नाम भैरव, अचूक हथियार, भारतीय सेना की नई बटालियन से कांपेंगे दुश्मन

भारतीय सेना ने आधुनिक युद्ध के लिए भैरव बटालियन तैयार की है. AK-203 से लैस यह फोर्स चीन-पाक सीमा और हाई रिस्क ऑपरेशन के लिए पूरी तरह सक्षम है.

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  • भारतीय सेना ने चीन और पाकिस्तान सीमा के साथ देश में ऑपरेशन के लिए ‘भैरव’ नामक नई बटालियन बनाई
  • भैरव बटालियन में करीब 250 जवान हैं जो इंफैंट्री, आर्टिलरी, एयर डिफेंस, सिग्नल और सपोर्ट यूनिट्स से आते हैं
  • यह बटालियन क्लोज कॉम्बैट हथियारों, लंबी दूरी के स्नाइपर और रॉकेट लॉन्चर सहित आधुनिक तकनीक से लैस है
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नई दिल्ली:

भारतीय सेना ने युद्ध के बदलते स्वरूप को देखते हुए एक नई बटालियन तैयार की है, जिसका नाम है भैरव. यह बटालियन चीन और पाकिस्तान से लगी सीमाओं के साथ-साथ देश के भीतर किसी भी ऑपरेशन को अंजाम देने के लिए पूरी तरह सक्षम है. भैरव भगवान शिव के रौद्र रूप का प्रतीक है. इसके प्रतीक पर लिखा है कि अदृश्य और अदम्य. करीब 250 सैनिकों की इस टीम में इंफेंट्री, आर्टिलरी, एयर डिफेंस, सिग्नल और अन्य सपोर्ट यूनिट्स के जवान शामिल हैं.

क्यों खास है भैरव

भारतीय सेना के इन माहिर कमांडो के पास क्लोज कॉम्बैट के लिए AK-203 जैसे हथियार हैं, 1500 मीटर तक मार करने वाले स्नाइपर हैं और लंबी दूरी तक दुश्मन के बड़े हथियार को नष्ट करने वाले रॉकेट लॉन्चर भी हैं. यानी भैरव के योद्धा हर तरह के हथियारों से लैस हैं. यह बटालियन छोटे ऑपरेशन से लेकर उच्च जोखिम वाले मिशन के लिए पूरी तरह तैयार है. इसे स्पेशल फोर्स और इंफ्रेंटी के बीच का गैप भरने के लिए तैयार किया गया है. इसे लाइट कमांडो फोर्स भी कहा जा सकता है जो कि बेहद फुर्तीली और घातक है. जिसे खासकर चीन और पाकिस्तान से लगी सीमा पर तेज और जोरदार अभियानों के लिए इसे डिजाइन किया गया है.

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भैरव बटालियन के कमांडिंग ऑफिसर ने एनडीटीवी से बातचीत के दौरान कई सवालों के जवाब दिए-

सवाल - आखिर भैरव बटालियन क्या है?

जवाब - भैरव जैसा नाम से ज्ञात होता है जिसको ना डर हो ना पश्चाताप हो. इसी बात को ध्यान में रखकर भैरव बटालियन बनी है. जिसमें ना कोई डर की भाव हो और ना ही दुश्मन को करने के बाद कोई पश्चाताप हो.

सवाल - सेना में पहले से ही स्पेशल फोर्सज हैं तो फिर भैरव बनाने की जरूरत क्यों पड़ी ?

जवाब - जैसा कि आप जानते हैं स्पेशल फोर्सज स्ट्रैटेजिक ऑपरेशन के लिए होती है और साथ में जो घातक होती है वह टैक्टिकल ऑपरेशन में काम करती है. इन दोनों के बीच का जो गैप है उसके लिए भैरव का निर्माण किया गया है.

सवाल - भैरव का प्रतीक चिन्ह बहुत खास है, इसमें भैरव लिखा हुआ है अदृश्य लिखा हुआ है अदम्य में लिखा हुआ है और कोबरा की तस्वीर बनी हुई है.

जवाब - इसको आप किसी विशेष चीज से ना जोड़ कर देखें, इसमें इंफ्रेंट्री का डेगर है जिससे दुश्मन का सफाया किया जाता है. जैसे इसमें कोबरा दिखाया गया है कि अगर काट ले और सही समय पर इलाज ना मिले तो उसकी मौत निश्चित है. इसी प्रकार भैरव दुश्मन का काल है.

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सवाल - भैरव बटालियन में केवल इंफ्रेंट्री के ही सोल्जर नहीं है आपने अलग-अलग विंग से भी आपने लोगों को लिया है? 

