पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव को लेकर प्रशासन पूरी तरह सतर्क हो गया है. 23 अप्रैल को पहले चरण का मतदान होना है. इसके तहत अलीपुर द्वार जिले के जयगांव स्थित भूटान गेट को सोमवार (20 अप्रैल) शाम से अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया. प्रशासन ने साफ किया है कि यह कदम चुनाव के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने और किसी भी तरह की अवांछित गतिविधि को रोकने के उद्देश्य से उठाया गया है.
आधिकारिक जानकारी के अनुसार, पर्यटक और जरूरी सेवाओं को छोड़कर आम लोगों के लिए इस अंतरराष्ट्रीय सीमा मार्ग से आवाजाही पर फिलहाल रोक लगा दी गई है. आगामी 23 अप्रैल को राज्य में पहले चरण का मतदान होना है, जिसे शांतिपूर्ण और निष्पक्ष तरीके से संपन्न कराने के लिए यह एहतियाती कदम उठाया गया है. सीमा क्षेत्रों में सुरक्षा एजेंसियों की निगरानी भी पहले से कहीं अधिक बढ़ा दी गई है.
पहली बार इतने पहले भूटान गेट को बंद करने का निर्णय
प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि इस बार पहली बार इतने पहले भूटान गेट को बंद करने का निर्णय लागू किया गया है. इसका मकसद चुनाव प्रक्रिया के दौरान किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या बाहरी हस्तक्षेप को रोकना है. सुरक्षा बलों को भी अलर्ट पर रखा गया है और सीमावर्ती इलाकों में लगातार गश्त जारी है. इस फैसले का असर सबसे ज्यादा उन पर पड़ा है जो रोज़गार के सिलसिले में भूटान गए हुए थे. सरकारी अधिसूचना जारी होते ही बड़ी संख्या में भारतीय प्रवासी मजदूर अपने देश लौटने लगे. सोमवार सुबह से ही जयगांव सीमा पर मजदूरों की भीड़ उमड़ पड़ी. कई किलोमीटर लंबी कतारें देखी गईं, जहां लोग अपने घर लौटने के लिए घंटों इंतजार करते नजर आए.
शाम 6 बजे के बाद भूटान गेट पूरी तरह से बंद
जानकारी के मुताबिक, इस अंतरराष्ट्रीय प्रवेश द्वार से अब तक लाखों मजदूर भारत लौट चुके हैं और अपने-अपने घरों की ओर रवाना हो गए हैं. भूटान में कार्यरत मजदूर व कुचबिहार निवासी सफीकुल आलम ने बताया, “हमें भारत सरकार की ओर से निर्देश मिला था कि सोमवार तक देश लौट आएं. इसलिए चुनाव से पहले ही वापस आ गए. सोमवार (20 अप्रैल) शाम 6 बजे के बाद भूटान गेट पूरी तरह से बंद कर दिया गया है, जिसके बाद केवल विशेष परिस्थितियों में ही आवागमन की अनुमति दी जाएगी.
प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे नियमों का पालन करें और अनावश्यक रूप से सीमा क्षेत्र में भीड़ न लगाएं. चुनाव के मद्देनजर उठाए गए इस कदम से जहां सुरक्षा व्यवस्था को मजबूती मिलेगी, वहीं प्रवासी मजदूरों की घर वापसी का यह दृश्य भी चुनावी माहौल की गंभीरता को दर्शाता है.
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