'जज स्वर्णकांता पर भरोसा नहीं, हो निष्पक्ष सुनवाई'... केजरीवाल की देश की सबसे बड़ी अदालत से गुहार

शराब नीति मामले में बरी होने के बाद अरविंद केजरीवाल ने अब जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की बेंच से केस ट्रांसफर करने के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है. उनका तर्क है कि मौजूदा बेंच से उन्हें निष्पक्ष सुनवाई की उम्मीद नहीं है.

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  • अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली की शराब नीति मामले में सुनवाई के लिए हाई कोर्ट की बेंच बदलने की मांग की है
  • दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने फरवरी में केजरीवाल और अन्य आरोपियों को भ्रष्टाचार मामले में बरी कर दिया था
  • केजरीवाल ने हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती दी है जिसमें बिना सुनवाई के CBI अधिकारी पर टिप्पणी पर रोक लगी थी
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दिल्ली की कथित शराब नीति मामले में पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी प्रमुख अरविंद केजरीवाल ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है. उन्होंने इस केस में CBI की अपील पर अभी सुनवाई कर रही दिल्ली हाई कोर्ट की जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की बेंच से दूसरी बेंच में ट्रांसफर करने की मांग की है. हाल ही में दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने इस मामले में केजरीवाल को बरी किया था. इसी आदेश के खिलाफ सीबीआई ने हाई कोर्ट का रुख किया है.

कल कोर्ट में होनी है सुनवाई

केजरीवाल का कहना कि अगर यही जज सुनवाई करती हैं तो निष्पक्ष सुनवाई संभव नहीं हो पाएगी. इससे पहले केजरीवाल ने बेंच बदलने के लिए दिल्ली हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस को भी पत्र लिखा था. उन्होंने इस अनुरोध को ठुकरा दिया था. कल यही मामला दिल्ली हाई कोर्ट में जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की बेंच के सामने लगा भी है.

कोर्ट के पुराने आदेश को चुनौती

अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली हाई कोर्ट के 9 मार्च के उस आदेश को भी चुनौती दी है जिसमें बेंच ने बिना उनका पक्ष सुने CBI के जांच अधिकारी को लेकर निचली अदालत की ओर से की गई टिप्पणी पर रोक लगा दी थी. कल केजरीवाल की ओर से चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली बेंच के सामने जल्द सुनवाई की मांग की जा सकती है.

हाल ही में निचली अदालत से मिली थी राहत

बता दें कि अरविंद केजरीवाल को इस मामले में सबसे बड़ी राहत हाल ही में 27 फरवरी को मिली, जब दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने उन्हें, मनीष सिसोदिया और 21 अन्य आरोपियों को शराब नीति से जुड़े भ्रष्टाचार के मामले में बरी कर दिया. स्पेशल जज जितेंद्र सिंह ने सीबीआई की चार्जशीट को सिरे से खारिज कर दिया था. अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि मामले में कोई आपराधिक साजिश साबित नहीं हुई और जांच अधिकारी के खिलाफ विभागीय जांच की सिफारिश भी की. इससे पहले, सितंबर 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें इसी मामले में जमानत दी थी. अब सीबीआई ने इसी आदेश को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी है, जिसकी सुनवाई से केजरीवाल खुद को अलग रखने की मांग कर रहे हैं.

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