जवाब - इसमें केवल इन्फेंट्री नहीं बाकी फाइटिंग फोर्स से भी लोग लिए गए हैं, जैसे आर्टिलरी, आर्मी एयर डिफेंस , सिग्नल और अन्य दस्ते भी शामिल किए गए है.

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सवाल - नई चुनौतियों का सामना करने के लिए किस तरह की ट्रेनिंग हुई है 

जवाब - जैसा कि आपको ज्ञात है मॉडर्न वाॅरफेयर काफी कुछ बदल गया है. इसमें तकनीक हावी होती जा रही है. हर तरह की ड्रिल के साथ-साथ टेक्नोलॉजी पर भी खास ध्यान दिया गया है. साइबर वाॅरफेयर और ड्रोन ऑपरेशन पर भी ध्यान है. यह बटालियन मल्टी डोमेन ऑपरेशन करने में सक्षम है, जो भी टास्क दिया जाएगा उसे पूरा करने में यह पूरी तरह सक्षम है.

सवाल - अगर आपको टास्क दिया जाता है कि सीमा पर कार्रवाई करनी हो या फिर अंदर ऑपरेशन करना हो तो कार्रवाई होगी

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जवाब - यह बटालियन किसी भी ऑपरेशन के लिए पूरी तरह तैयार है. सीमा के अंदर या सीमा के बाहर मल्टी डोमेन ऑपरेशन के लिए हम पूरी तरह से रेडी है, हमें विश्वास है कि हमें यह मौका जल्द ही मिलेगा.

सवाल - बटालियन का नाम है भैरव तो जैसा नाम है क्या इसमें वैसा ही जोश और सब कुछ देखने को मिलेगा

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जवाब - आप यकीन कर लीजिए जब भी भैरव दुश्मन पर हमला करेगा तो दुश्मन का काल बन जाएगा

भैरव बटालियन के टीम कमांडर से बातचीत

सवाल - आप लोगो की ट्रेनिंग किस तरह हुई है

जवाब - हमारी ट्रेनिंग चुनौतियों से भरी और काफी कठिन रही है. हमारी ट्रेनिंग मॉडर्न वाॅरफेयर के प्रिंसिपल के आधार पर रही है. हमने इस ट्रेनिंग में न्यू वेपन पर काम करना सीखा है. हमने सीखा है कि अपने फिजिकल स्टैंडर्ड को ऊपर कर सके, उसके मानसिक मजबूती पर काम किया गया है. लंबे ऑपरेशन के लिए भी हम पूरी तरह तैयार हैं.

सवाल - आप लोगों के पास अलग-अलग तरह के इक्विपमेंट है किसी के पास क्लोज कॉम्बैट का है किसी के पास लॉन्ग रेंज का है किसी के पास रॉकेट लांचर है

जवाब - जैसा कि आप सब लोग जानते हैं कि भैरव बटालियन नई है तो इस छोटी टीम को इस तरह डिजाइन किया गया है कि हम ऑपरेशन को अंजाम दे सके.

इलाके से हिसाब से यूनिट

आजकल युद्ध का स्वरूप तेजी से बदल रहा है, जंग का मतलब केवल सीमा पर गोली या तोप चलाना या टैंक से हमला करना नहीं है. आधुनिक युद्ध हाइब्रिड है जिसमें ड्रोन, इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग, साइबर हमले, सटीक मिसाइल हमले और सूचना युद्ध भी अहम भूमिका निभाते हैं. भैरव बटालियन इन सभी क्षमताओं से लैस है. इसे अलग-अलग इलाकों की जरूरतों के हिसाब से तैयार किया गया है. रेगिस्तानी इलाकों के लिए अलग यूनिट, जम्मू-कश्मीर के लिए अलग और लद्दाख के लिए अलग.

युद्ध की हर विधा में माहिर भैरव

भैरव बटालियन को पांच महीने पहले तैयार किया गया है. यह हथियार चलाने के साथ-साथ ड्रोन ऑपरेशन, संचार व्यवस्था, मेडिकल इमरजेंसी, एक्सप्लोसिव डिस्पोजल और डिजिटल वॉरफेयर में भी माहिर है. इसे पुरानी ताकत में नई तकनीक जोड़कर तैयार किया गया है. यह सेना के भीतर जरूरी बदलावों की शुरुआत है. नई ट्रेनिंग, नए जोश और आत्मविश्वास से लैस भैरव से भारत की सुरक्षा और मजबूत होगी.

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भैरव की क्षमता देखते हुए इसे फिलहाल उत्तरी और पश्चिमी सीमा पर तैनात कर दिया गया है. बस मौका मिलने भर की देर है कि ये सैनिक दुश्मन पर भैरव काल बनकर टूट पड़ेंगे. सुरक्षा कारणों से इनके नाम सार्वजनिक नहीं किए गए हैं.

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