देश में बढ़ा चीतों का कुनबा, दक्षिण अफ्रीका से चार और चीते लाए गए बेंगलुरु 

अधिकारियों के मुताबिक, दक्षिण अफ्रीका से चीतों को विशेष निगरानी के बीच लाया गया है. फिलहाल वन विभाग और पशु चिकित्सा विशेषज्ञों की टीम उनकी सेहत पर लगातार नजर रख रही है.

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  • दक्षिण अफ्रीका से 4 चीतों को भारत लाया गया है, इन्‍हें बेंगलुरु के बैनरघट्टा बायोलॉजिकल पार्क में रखा जाएगा.
  • चीतों को विशेष निगरानी में रखा गया है. वन विभाग और पशु चिकित्सा विशेषज्ञ उनकी सेहत पर नजर रख रहे हैं.
  • कर्नाटक के वन मंत्री ने चीतों को 30 दिनों के लिए क्वारंटीन में रखने और मेडिकल जांच के निर्देश दिए.
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भारत में चीतों का कुनबा लगातार बढ़ रहा है. दक्षिण अफ्रीका से चार और चीतों को भारत लाया गया है. ये सभी चीते सुरक्षित तरीके से बेंगलुरु पहुंचे चुके हैं और उन्हें कर्नाटक के बैनरघट्टा बायोलॉजिकल पार्क में रखा जाएगा. यह कदम राज्य में वन्यजीव संरक्षण को बढ़ावा देने और लोगों में जैव-विविधता के प्रति जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से उठाया गया है. 

अधिकारियों के मुताबिक, चीतों को विशेष निगरानी के बीच लाया गया है. फिलहाल वन विभाग और पशु चिकित्सा विशेषज्ञों की टीम उनकी सेहत पर लगातार नजर रख रही है. शुरुआती जांच के बाद सभी चीतों को निर्धारित प्रोटोकॉल के तहत निगरानी में रखा गया है, जिससे नए वातावरण में उन्हें किसी तरह की परेशानी न हो. 

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कर्नाटक के वन मंत्री ने दिए ये निर्देश 

कर्नाटक के वन मंत्री ईश्वर खंड्रे ने अधिकारियों को साफ निर्देश दिए हैं कि जलवायु और पर्यावरण में बदलाव के कारण चीतों को किसी प्रकार का तनाव या स्वास्थ्य संबंधी समस्या न हो. उन्होंने कहा कि सभी चीतों को कम से कम 30 दिनों के लिए क्वारंटीन में रखा जाएगा. इस दौरान उन्हें निर्धारित आहार दिया जाएगा और किसी भी संक्रमण या बीमारी की पूरी जांच की जाएगी. 

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वन मंत्री ने यह भी कहा कि चीतों को उनके नए आवास में छोड़ने से पहले सभी आवश्यक मेडिकल परीक्षण पूरे किए जाएंगे. सुरक्षा और देखभाल में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी. 

कर्नाटक में चीतों को कहा जाता है 'शिवंगी' 

गौरतलब है कि कर्नाटक में कभी चीतों को स्थानीय रूप से 'शिवंगी' कहा जाता था. हालांकि यह प्रजाति दशकों पहले राज्य के जंगलों से विलुप्त हो चुकी थी. अब चीतों की वापसी को वन्यजीव संरक्षण के लिहाज से एक अहम कदम माना जा रहा है, जिससे पारिस्थितिकी तंत्र को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है. 

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