- पाकिस्तान 5 फरवरी को कश्मीर सॉलिडैरिटी डे के रूप में अपना प्रोपेगैंडा अभियान चलाने की तैयारी कर रहा है
- लश्कर-ए-तैयबा के प्रॉक्सी संगठन TRF ने आतंकवाद-रोधी विशेषज्ञ जुनैद कुरैशी को जान से मारने की धमकी दी है
- 1989 से 2020 के बीच पाकिस्तान समर्थित आतंकवादियों ने 5,000 से अधिक कश्मीरी बुद्धिजीवियों, नागरिकों की हत्या की
पाकिस्तान 5 फरवरी को तथाकथित 'कश्मीर सॉलिडैरिटी डे' के रूप में अपना सालाना प्रोपेगेंडा अभियान चलाने की तैयारी कर रहा है. दूसरी तरफ उसकी खुफिया एजेंसी आतंकी प्रॉक्सी संगठनों के जरिये उन कश्मीरी बुद्धिजीवियों की हत्या की धमकियां दे रही हैं. जो बुद्धजीवी वैश्विक मंचों पर इस्लामाबाद द्वारा प्रायोजित आतंकवाद को लगातार बेनकाब कर रहे हैं. पाकिस्तान के लिए ये असहज करने वाली स्थिति है, क्योंकि ऐसे में उसका प्रोपोगैंडा काम नहीं करेगा.
जुनैद कुरैशी को जान से मारने की धमकी
बुद्धिजीवियों की वजह से बौखलाए संगठन लश्कर-ए-तैयबा (LeT) ने अपने प्रॉक्सी संगठन ‘द रेजिस्टेंस फ्रंट'(TRF) के तहत यूरोपियन फाउंडेशन फॉर साउथ एशियन स्टडीज (EFSAS) के निदेशक और जाने-माने आतंकवाद-रोधी विशेषज्ञ जुनैद कुरैशी को जान से मारने की धमकी दी है. यह धमकी TRF की ब्रांडिंग वाले एंड-टू-एंड एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के माध्यम से भेजी गई. मैसेज में कुरैशी को 'गद्दार' कह कर संबोधित किया जा रहा है. साफ तौर पर आतंकी ये कह रहे हैं कि संगठन को उनकी हत्या करने में 'कोई हिचक' नहीं होगी. बीते छह महीनों में ये जुनैद को ये दूसरी ऐसी धमकी मिली है. ये धमकी उन लोगों को दी गई है, जो पाकिस्तान के आतंक वाले झूठे नैरेटिव को चुनौती देते हैं और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर जम्मू-कश्मीर में इस्लामाबाद के प्रॉक्सी युद्ध को उजागर करते हैं.
1989 से 2020 के बीच 5,000 लोगों ही हत्या
इस तरह की धमकियों की गंभीरता को, अतीत की हिंसक घटनाएं और भी पुख्ता करती हैं. 1989 से 2020 के बीच पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठनों ने आतंकवाद का विरोध करने या भारत का समर्थन करने के कारण 5,000 से अधिक कश्मीरी नागरिकों, पत्रकारों, राजनेताओं और बुद्धिजीवियों की हत्या की है. जून 2018 में ‘राइजिंग कश्मीर' के संपादक शुजात बुखारी की हत्या हुई थी. उन्हें कई महीनों से हिज्बुल मुजाहिदीन की ओर से धमकियां मिल रही थीं. हाल ही में अप्रैल 2025 में कुपवाड़ा में सामाजिक कार्यकर्ता गुलाम रसूल माग्रे की भी संदिग्ध आतंकियों द्वारा हत्या कर दी गई थी.
