तीन महीने की प्लानिंग, 15 दिन की रेकी, फोन तक नहीं छुआ, फिर 5.76 करोड़ उड़ा लिए... बेंगलुरु 'मनी हाइस्ट' का पर्दाफाश

बेंगलुरु पुलिस ने 19 नवंबर 2025 को हुई हाई-प्रोफाइल एटीएम कैश-वैन डकैती का खुलासा करते हुए बड़ी सफलता हासिल की है. पुलिस ने 60 घंटे के भीतर तीन मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर ₹5.76 करोड़ बरामद कर लिए हैं.

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  • बेंगलुरु पुलिस ने 60 घंटे में ₹7.11 करोड़ की हाई-प्रोफाइल कैश-वैन डकैती के तीन मुख्य आरोपियों को अरेस्ट किया.
  • डकैती की योजना तीन महीने पहले बनाई गई थी, जिसमें 15 दिनों तक दिन-रात रूट की खुफिया रेकी की गई थी.
  • डकैतों ने आरबीआई अधिकारियों के रूप में खुद को दिखाकर हथियार दिखाकर कैश वैन लूटी थी, वाहन छोड़कर फरार हो गए थे.
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बेंगलुरु में पुलिस पिछले 60 घंटे से जिस मास्टरमाइंड गैंग की तलाश में जुटी थी, आखिरकार उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया है. तीन महीने पहले तैयार की गई स्क्रिप्ट, 15 दिनों तक दिन-रात की खुफिया रेकी, ट्रैकिंग से बचने के लिए मोबाइल फोन को घर में ही छोड़ना, और फिर एक झटके में 5.76 करोड़ रुपये से भरी कैश-वैन पर धावा… ये कोई नेटफ्लिक्स की मनी हाइस्ट सीरीज का सीन नहीं, बल्कि बेंगलुरु की सड़कों पर सचमुच हुआ देश का सबसे हाई-टेक रॉबरी प्लान था जिसे पुलिस ने अब उजागर कर दिया है. 

बता दें कि बेंगलुरु पुलिस ने 19 नवंबर 2025 को हुई हाई-प्रोफाइल एटीएम कैश-वैन डकैती का खुलासा करते हुए बड़ी सफलता हासिल की है. पुलिस ने 60 घंटे के भीतर तीन मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर ₹5.76 करोड़ बरामद कर लिए हैं. बता दें कि 19 नवंबर को दोपहर करीब 12:48 बजे CMS कंपनी की कैश वैन, जिसमें ₹7.11 करोड़ नकद था, अशोक पिलर जयनगर डेयरी सर्कल के पास लुटेरों ने रोक ली. लुटेरे आरबीआई अधिकारियों के रूप में आए थे. उन्होंने हथियार दिखाकर स्टाफ को धमकाया, कैश बॉक्स लूटे और 1:16 बजे तक वाहन को छोड़कर फरार हो गए. मामला सिद्धापुरा पुलिस स्टेशन में दर्ज हुआ.

कई लोगों की मिलीभगत से हुई लूट

इस मामले में पुलिस ने तीन लोगों को पकड़ा है, जिनकी भूमिका डकैती की योजना बनाने और डकैती करने में रही है. CMS कंपनी के वाहन मूवमेंट इंचार्ज पर वैन की लोकेशन और मूवमेंट की जानकारी लीक करने का आरोप है. वहीं पूर्व CMS कर्मचारी पर कंपनी की प्रक्रियाओं और अंदरूनी जानकारी साझा करने का आरोप है.  इसके अलावा गोविंदपुरा पुलिस स्टेशन के कॉन्स्टेबल पर जमीन पर मदद और इंटेलिजेंस सपोर्ट देने का आरोप है. 

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कैसे रची गई साजिश?

पुलिस के अनुसार, गिरोह ने तीन महीने तक डकैती की योजना बनाई. लगातार रूट की रेकी की. सीसीटीवी ब्लाइंड स्पॉट का फायदा उठाया. कई गाड़ियों का इस्तेमाल किया और नंबर प्लेट बार-बार बदले. मोबाइल फोन से दूरी बनाई ताकि ट्रैकिंग न हो सके. अलग-अलग भाषाओं में बातचीत कर जांच को गुमराह किया. पुलिस को शक है कि इस ऑपरेशन में कुल 6–8 लोग शामिल थे.

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पुलिस कमिश्नर ने बताई ऑपरेशन की डिटेल

इस मामले को लेकर कर्नाटक, तमिलनाडु, केरल, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और गोवा में 30 से ज्यादा लोगों से पूछताछ की गई. इस जांच टीम में 11 PI, 2 ACP और 6 CCB अधिकारी शामिल हैं. पुलिस का कहना है कि सीएमएस कैश वैन ने आरबीआई के कई सुरक्षा मानदंडों का उल्लंघन किया था, जिससे सुरक्षा खतरे में पड़ गई. डकैती में इस्तेमाल की गई एक गाड़ी ज़ब्त कर ली. 

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बेंगलुरु पुलिस कमिश्नर सीमांत कुमार सिंह ने अंदरूनी सूत्रों की संलिप्तता की पुष्टि की कि सभी आरोपी बेंगलुरु के हैं. उन्होंने कहा, 'हम हर आरोपी की भूमिका की सटीक जानकारी साझा नहीं कर पाएंगे, लेकिन यह एक गंभीर मामला है. हमने सीएमएस कंपनी के प्रमुखों को बुलाकर चूक पर चर्चा की है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि ऐसा दोबारा न हो. हमने कुछ ट्रंक बरामद किए हैं जिनमें नकदी रखी गई थी. पूर्व कर्मचारी ने लगभग एक साल पहले कंपनी छोड़ दी थी, लेकिन वह अभी भी कंपनी के लोगों के संपर्क में था. गिरफ्तार किए गए तीनों आरोपियों और अन्य शामिल लोगों की इसमें अहम भूमिका रही है. उन्होंने 3 महीने पहले योजना बनाई थी और 15 दिनों तक रेकी की थी.'

अधिकारियों को इनाम

बेंगलुरु पुलिस टीम को उनके त्वरित और समन्वित कार्य के लिए पुलिस आयुक्त सीमांत कुमार सिंह ने ₹5 लाख का नकद इनाम दिया है.

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