बंगाल में रामनवमी जुलूस : श्रद्धा और सियासत के बीच की लाइन गड्डमड्ड हो गई है - NDTV ग्राउंड रिपोर्ट

जय श्रीराम का नारा अब सिर्फ जय-जयकार तक सीमित नहीं रह गया है. इसने कई राज्यों में राजनीति की दिशा बदलने तक का काम किया है. पश्चिम बंगाल के चुनावी माहौल में भी इसका असर दिख रहा है.

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कोलकाता वैसे तो दुर्गा पूजा के लिए मशहूर है, लेकिन अब रामनवमी को लेकर भी उत्साह बढ़ता जाता है. कहा जा रहा है कि पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर इस बार भक्ति में चुनाव की शक्ति भी जुड़ गई है, लिहाजा जोश हाई है और प्रभु राम के जयकारों की गूंज भी उतनी ही गहरी होती जा रही है. कई लोगों का कहना है कि ये सनातनी भक्ति है, इसमें राजनीति नहीं देखी जानी चाहिए. हालांकि कुछ लोगों के विचार अलग हैं.

कोलकाता में रामनवमी जुलूस की झांकियां, फोटो PTI

पश्चिम बंगाल में गुरुवार को जगह-जगह रामनवमी पर शोभायात्राएं निकाली गईं. धार्मिक आयोजन किए गए. पिछली बार हावड़ा और हुगली जिलों में अशांति को देखते हुए इस बार सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त किए गए. विभिन्न जिलों के तनावग्रस्त इलाकों को व्यापक सुरक्षा घेरे में रखा गया है. कोलकाता से सटे हुगली जिले के चंदननगर और उत्तरी दिनाजपुर जिले के इस्लामपुर में सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए गए. 

कोलकाता में रामनवमी के अवसर पर भगवान श्रीराम की सवारी निकाली गई. इस दौरान एनडीटीवी संवाददाता ने जुलूस में शामिल लोगों से बातचीत की. क्या इस बार चुनाव की वजह से रामनवमी को लेकर ज्यादा उत्साह है? इस सवाल पर लोगों का कहना था कि ऐसा नहीं है. रामनवमी का जुलूस तो हर साल ही निकलता है. इसमें राजनीति नहीं देखी जानी चाहिए. 

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उनका कहना था कि रामनवमी का यह आयोजन किसी पार्टी विशेष का आयोजन नहीं है. ये सनातनी भक्ति है. वहीं, इसी जुलूस में शामिल एक महिला का कहना था कि पश्चिम बंगाल में भी रामनवमी का उत्सव बड़े धूमधाम से मनाया जाना चाहिए क्योंकि यहां हिंदुओं की स्थिति खराब होती जा रही है. 

जय श्रीराम का नारा अब सिर्फ जय-जयकार तक सीमित नहीं रह गया है. इसने कई राज्यों में राजनीति की दिशा बदलने तक का काम किया है. पश्चिम बंगाल के चुनावों में भी इसका असर दिख रहा है. इतिहास गवाह है कि सड़कों पर निकलने वाले जुलूस में सियासी नारे भी लगते रहे हैं. जाहिर है, श्रद्धा और सियासत के बीच की लाइन गड्डमड्ड हो गई है. पूरा इतिहास उठाकर देख लीजिए, ये लाइन ऐसी ही रही है. धार्मिक जुलूसों के कई मामले कोर्ट कचहरी तक भी पहुंचे हैं. हालांकि इस साल ऐसी नौबत नहीं आई. 

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सियासी पंडित मानते हैं कि बंगाल में धार्मिक आयोजन और सांस्कृतिक कार्यक्रम इस बार के चुनाव में अहम हो गए हैं. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी जहां अपनी सरकार की उपलब्धियां और विकास कार्य गिना रही हैं, वहीं बीजेपी सांस्कृतिक पहचान और परंपरा पर भी फोकस कर रही है. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की चुनावी चुनौती दे रहे बंगाल बीजेपी के बड़े नेता शुभेंदु अधिकारी रामनवमी पर भवानीपुर में एक बड़े जुलूस में शामिल हुए. उनका कहना था कि रामनवमी महज धार्मिक आयोजन नहीं है, ये भारत की सांस्कृतिक पहचान और मूल्यों की प्रतीक भी है. 

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