- संगम नगरी प्रयागराज में तांगवाले के घर पैदा होने वाला अतीक अहमद एक माफिया और नेता था.
- अतीक अहमद की हत्या अप्रैल 2023 में पुलिस कस्टडी में गोली मारकर कर दी गई थी.
- फिल्म ‘धुरंधर 2’ में अतीक के किरदार को पाकिस्तानी एजेंट के रूप में दिखाया गया है, जिससे बयानबाजी तेज हो गई.
उत्तर प्रदेश में भले ही माफियाराज को खत्म करने के दावे किए जा रहे हों, लेकिन यह साफ होता जा रहा है कि माफिया का नाम, उसकी परछाईं और उससे जुड़ी राजनीति इतनी आसानी से खत्म होने वाली नहीं है. इसका सबसे बड़ा उदाहरण अतीक अहमद है. अतीक अब इस दुनिया में नहीं है, लेकिन उसके नाम ने एक बार फिर उत्तर प्रदेश की राजनीति में वैसी ही गर्मी पैदा कर दी है, जैसी मई-जून की तपती दोपहरों में महसूस होती है. इस बार वजह कोई एफआईआर, कोर्ट की सुनवाई या बयान नहीं, बल्कि एक फिल्म है—‘धुरंधर'. फिल्म के सीक्वल में अतीक अहमद के किरदार ने उसके नाम को फिर से जिंदा कर दिया है.
फिल्म ‘धुरंधर' के सीक्वल में अतीक अहमद से प्रेरित किरदार के सामने आते ही हर ओर अब इसी की चर्चा है. करीब चार घंटे की फिल्म धुरंधर-2 में कुछ मिनटों का यह किरदार ऐसा असर छोड़ गया कि उसके समर्थक और विरोधी दोनों ही अपनी-अपनी आवाज बुलंद कर रहे हैं. फिल्म में अतीक जैसे किरदार को न सिर्फ माफिया बल्कि पाकिस्तानी एजेंट के रूप में पेश किया गया है, जिसके कथित संबंधों को पाकिस्तान और देश विरोधी गतिविधियों से जोड़ा गया है. ऐसे में हर तरफ अतीक की ही चर्चा है.
Photo Credit: IANS
अतीक अहमद था कौन?
संगम नगरी प्रयागराज में तांगवाले के घर पैदा होने वाला अतीक अहमद माफिया था. माफिया के अलावा वो नेता भी था. फूलपुर से सांसद रहा अतीक अहमद पांच बार विधायक भी रहा. उसके खिलाफ सौ से ज्यादा मुकदमे दर्ज थे. इसमें हत्या से लेकर हत्या के प्रयास, अपहरण, फिरौती और ना जाने क्या क्या. उसका इस कदर खौफ था कि किसी की मजाल नहीं थी कि कोई अतीक को कुछ कह दे. यहां तक की उसके गुर्गों को भी कुछ कहना खतरे से खाली नहीं होता था.
2017 से दुर्दिन शुरू हुए
अतीक अहमद का दबदबा करीब ढाई दशक तक कायम रहा, लेकिन 2017 में उत्तर प्रदेश की सत्ता में योगी आदित्यनाथ के आने के बाद हालात तेजी से बदले. योगी सरकार ने माफिया के खिलाफ खुलकर अभियान छेड़ा. अतीक की अवैध और बेनामी संपत्तियों पर बुलडोजर चला, उसके करीबियों की गिरफ्तारियां हुईं और अदालतों में मामलों की सुनवाई तेज हुई. जो अतीक कभी आलीशान हवेली में रहता था, उसका ठिकाना जेल की सलाखों के पीछे हो गया. आलम ये रहा कि मरते वक्त भी वो पुलिस की गिरफ्त में ही रहा.
