हजारों घर खरीदारों से 2000 करोड़ की ठगी, ED की रडार पर 'अर्थ ग्रुप', 10 ठिकानों पर छापेमारी

ED ने अर्थ इंफ्रास्ट्रक्चर के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग मामले में दिल्ली-NCR के 10 ठिकानों पर छापेमारी कर 14 करोड़ रुपये से अधिक की नकदी और जेवरात जब्त किए हैं.

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  • ED ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच में अर्थ इंफ्रास्ट्रक्चर और उसकी ग्रुप कंपनियों के खिलाफ तलाशी अभियान चलाया
  • ईडी ने दिल्ली और गुरुग्राम में 10 ठिकानों पर छापेमारी कर नकद, गहने, चांदी के बुलियन और लग्जरी घड़ियां जब्त कीं
  • अर्थ ग्रुप ने दिल्ली-एनसीआर में कई रियल एस्टेट प्रोजेक्ट शुरू कर करोड़ों रुपये जमा किए
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प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ा एक्शन करते हुए अर्थ इंफ्रास्ट्रक्चर और उसकी ग्रुप कंपनियों के खिलाफ तलाशी अभियान चलाया. ईडी ने यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच करते हुए की. ईडी ने PMLA के प्रावधानों के तहत गुरुग्राम और दिल्ली में कंपनी के प्रमोटरों, निदेशकों और सहयोगियों से जुड़े 10 ठिकानों छापेमारी की. इस छापेमारी में ईडी ने करीब 6.3 रुपये करोड़ नकद, लगभग 7.5 करोड़ रुपये के गहने, साथ ही चांदी के बुलियन और लग्जरी घड़ियां जब्त कीं.

ED ने की कार्रवाई

मनी लॉन्ड्रिंग की यह जांच दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) द्वारा EIL, उसके निदेशकों और संबंधित कंपनियों के खिलाफ धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश के आरोपों में दर्ज पांच FIR से शुरू हुई है. इसके अलावा, SFIO ने कंपनी अधिनियम के तहत एक आपराधिक शिकायत भी दर्ज की है.

किस मामले में हुआ एक्शन?

ईडी के मुताबिक, अर्थ ग्रुप ने दिल्ली-NCR, गुरुग्राम, ग्रेटर नोएडा और लखनऊ में अर्थ ब्रांड के तहत कई रियल एस्टेट प्रोजेक्ट शुरू किए, जिनमें अर्थ टाउन, अर्थ सैफायर कोर्ट, अर्थ कोपिया और अन्य शामिल हैं. एजेंसी का आरोप है कि कंपनी ने 19,425 से ज्यादा होमबायर और निवेशकों से समय पर डिलीवरी और निश्चित रिटर्न का वादा करके लगभग 2,024.45 करोड़ जमा किए. हालांकि, कई प्रोजेक्ट या तो अधूरे छोड़ दिए गए या उनका कब्जा खरीदारों को नहीं सौंपा गया.

ED Raid

शेल कंपनियों के जरिए हुआ पैसे का लेन-देन

जांच ​​में पता चला है कि खरीदारों से जमा की गई रकम को कथित तौर पर ग्रुप कंपनियों और परिवार के सदस्यों के नाम पर गुरुग्राम, दिल्ली और राजस्थान में जमीन खरीदने के लिए इस्तेमाल किया गया. इसके लिए शेल कंपनियों के जरिए पैसे का लेन-देन किया गया, निजी जमीन के सौदे किए गए और परिवार के उन सदस्यों को भुगतान किया गया जिनकी व्यवसाय में कोई सक्रिय भूमिका नहीं थी. जांचकर्ताओं ने यह भी पाया कि इस तरह से इस्तेमाल की गई रकम से खरीदी गई संपत्तियों को बेचकर पैसे को ठिकाने लगाया गया.

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ईडी ने इस मामले में शामिल मुख्य व्यक्तियों की पहचान अवधेश कुमार गोयल, रजनीश मित्तल, अतुल गुप्ता और विकास गुप्ता के रूप में की है. एजेंसी ने लैवेंडर इंफ्राटेक प्राइवेट लिमिटेड और अन्य सहित कई ग्रुप कंपनियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं, जिन पर पैसे के लेन-देन और उसे दूसरी जगह इस्तेमाल करने में शामिल होने का आरोप है. इस मामले में आगे की जाँच अभी जारी है.

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