ISI की भूमिका का संकेत
एक प्रतिष्ठित मीडिया आउटलेट से बातचीत में जुनैद कुरैशी ने सीधे तौर पर पाकिस्तान की इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (ISI) पर धमकियां देने का आरोप लगाया. जुनैद के मुताबिक, यह धमकियां ISI द्वारा भेजी जाती हैं. लश्कर-ए-तैयबा तथा उसका कमांडर शेख सज्जाद गुल इन्हें आगे पहुंचाता है. उन्होंने बताया कि धमकी भरे लेटर में प्रस्तावित कश्मीरी बुद्धिजीवी थिंक टैंक से जुड़ी संवेदनशील जानकारियों का भी जिक्र था. ये जानकारियां सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं हैं और केवल सीमित लोगों को ही पता हैं. इससे सीधे तौर पर पूरे मामले में ISI की भूमिका का संकेत मिलता है.
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कौन है जुनैद कुरैशी?
कुरैशी ने आगे कहा कि लेटर में कश्मीर पर पाकिस्तान के प्रोपेगैंडा को ध्वस्त करने और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर दस्तावेजी सबूत पेश करने के उनके प्रयासों का विशेष रूप से जिक्र किया गया है. पाकिस्तान का सुरक्षा प्रतिष्ठान उन्हें अपने लिए सीधा खतरा मानता है. उल्लेखनीय है कि जुनैद कुरैशी 1971 में एयर इंडिया की फ्लाइट IC-405 के अपहरणकर्ताओं में शामिल हाशिम कुरैशी के पुत्र हैं. हालांकि, उन्होंने अपने पिता की विचारधारा को हमेशा सार्वजनिक रूप से खारिज किया है और स्पष्ट कहा है कि यह अपहरण उनके जन्म से पहले हुआ एक आतंकी कृत्य था. EFSAS के माध्यम से कुरैशी ने लगातार पाकिस्तान के 'कश्मीर में आजादी की लड़ाई' वाले दावे को बेनकाब किया है. उन्होंने सबूतों के साथ यह दिखाया है कि वास्तव में यह ISI के निर्देश पर लश्कर-ए-तैयबा, हिज्बुल मुजाहिदीन और जैश-ए-मोहम्मद द्वारा चलाया जा रहा राज्य-प्रायोजित आतंकी अभियान है.
धमकी देने वाला एन्क्रिप्टेड अकाउंट रावलपिंडी से ऑपरेट
इंटेलिजेंस के सूत्रों ने पुष्टि की है कि धमकी देने के लिए इस्तेमाल किया गया एन्क्रिप्टेड अकाउंट रावलपिंडी से संचालित हो रहा है और सीधे तौर पर लश्कर कमांडर शेख सज्जाद गुल के कंट्रोल में है. यह अकाउंट 24 अगस्त 2025 को एक फर्जी नाम से बनाया गया था और नियमित रूप से TRF का प्रोपेगेंडा, ऑपरेशनल अपडेट्स और तस्वीरें साझा करने के लिए इस्तेमाल किया जाता रहा है, जिससे पाकिस्तान आधारित कमांड और कंट्रोल की भूमिका और स्पष्ट होती है.
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यह पूरा मामला एक बार फिर पाकिस्तान के कश्मीर नैरेटिव के दोहरेपन को उजागर करता है. एक ओर वह 5 फरवरी को कश्मीरियों के साथ एकजुटता का दावा करता है, वहीं दूसरी ओर उसकी खुफिया एजेंसी आतंकी संगठनों के जरिये उन कश्मीरी आवाजों को डराने, चुप कराने और खत्म करने में लगी है, जो उसके झूठे दावों को कश्मीर के भीतर और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चुनौती देती हैं. पाकिस्तान इस कारण भी बौखलाया हुआ है क्योंकि बीते कुछ सालों से कश्मीर के युवाओं को बरगलाना लगभग नामुमकिन होता जा रहा है. लोकल स्तर पर अब आतंकी संगठनों में होने वाला रिक्रूटमेंट लगभग खत्म हो रहा है. ऐसे में पाकिस्तान, डर और आतंक का इस्तेमाल कर घाटी के माहोल को बेपटरी करना चाहता है.














