जीवनसाथी पर बेवफाई का झूठा आरोप मानसिक क्रूरता : दिल्ली हाईकोर्ट

अदालत ने कहा कि जीवनसाथी पर निराधार आरोप लगाना, विशेष रूप से उसके चरित्र और निष्ठा पर सवाल उठाना व बच्चों की वैधता को खारिज करना क्रूरता है और यह वैवाहिक बंधन को अपूरणीय क्षति पहुंचाता है.

विज्ञापन
Read Time: 3 mins
प्रतीकात्मक तस्वीर

दिल्ली उच्च न्यायालय ने अपने एक फैसलेे में कहा है कि जीवनसाथी पर विवाहेतर संबंध रखने का झूठा आरोप लगाना और बच्चों के पालन-पोषण से इनकार करना गंभीर मानसिक क्रूरता है. न्यायमूर्ति सुरेश कुमार कैत और न्यायमूर्ति नीना बंसल कृष्णा की खंडपीठ ने यह फैसला देते हुए पारिवारिक अदालत के निर्णय को बरकरार रखा. अदालत ने पत्नी द्वारा कथित क्रूरता के आधार पर तलाक के लिए उसके पति की याचिका को खारिज कर दिया था.

अदालत ने कहा कि जीवनसाथी पर निराधार आरोप लगाना, विशेष रूप से उसके चरित्र और निष्ठा पर सवाल उठाना व बच्चों की वैधता को खारिज करना क्रूरता है और यह वैवाहिक बंधन को अपूरणीय क्षति पहुंचाता है. पीठ ने कहा कि इस तरह की हरकतें अपमान और क्रूरता का सबसे गंभीर रूप हैं. इन आधारों पर आरोप लगाने वाले को तलाक नहीं प्रदान किया जा सकता.

कार्यवाही के दौरान, पता चला कि पति ने बार-बार अपनी पत्नी पर बेवफाई और कई पुरुषों के साथ अनुचित संबंधों का आरोप लगाया था, लेकिन जिरह के दौरान स्वीकार किया कि उसने कभी भी आपत्तिजनक स्थिति नहीं देखी थी. अदालत ने कहा," यह बहुत गंभीर बात है कि याचिकाकर्ता ने लगातार अपनी पत्नी पर निराधार व निदंनीय आरोप लगाए व उसके चरित्र पर सवाल उठाया.''

Advertisement

न्यायाधीशों ने अपमानजनक आरोप व पितृत्व पर सवाल उठाकर निर्दोष बच्चों को निशाना बनाने के लिए अपीलकर्ता की आलोचना की. पीठ ने कहा," झूठे और निराधार आरोप लगाकर अपीलकर्ता बेटे और बेटी के पालन-पोषण से इनकार नहीं कर सकता." इसमें कहा गया है कि इस तरह के निंदनीय आरोप और वैवाहिक बंधन को न मानना और निर्दोष बच्चों को स्वीकार करने से इनकार करना, गंभीर प्रकार की मानसिक क्रूरता है.

Advertisement

अदालत ने कहा कि पारिवारिक अदालत का पति के आरोपों को उसकी पत्नी के चरित्र, सम्मान और मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर हमला करार देना उचित था. अदालत ने कहा, "पति द्वारा अपनी पत्नी के चरित्र पर गंभीर आरोप लगाना और बच्चों की भी नहीं बख्शना अपमान और क्रूरता का सबसे खराब रूप है. यह अपीलकर्ता को तलाक मांगने से वंचित करने के लिए पर्याप्त है." पीठ ने पत्नी द्वारा क्रूरता को सहन करने और पति द्वारा अपने दावों को साबित करने में विफल रहने पर पारिवारिक अदालत के तलाक से इनकार के फैसले को बरकरार रखा.

Advertisement

ये भी पढ़ें : पंजाब पुलिस ने 48 घंटों की मशक्कत के बाद गैंगस्टर राजू शूटर के साथ उसके 10 गुर्गों को दबोचा

Advertisement

ये भी पढ़ें : 'NDTV इलेक्शन कार्निवल' : गुजरात में BJP लगाएगी क्लीन स्वीप की 'हैट्रिक' या कांग्रेस करेगी वापसी?

(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
Featured Video Of The Day
Waqf Amendment Bil | बिल धर्म के आधार पर...: Congress सांसद Syed Nasir Hussain
Topics mentioned in this article