पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में कॉलेज के प्रोफेसरों को चुनाव आयोग की ओर से पीठासीन अधिकारी के तौर पर ड्यूटी करने का निर्देश दिया गया था. जिसके बाद इस आदेश के खिलाफ सहायक प्रोफेसरों के एक समूह द्वारा कोलकाता हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई थी. बीते 17 अप्रैल को इस पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने चुनाव आयोग को फटकार लगाई थी और कड़ी टिप्पणी करते हुए चुनाव आयोग से कहा था कि जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 26 के तहत जजों को भी मतदान अधिकारी बना सकते है. हाई कोर्ट ने चुनाव आयोग के फैसले को रद्द कर दिया था.
अब चुनाव आयोग हाई कोर्ट के फैसले को कोलकाता हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच में चुनौती दी है. जिसे हाई कोर्ट की एकल पीठ ने यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि आयोग अब तक ऐसी कोई स्पष्ट अधिसूचना पेश नहीं कर पाया है, जिससे यह साबित हो सके कि सहायक प्रोफेसरों को पीठासीन मतदान अधिकारी के रूप में नियुक्त करना नियमों के अनुरूप है.
ट्रेनिंग पूरी करने वाले सहायक प्रोफेसरों को करनी होगी ड्यूटी
कलकत्ता हाईकोर्ट की एकल बेंच के जस्टिस कृष्णा राव ने बीते 17 अप्रैल को बंगाल के दो चरणों में होने वाली विधानसभा चुनावों के लिए कॉलेज के सहायक प्रोफेसरों को पीठासीन अधिकारी नियुक्त करने के ECI के आदेश को रद्द कर दिया था. हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि जिन कॉलेज सहायक प्रोफेसरों ने इस मामले में पहले ही जरूरी ट्रेनिंग पूरी कर ली है, उन्हें इस बार पीठासीन अधिकारी के तौर पर काम करना होगा. इसके साथ ही, जस्टिस राव ने आयोग को यह छूट भी दी कि वह कॉलेज सहायक प्रोफेसरों को उनके सर्विस ग्रेड और वेतनमान के हिसाब से अन्य चुनावी कामों के लिए नियुक्त कर सकता है.
चुनाव आयोग ने सोमवार (20 अप्रैल) को कलकत्ता हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच जिसमें जस्टिस शम्पा सरकार और जस्टिस अजय कुमार गुप्ता शामिल हैं उनका दरवाजा खटखटाया. संभावना है कि इस मामले पर मंगलवार (21 अप्रैल) को सुनवाई हो सकती है.
आयोग ने कुछ दिन पहले एक नोटिफिकेशन जारी कर राज्य में होने वाले आगामी विधानसभा चुनावों के लिए असिस्टेंट प्रोफेसर रैंक के कॉलेज शिक्षकों को पीठासीन अधिकारी के तौर पर काम करने के लिए नियुक्त किया था. आयोग ने यह भी घोषणा की थी कि उन्हें पीठासीन अधिकारी के तौर पर काम करने के लिए अलग से ट्रेनिंग दी जाएगी, और उनमें से कई शिक्षकों के लिए ट्रेनिंग की प्रक्रिया शुरू भी हो चुकी थी.
पिछले चुनावों में भी कॉलेज शिक्षक हुए थे नियुक्त
इस नोटिफिकेशन के बाद कॉलेज शिक्षकों के एक समूह ने कलकत्ता हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया और इस तरह की नियुक्तियों के औचित्य पर सवाल उठाए. कॉलेज शिक्षकों को पीठासीन अधिकारी नियुक्त करने के पक्ष में आयोग का तर्क यह था कि पिछले चुनावों में भी कॉलेज शिक्षकों को पीठासीन अधिकारी नियुक्त करने के उदाहरण रहे हैं और इससे पहले कभी इस फैसले को चुनौती नहीं दी गई थी.
पश्चिम बंगाल विधानसभा के चुनाव 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को होने हैं. इसके नतीजे 4 मई जारी होने वाले हैं.
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