- SC ने NCERT की कक्षा आठ की किताब में न्यायपालिका पर भ्रष्टाचार का उल्लेख मिलने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया.
- किताब की केवल कुछ कॉपियां उपलब्ध थीं, जिन्हें करोल बाग के एक बुकस्टोर से खोजकर सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचाया गया.
- जजों की कॉफी मीटिंग में सभी ने किताब की सामग्री को न्यायपालिका की गरिमा पर प्रहार माना और सुओ मोटो एक्शन हुआ.
सुप्रीम कोर्ट द्वारा NCERT की कक्षा 8 की किताब पर लगाए गए पूर्ण प्रतिबंध के पीछे की कहानी किसी तेज़-रफ्तार राजनीतिक थ्रिलर से कम नहीं. 48 घंटे तक चली हलचल, करोल बाग के एक बुकस्टोर की अहम भूमिका, जजों की कॉफी मीटिंग और CJI की कड़क नाराज़गी... ये सब मिलकर बताते हैं कि कैसे मामला अखबार की एक रिपोर्ट से देश की सर्वोच्च अदालत तक पहुंच गया.
मंगलवार की सुबह: CJI को अखबार में दिखा ‘करेप्शन इन ज्यूडिशियरी'
NCERT की नई किताब में ‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार' वाला सेक्शन देखकर CJI सुर्या कांत चौंक पड़े. यह रिपोर्ट The Indian Express में छपी थी. CJI ने तुरंत आदेश दिया, 'किताब की कॉपी तुरंत लाई जाए.' समस्या यह थी कि बाजार में कुल 32 कॉपियां ही पहुंची थीं. किताब मिलना लगभग असंभव था.
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करोल बाग का मिशन: ‘सैंपल कॉपी' की खोज
रजिस्ट्री ने कई जगह खोज की लेकिन कोई कॉपी नहीं मिली. तभी एक वरिष्ठ अधिकारी को करोल बाग के एक बुकस्टोर की याद आई. स्टोर के पास बिक्री की कॉपी तो नहीं थी, लेकिन एक सैंपल कॉपी मौजूद थी. झटपट वह कॉपी CJI तक पहुंचाई गई. इसके बाद रजिस्ट्री ने NCERT से आधिकारिक कॉपी भी मंगवाई जो शाम तक पहुंच गई.
बुधवार सुबह जजेज़ लाउंज: कॉफी पर ‘किताब की सुनवाई'
CJI अगले दिन किताब जजों की रोज की कॉफी मीटिंग में ले गए. उन्होंने अध्याय दिखाकर पूछा, 'आपकी क्या राय है?' सभी जजों का एकमत निर्णय, 'न्यायपालिका की गरिमा पर प्रहार है. कोर्ट को तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए.' यहीं तय हो गया कि सुप्रीम कोर्ट सुओ मोटो एक्शन लेगा.
कोर्ट में CJI की गरज: 'ज्यूडिशियरी को बदनाम करने का अधिकार किसी को नहीं'
दोपहर तक मामला अदालत में था. सीनियर वकील कपिल सिब्बल और अभिषेक मनु सिंघवी ने किताब की सामग्री पर चिंता जताई. CJI ने नाराज़गी से कहा, 'मैं किसी को न्यायपालिका की साख पर चोट नहीं करने दूंगा. चाहे वो कितना भी ऊंचा क्यों न हो. कानून अपना काम करेगा.'
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NCERT का डैमेज कंट्रोल
गुरुवार: सुप्रीम कोर्ट का ‘ब्लैंकेट बैन'
48 घंटे के भीतर सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया. किताब पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया. सभी प्रिंट कॉपियों की जप्ती के आदेश दिए गए. डिजिटल वर्ज़न की तुरंत हटाने का आदेश भी सर्वोच्च अदालत ने सुनाया. CJI ने बेहद सख्त टिप्पणी की कि अगर इसे रोका नहीं गया तो लोगों का न्यायपालिका से भरोसा उठ जाएगा. जिम्मेदार लोगों को नहीं छोड़ा जाएगा.- हेड्स मस्ट रोल.'
सरकार ने सफाई दी कि दो जिम्मेदार लोग भविष्य में UGC या मंत्रालयों के साथ काम नहीं करेंगे, पर CJI ने कहा कि यह छोटी बात है. गोली चली है और न्यायपालिका घायल हुई है.