प्रयागराज में अतीक-अशरफ का मर्डर
अहमदाबाद की जेल में बंद अतीक अहमद को यूपी पुलिस कस्टडी में प्रयागराज लेकर आई. 15 अप्रैल 2023 को प्रयागराज में दिनभर पुलिस ने उससे पूछताछ की और फिर मेडिकल कराने के लिए कॉल्विन हॉस्पिटल लेकर पहुंची. मौके पर बड़ी संख्या में मीडियाकर्मी भी मौजूद थे. पुलिस कस्टडी में ही मीडिया उससे कुछ सवाल करना चाह रही थी. इस भीड़ में तीन फर्जी मीडियाकर्मी भी थे. मौका देखकर तीनों ने अपनी पिस्टल/रिवाल्वर निकाली और अतीक और उसके भाई अशरफ की गोली मारकर हत्या कर दी.
किसने क्या क्या कहा
इस पूरे विवाद पर समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने सीधे तौर पर फिल्म या अतीक का नाम नहीं लिया, लेकिन पूजा पाल को लेकर सवाल पूछने पर कहा कि बीजेपी के पास पाल समाज का कोई बड़ा नेता नहीं था, इसलिए उसने पूजा पाल को अपने साथ कर लिया. वहीं, सपा सांसद और अखिलेश यादव के चाचा रामगोपाल यादव ने एक बयान में यहां तक कह दिया कि अगर उनकी सरकार आई तो अतीक की हत्या का बदला लिया जाएगा, जिस पर नया विवाद खड़ा हो गया. उधर, मध्य प्रदेश के सीएम मोहन यादव ने साफ कहा कि अतीक ने जो किया था, फिल्म में वही दिखाया गया.
पूर्व अधिकारियों ने बताई कहानी
अतीक के दौर में काम कर चुके कई रिटायर्ड आईपीएस अधिकारियों ने भी अपने अनुभव साझा किए हैं. एक पूर्व आईजी स्तर के अधिकारी ने कहा कि प्रयागराज में अतीक का सिर्फ एक मैसेज आतंक फैलाने के लिए काफी होता था. वहीं दिल्ली पुलिस के पूर्व अधिकारी विनय त्यागी बताते हैं कि हमने 2008 में अतीक को गिरफ्तार किया था. वो बताते हैं कि दूसरों पर रौब झाड़ने वाले अतीक पर पिस्टल लगाने ही उसने पैंट में पेशाब कर दिया था.
क्या अतीक आईएसआई से जुड़ा था?
अतीक अहमद के किरदार को लेकर कई तरह की चर्चाएं हैं. आधिकारिक तौर पर तो कभी ये साबित नहीं हुआ कि अतीक का जुड़ाव पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी से सीधे तौर पर रहे हैं. हालांकि उसके पास से बरामद हथियारों और उसके कनेक्शंस को लेकर ऐसी शिकायतें जरूर सामने आई थीं. कुछ पुलिस अधिकारियों का दावा है कि पूछताछ के दौरान लश्कर-ए-तैयबा और आईएसआई से तार जुड़े होने की बात मानी थी. यूपी के पूर्व डीजीपी विक्रम सिंह का दावा है कि अतीक को पाकिस्तान की ओर से ड्रोन के जरिए हथियार सप्लाई किए जाते थे.
यूपी पर क्या असर पड़ेगा?
उत्तर प्रदेश में अगले साल विधानसभा चुनाव है. अतीक अहमद भले अब इस दुनिया में नहीं है लेकिन उसके नाम की चर्चा राजनीति में गाहे बगाहे होती ही रहती है. जाहिर है कि बीजेपी अतीक के खत्म होने को उपलब्धि बताकर जनता को ये समझाने की कोशिश करेगी कि योगी राज में ही अतीक के आतंक को कमजोर करने की कोशिश हुई. वहीं ये भी कहती है कि अगर उसकी हत्या नहीं होती तो भी वो कभी जेल से बाहर नहीं आ सकता था. देखना होगा क्या अतीक का नाम अगले साल तक यूपी की राजनीति में ऐसे ही चर्चा में बना रहता है?














