- अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने उनसे युद्ध रोकने की गुहार लगाई थी.
- ऑपरेशन सिंदूर में भारतीय सेना ने पाकिस्तान के कई आतंकवादी ढांचों और सामरिक ठिकानों को नुकसान पहुंचाया था.
- इस अभियान के बाद पाकिस्तान की स्थिति नाजुक हो गई और शहबाज शरीफ ने अंतरराष्ट्रीय मदद मांगी थी.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ताजा बयान में यह दावा कि शहबाज शरीफ ने उनसे कहा था कि अगर भारत‑पाक युद्ध नहीं रुकता तो 3.5 करोड़ लोग मारे जाते, यह न्यूक्लियर वॉर बन सकता था. अब यह भारत में चर्चा का बड़ा मुद्दा बन गया है. ट्रंप ने कहा कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने उनसे खुद गुहार लगाई थी कि जंग रुकवाइए, वरना कहर टूट पड़ेगा.
ट्रंप के इस बयान ने एक बार फिर ऑपरेशन सिंदूर की उस खामोश लेकिन विध्वंसक दास्तान को सुर्खियों में ला दिया है, जहां भारतीय सेना के प्रहार से पाकिस्तान की हालत डगमगा गई थी.
'सिंदूर' की स्ट्राइक जिसने पाकिस्तान को झुका दिया
रिटायर्ड मेजर जनरल ए.के. सिवाच के अनुसार, ऑपरेशन सिंदूर में भारतीय सेना ने पाकिस्तान के आतंकवादी ढांचों पर ऐसा प्रहार किया कि इस्लामाबाद घुटनों पर आ गया. सिवाच के मुताबिक 250 से ज्यादा आतंकी ढेर हो गई. 9-10 मई की रात भारतीय सेना का सबसे बड़ा प्रहार था. पाकिस्तान के कई सामरिक ठिकानों पर सटीक हमले किए गए. इनमें रफ़ीकी, मुरीदके, चकलाला, रहीम यार खान, सकर, चुनियन, पसरूर, सियालकोट इन इलाकों में रडार स्टेशन, कमांड-एंड-कंट्रोल सेंटर, गोला-बारूद डिपो बुरी तरह तबाह किए गए.
यह भी पढ़ें- पाक PM ने बोला था- करोड़ों लोग मर जाएंगे, मैंने रुकवाया भारत-पाक परमाणु युद्ध... ट्रंप का फिर वही राग
सिवाच ने कहा कि इस कार्रवाई के बाद पाकिस्तान पूरी तरह हिल गया और डर का माहौल ऐसा था कि शहबाज शरीफ ने अंतरराष्ट्रीय मदद की गुहार लगाई.
क्या वास्तव में शहबाज ने ट्रंप से हाथ जोड़े?
ट्रंप के अनुसार पाकिस्तान के पीएम ने उनसे कहा कि अगर आपने दखल नहीं दिया, तो 3.5 करोड़ लोग मर जाएंगे. यह सीधा संकेत था कि पाकिस्तानी नेतृत्व को आशंका थी कि हालात परमाणु युद्ध तक पहुंच सकते हैं. ट्रंप ने कहा कि संघर्ष इतना भयानक मोड़ ले चुका था कि जरा‑सी चिंगारी बड़े विनाश में बदल सकती थी.
ट्रंप के बयान से क्या साफ हुआ?
ट्रंप के मुताबिक भारत‑पाक युद्ध उस समय न्यूक्लियर स्तर तक जा सकता था. पाकिस्तान को डर था कि वह भारतीय कार्रवाई का सामना नहीं कर पाएगा. इसी डर ने शहबाज की मध्यस्थता की अपील को जन्म दिया.
गौरतलब है कि भारत ने हमेशा तीसरे पक्ष की भूमिका को खारिज किया है, लेकिन ट्रंप लगातार दावा करते रहे हैं कि मई में हुआ चार दिन का संघर्ष उन्होंने रोका.
यह भी पढ़ें- ट्रंप ने अमेरिकी संसद में दिया सबसे लंबा भाषण, ईरान को चेताया, भारत-पाक जंग पर फिर बोला झूठ
सिंदूर की सफलता और पाकिस्तान का डर
जनरल सिवाच के दावों और ट्रंप के बयानों को जोड़ें तो तस्वीर साफ होती है. ऑपरेशन सिंदूर ने पाकिस्तान को सैन्य स्तर पर तोड़ दिया था. शहबाज को लगा कि भारत की आक्रामक कार्रवाई से हालात हाथ से निकल जाएंगे. परमाणु चेतावनी की नौबत आने के डर ने पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय मदद की तलाश में धकेला.
ट्रंप के आज के बयान ने एक बार फिर यह चिन्हित कर दिया कि ऑपरेशन सिंदूर सिर्फ एक जवाबी कार्रवाई नहीं थी. यह पाकिस्तान के लिए ऐसा झटका था कि उसके प्रधानमंत्री को डर था कि जंग पूरी तरह नियंत्रण से बाहर हो जाएगी.
भारत ने जहां ऑपरेशन को सामरिक सफलता माना, वहीं पाकिस्तान के लिए यह चेतावनी थी कि भारत की मार अब सीमा पार बहुत गहराई तक महसूस होती है.













