AI समिट में यूथ कांग्रेस के प्रदर्शन को लेकर सियासी संग्राम छिड़ा है. BJP सहित कई राजनीतिक दलों ने कांग्रेस के इस प्रदर्शन की आलोचना की है. अब 270 पूर्व जज और अधिकारियों ने भी चिट्ठी लिखकर यूथ कांग्रेस के इस प्रदर्शन की आलोचना की है. मालूम हो कि भारत मंडपम में आयोजित 'इंडिया AI इम्पैक्ट समिट 2026' में कई देशों के राष्ट्राध्यक्ष के साथ-साथ AI की दुनिया में काम करने वाले कई बड़े एक्सपर्ट शामिल हुए थे. इस समिट के दौरान यूथ कांग्रेस के कुछ कार्यकर्ताओं ने शर्ट उतार कर प्रदर्शन किया था. जिसकी तस्वीरें और वीडियो भी वायरल हुए. यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ताओं के इस प्रदर्शन की आलोचना की जा रही है.
पूर्व न्यायधीश और नौकरशाहों ने चिट्ठी लिखकर की आलोचना
भारतीय युवा कांग्रेस के कार्यकर्ताओं द्वारा भारत मंडपम में विरोध प्रदर्शन को लेकर पूर्व न्यायाधीशों और पूर्व नौकरशाहों ने संयुक्त पत्र लिखकर निंदा की. पूर्व न्यायाधीशों और पूर्व नौकरशाहों ने भारतीय युवा कांग्रेस के सदस्यों द्वारा भारत मंडपम में किए गए हालिया विरोध प्रदर्शन की निंदा करते हुए कहा कि यह आंतरिक राजनीतिक विवादों से परे है.
दिल्ली हाईकोर्ट के पूर्व न्यायधीश ढिंगरा और DGP वोहरा ने कांग्रेस के प्रदर्शन की निंदा की
'A National Disgrace at Bharat Mandapam' (भारत मंडपम में राष्ट्रीय कलंक) शीर्षक से लिखे एक कड़े बयान में, दिल्ली उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति एस. एन. ढिंगरा और पूर्व पुलिस महानिदेशक बी. एल. वोहरा ने यूथ कांग्रेस के शर्टलेस प्रोटेस्ट की निंदा की. अधिकारियों ने इसे राष्ट्रीय गरिमा का विश्वासघात बताया. बयान में पूर्व जज और अधिकारियों ने कहा कि यह प्रदर्शन उस आयोजन में किया गया, जिसमें भारत वैश्विक प्रौद्योगिकी विशेषज्ञों और अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों की मेजबानी कर रहा था.
बयान में कहा गया, “यह असहमति की सहज अभिव्यक्ति नहीं थी, यह विरोध प्रदर्शन एक सोची-समझी साजिश थी. जिसे उन व्यक्तियों द्वारा अंजाम दिया गया था जो वैध क्यूआर कोड पास का उपयोग करके स्थल में प्रवेश कर गए थे और फिर “अश्लील नारेबाज़ी” करने लगे.
इस प्रदर्शन से भारत की वैश्विक छवि को पहुंचा नुकसान
न्यायमूर्ति ढिंगरा और वोहरा ने तर्क दिया कि इस विरोध-प्रदर्शन ने भारत की वैश्विक छवि को नुकसान पहुंचाया है. बयान में कहा गया है, "किसी भी राजनीतिक दल द्वारा इंटरनेशनल समिट में कपड़े उतारकर हंगामा करना दुनिया को यह बताता है कि भारत एक वैश्विक शक्ति के बजाय अराजकता का देश है."
इस चिट्ठी में पूर्व न्यायधीश और अधिकारियों ने चेतावनी दी कि ऐसी घटनाओं से निवेशकों का विश्वास कमजोर हो सकता है. खासकर तब जब शिखर सम्मेलन का उद्देश्य भारत की तकनीकी प्रगति को उजागर करना था. उन्होंने कहा, “यह हमारे वैज्ञानिकों की मेहनत, हमारे इंजीनियरों की आकांक्षाओं और 140 करोड़ नागरिकों के आतिथ्य सत्कार का मजाक उड़ाता है.”
'लोकतांत्रिक विरोध राष्ट्र के अपमान का लाइसेंस नहीं'
अधिकारियों ने चिट्ठी में लोकतांत्रिक विरोध को मौलिक अधिकार माना. लेकिन इस बात पर जोर दिया कि विरोध का तरीका राष्ट्र को सार्वजनिक रूप से शर्मिंदा करने वाले काम तक विस्तारित नहीं हो सकता. अधिकारियों ने कहा, “लोकतांत्रिक विरोध पवित्र है, लेकिन यह अराजकता या राष्ट्र के सार्वजनिक अपमान का लाइसेंस नहीं है.” उन्होंने आगे कहा कि वास्तविक विरोध “बौद्धिक दृढ़ता और संसदीय बहस” के माध्यम से व्यक्त किया जाना चाहिए.
अधिकारियों ने एआई समिट में यूथ कांग्रेस के प्रदर्शन को बुद्धिहीन राजनीति का दयनीय प्रदर्शन बताया. अधिकारियों का मानना है कि इस विरोध ने किसी विशेष सरकार के बजाय देश को नुकसान पहुंचाया है. बयान में कहा गया, “ऐसे कार्यों से किसी सरकार को नहीं, बल्कि राष्ट्र को चोट पहुंची है.” बयान में राजनीतिक दलों से आग्रह किया गया कि वे अंतरराष्ट्रीय मंचों को पक्षपातपूर्ण नाटक से मुक्त रखें.
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