दिल्लीवालों के लिए गुड न्यूज! इसी महीने खुल जाएगा मुकरबा चौक अंडरपास, ट्रैफिक जाम से मिलेगी बड़ी राहत

दिल्ली में मुकरबा चौक अंडरपास का 98 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है. यह अंडरपास आम लोगों के लिए इसी महीने खुल जाएगा.

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दिल्ली का Mukarba Chowk underpass खुलने के लिए तैयार
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  • दिल्ली के मुकरबा चौक पर बन रहे अंडरपास का निर्माण कार्य 98 प्रतिशत पूरा हो चुका है और इस महीने खुल जाएगा
  • अंडरपास में दोपहिया, पैदल और चारपहिया वाहनों के लिए तीन सुरंगें शामिल हैं जो ट्रैफिक भीड़ कम करेंगी
  • यह अंडरपास बादली, रोहिणी, आजादपुर और जहांगीरपुरी के बीच सीधा संपर्क प्रदान करेगा और जाम कम करेगा
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राजधानी दिल्ली के भीड़भाड़ वाले मुकरबा इलाके में अब जाम के झंझट से आजादी मिलने वाली है. मुकरबा चौक पर बन रहे अंडरपास का का 98 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है. यह अंडरपास इसी महीने के आखिर तक खोल दिया जाएगा. दिल्ली के पीडब्ल्यूडी मंत्री प्रवेश वर्मा ने इसका दौरा किया. उन्होंने बताया कि PWD ने निर्माण कार्य पूरा कर लिया है और अब बस आखिरी काम बाकी है.

तीन सुरंगें शामिल, इन इलाके के लोगों को होगा फायदा

इस प्रोजेक्ट का मकसद उत्तरी दिल्ली के इस व्यस्त इलाके में ट्रैफिक की भीड़ कम करना है. इसमें दोपहिया वाहनों, पैदल चलने वालों और चारपहिया वाहनों के लिए तीन सुरंगें शामिल हैं. योजना के मुताबिक, यह अंडरपास बादली, रोहिणी, आजादपुर और जहांगीरपुरी के बीच सीधा संपर्क देगा, जिससे वाहनों को मुकरबा चौक के भारी भीड़भाड़ वाले इंटरचेंज से होकर गुजरने की जरूरत नहीं पड़ेगी.

रोजाना 15 हजार से ज्यादा वाहन गुजरेंगे

PWD मंत्री ने कहा, 'हम इस महीने तक इसे ट्रैफिक के लिए खोलने की योजना बना रहे हैं, क्योंकि काम 98 प्रतिशत पूरा हो चुका है.' उन्होंने बताया कि जलभराव को रोकने पर खास ध्यान दिया गया है और सड़क का ढलान उसी हिसाब से बनाया गया है. उन्होंने कहा, 'इस रास्ते पर रोजाना भारी ट्रैफिक रहता है और इस प्रोजेक्ट का मकसद वाहनों की आवाजाही को और आसान बनाना है. रोजाना करीब 15,800 वाहन इस कॉरिडोर का इस्तेमाल करेंगे, जिससे इस पूरे रास्ते पर ट्रैफिक की आवाजाही ज़्यादा आसान और तेज हो जाएगी.'

हर साल 58 हजार ईंधन की होगी बचत

बता दें कि मुकरबा चौक अंडरपास प्रोजेक्ट 2022 में आउटर रिंग रोड पर ट्रैफिक की भीड़ कम करने के लिए शुरू किया गया था. मंत्री ने बताया कि इसके पूरा होने के बाद इससे हर साल करीब 58,000 लीटर ईंधन की भी बचत होगी. पर्यावरण पर पड़ने वाले असर को बताते हुए अधिकारियों ने कहा कि यह प्रोजेक्ट हर साल करीब 135 टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन कम करने में मदद करेगा, जो हर साल करीब 810 पेड़ों की सोखने की क्षमता के बराबर है.

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