- असम के कछार जिले की दीपाली दास CAA के तहत भारत की नागरिक बनीं, जो शुरुआती लाभार्थियों में हैं.
- दीपाली दास को 2019 में फॉरेनर्स ट्रिब्यूनल ने अवैध प्रवासी घोषित किया था और उन्हें दो साल डिटेंशन में रखा गया.
- वह बांग्लादेश के सिलहट की रहने वाली हैं और 1987 में हबीगंज जिले के अभिमन्यु दास से शादी के बाद भारत आईं.
असम के कछार जिले की 59 वर्षीय दीपाली दास अब भारत की नागरिक बन चुकी हैं. वह CAA (नागरिकता संशोधन कानून) के तहत नागरिकता पाने वाली शुरुआती लाभार्थियों में शामिल हो गई हैं. यह सफर आसान नहीं था. उन्हें 2019 में फॉरेनर्स ट्रिब्यूनल ने ‘अवैध प्रवासी' घोषित किया था और बाद में उन्हें सिलचर डिटेंशन सेंटर में करीब दो साल बिताने पड़े.
2019 में ‘अवैध प्रवासी' घोषित, 2 साल डिटेंशन में
फॉरेनर्स ट्रिब्यूनल ने फरवरी 2019 में दीपाली दास को ‘अवैध प्रवासी' करार दिया था. 10 मई 2019 को उन्हें हिरासत में लेकर सिलचर डिटेंशन सेंटर भेजा गया, जहां वे 17 मई 2021 तक रहीं. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद ही उन्हें जमानत मिल सकी.
बांग्लादेश के सिलहट की रहने वाली, 1987 में हुई थी शादी
दीपाली मूल रूप से बांग्लादेश के सिलहट जिले के दिप्पुर गांव की रहने वाली हैं. उन्होंने 1987 में हबीगंज जिले के पराई गांव के रहने वाले अभिमन्यु दास से शादी की थी. इसके बाद वह भारत आईं. उनकी नागरिकता पहली बार 2013 में संदेह के घेरे में आई, जब पुलिस जांच में आरोप लगा कि वे 25 मार्च 1971 के बाद भारत में अवैध रूप से प्रवेश कर आई थीं.
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जिस चार्जशीट ने ‘विदेशी' बनाया… उसी ने CAA के तहत नागरिकता दिलाई
दीपाली की ओर से केस लड़ने वाले वकील धर्मानंद देब ने बताया कि 2013 की पुलिस चार्जशीट में उन्हें बांग्लादेशी नागरिक बताया गया था. CAA के तहत उनका सबसे बड़ा सबूत बन गया. इसी दस्तावेज के आधार पर उनका नागरिकता आवेदन मजबूत हुआ और अंततः उन्हें भारतीय नागरिकता मिली.
CAA लागू होने में देरी से अटका आवेदन
CAA 2019 में पास हुआ, लेकिन इसके नियम 2024 में अधिसूचित हुए. जेल से निकलने के बाद दीपाली आवेदन करना चाहती थीं, लेकिन नियमों में देरी के चलते प्रक्रिया लंबी हो गई. CAA उन हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध, ईसाई और पारसी प्रवासियों को नागरिकता का रास्ता देता है, जो 1971-2014 के बीच भारत आए थे.
असम में लाखों ‘डाउटफुल' नागरिक, लेकिन आवेदन कम
असम में करीब दो लाख लोग ‘D' यानी संदिग्ध नागरिक की सूची में हैं, लेकिन CAA लागू होने के बाद अब तक बहुत कम लोगों ने इसका आवेदन किया है. दीपाली का मामला असम में CAA के शुरुआती और महत्वपूर्ण उदाहरणों में गिना जा रहा है.













