- कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में बेरोजगारी और असमानता की अनदेखी करने का आरोप लगाया.
- थरूर ने कहा कि बजट में आम आदमी की समस्याओं और रहन-सहन पर खर्च को पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया है.
- उन्होंने बताया कि पिछले बजट में आवंटित पांच लाख करोड़ रुपये में से केवल 41 प्रतिशत राशि खर्च हुई है.
लोकसभा में मंगलवार को कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने आरोप लगाया कि वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में बेरोजगारी को नजरअंदाज किया गया, रहन-सहन पर खर्च और असमानता की अनदेखी की गई और आम आदमी की समस्याओं पर कोई ध्यान नहीं दिया गया. उन्होंने सदन में केंद्रीय बजट पर सामान्य चर्चा की शुरूआत करते हुए मिर्जा गालिब के एक मशहूर शेर का उल्लेख करते हुए सरकार पर कटाक्ष किया कि ‘‘हम को मालूम है जन्नत की हकीकत, लेकिन दिल के खुश रखने को 'ग़ालिब' ये ख़याल अच्छा है.''
कांग्रेस नेता कहा कि इस साल के बजट को देखकर प्रतीत होता है कि कार में एयर बैग को ‘रीअरेंज' कर दिया गया है ताकि उसमें बैठे यात्री सुरक्षित महसूस करें. थरूर ने दावा किया, ‘‘बजट में बेरोजगारी को नजरअंदाज किया गया, रहन-सहन पर खर्च और असमानता की अनदेखी की गई है. आम आदमी के संघर्ष पर कोई ध्यान नहीं दिया गया है.''
'यह शासन नहीं, हेडलाइन मैनेजमेंट है...'
उन्होंने मीडिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि पिछले बजट में 53 बड़ी कल्याणकारी योजनाओं के लिए पांच लाख करोड़ रुपये से अधिक का प्रावधान किया गया लेकिन वित्त वर्ष के पहले नौ महीनों में केवल 41 प्रतिशत ही खर्च किया गया. उन्होंने विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के लिए आवंटित राशि का बड़ा हिस्सा खर्च नहीं किये जाने पर कटाक्ष करते हुए कहा, ‘‘यह शासन नहीं, हेडलाइन मैनेजमेंट है.''
'हमारे किसानों की आय दोगुनी करने का वादा...'
थरूर ने कृषि क्षेत्र पर बजट में ध्यान नहीं दिये जाने का आरोप लगाते हुए कहा, ‘‘हमारे किसानों की आय दोगुनी करने का वादा आपसे पूरा तो हो नहीं पाया, कम से कम उनकी ‘सम्मान निधि' तो बढ़ा दीजिए. पिछले छह साल से यह (प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि) केवल छह हजार रूपये पर अटकी हुई है.'' उन्होंने 2047 तक विकसित भारत बनाने के नरेन्द्र मोदी सरकार के लक्ष्य को सराहनीय बताया, हालांकि इस दिशा में बजट में किसी विश्वसनीय पथ पर आगे नहीं बढ़ने का उल्लेख किया.
उन्होंने कहा, ‘‘बेरोजगारी का बढ़ना जारी है. नौकरियां कम हो गई हैं. राहत पाने के लिए पहले से जद्दोजहद कर रहे छोटे कारोबार नियमों के अनुपालन के विभिन्न चरण में फंस गए हैं. अनौपचारिक श्रमिकों और गिग वर्कर को अनिश्चिता एवं असुरक्षा की स्थिति में धकेल दिया गया है.'' कांग्रेस सांसद ने कहा, ‘‘गिग वर्कर हमारी नयी अर्थव्यवस्था की रीढ़ की हड्डी हैं. लेकिन बजट में उनका कोई जिक्र नहीं है.''
ये भी पढे़ं : - हेयरलाइन फ्रैक्चर के बाद व्हीलचेयर पर संसद भवन पहुंचे शशि थरूर बोले- 'नजर तो लग गई'













