इनमें शामिल हैं - सिक्किम, पूर्वी राजस्थान, ओडिशा, पश्चिमी मध्य प्रदेश, कोंकण-गोवा, अंडमान और निकोबार और तमिलनाडु-पुडुचेरी शामिल हैं. यानि, इन 6 मौसम उप-मंडल को छोड़कर देश के हर हिस्से में 06 जुलाई तक औसत से कम बारिश रिकॉर्ड की गयी है.

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सबसे ज़्यादा बारिश की कमी पूर्वी और उत्तरपूर्वी भारत में देखी गयी जहां इन 36 दिनों के दौरान औसत से 41% कम बारिश हुई है.

दूसरी सबसे ज़्यादा बारिश की कमी उत्तर-पश्चिम भारत में रिकॉर्ड की गई है, जहां बारिश औसत से 19% कम रिकॉर्ड की गयी है, जबकि दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत में बारिश की कमी 15% रही है. सेंट्रल इंडिया क्षेत्र में 01 जून से 06 जुलाई के बीच औसत से सिर्फ 5% कम बारिश दर्ज़ की गयी है.

01 जून से 06 जुलाई, 2026 के बीच सामान्य से कम बारिश दर्ज करने वाले प्रमुख राज्य हैं:

कमज़ोर मॉनसून का असर (01 जून से 06 जुलाई, 2026)

  1.  बिहार (-56%)
  2.  दिल्ली (-47%)
  3.  उत्तर प्रदेश (-45%)
  4.  असम (-39%)
  5.  पंजाब (-24%)
  6.  हरियाणा (-25%)
  7.  गुजरात (-27%)
  8.  कर्नाटक (-25%)
  9.  केरल (-28%)
  10.  उत्तराखंड (-21%)

भारत मौसम विभाग के मुताबिक, दक्षिण झारखंड और उससे सटे उत्तरी ओडिशा के अंदरूनी इलाकों के ऊपर एक कम दबाव का क्षेत्र (Depression) बना हुआ है.

अगले 3 दिनों के दौरान देश के मध्य हिस्सों में मॉनसून के सक्रिय रहने की संभावना है. 7 जुलाई को कोंकण, गुजरात राज्य और तटीय कर्नाटक में, 07 से 8 जुलाई के दौरान मध्य महाराष्ट्र में और 8 जुलाई को उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में कहीं-कहीं काफी ज़्यादा बारिश होने की संभावना है.

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ज़ाहिर है, अगले कुछ दिन देश के कुछ हिस्सों में मॉनसून की स्थिति में सुधार की उम्मीद है, और इससे बारिश की कमी की कुछ भरपाई भी संभव होगी. लेकिन अल नीनो का असर आने वाले हफ़्तों में धीरे धीरे बढ़ने की आशंका है, और सरकारी एजेंसियों को कम बारिश वाले इलाकों में इसके असर से निपटने की तैयारी सक्रियता से करनी होगी.

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