धर्म के नाम पर पशु बलि पर रोक के लिए PIL, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से मांगा जवाब

याचिका में पशु अत्याचार निवारण अधिनियम की धारा 28 संशोधित करने की मांग की गई है.इस प्रावधान के तहत किसी धर्म के अनुसार किए गए तरीके से पशु की हत्या को अपराध नहीं माना जाता

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  • सुप्रीम कोर्ट ने धर्म के नाम पर पशु बलि पर रोक लगाने की मांग वाली जनहित याचिका पर केंद्र सरकार से जवाब मांगा.
  • मंदिरों और धार्मिक अनुष्ठानों में होने वाली पशु बलि पर सरकारी स्तर पर पर्याप्त कार्रवाई नहीं हो रही - याचिका
  • याचिका के मुताबिक- धार्मिक अनुष्ठानों में पशु बलि रोकने के लिए कड़े कानून, जनजागरूकता की जरूरत
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धर्म के नाम पर पशु बलि पर रोक की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से जवाब मांगा है. कोर्ट ने धर्म के नाम पर पशुओं की हत्या पर प्रतिबंध लगाने की मांग वाली जनहित याचिका पर केंद्र सरकार से जवाब मांगा है.जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने केंद्र को नोटिस जारी कर चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है.यह जनहित याचिका वकील श्रुति बिस्ट ने दायर की है. याचिका में आरोप लगाया गया है कि मंदिरों और धार्मिक अनुष्ठानों के दौरान होने वाली पशु बलि के मामलों में सरकारी स्तर पर पर्याप्त कार्रवाई नहीं की जा रही है. 

याचिका में पशु अत्याचार निवारण अधिनियम की धारा 28 संशोधित करने की मांग की गई है.इस प्रावधान के तहत किसी धर्म के अनुसार किए गए तरीके से पशु की हत्या को अपराध नहीं माना जाता. याचिकाकर्ता का कहना है कि यह प्रावधान पशुओं के संरक्षण के उद्देश्य के विपरीत है और इससे सरकारी खजाने के साथ-साथ पशु अधिकारों को भी नुकसान होता है.याचिका में धार्मिक अनुष्ठानों के दौरान पशु बलि पर रोक लगाने के लिए सख्त कानून बनाने, जनजागरूकता बढ़ाने और गैर-सरकारी संगठनों के साथ मिलकर काम करने की मांग की गई है. 

याचिका में यह भी कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट पहले कई मामलों में कह चुका है कि हर जीव को जीवन का अधिकार है और संविधान के अनुच्छेद 21 के व्यापक दायरे में पशुओं के जीवन की सुरक्षा भी शामिल है.अब अदालत चार सप्ताह बाद इस मामले में अगली सुनवाई करेगी.

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