स्ट्रीट फाइटर तो नहीं बन सकता... IPAC मामले में क्यों बोले SG तुषार मेहता? बंगाल में वोटिंग के बीच SC में घमासान

पश्चिम बंगाल में चल रहे मतदान के बीच सुप्रीम कोर्ट में बंगाल सरकार ने ED रेड पर कोर्ट की सुनवाई का सोशल मीडिया पर पर इस्तेमाल को लेकर सवाल उठाए हैं.

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  • पश्चिम बंगाल में पहले चरण की वोटिंग के दौरान सुप्रीम कोर्ट में IPAC पर ईडी की रेड मामले की सुनवाई चल रही है
  • वकील मेनका गुरुस्वामी ने कोर्ट की सुनवाई का सोशल मीडिया पर राजनीतिक प्रचार हेतु इस्तेमाल करने पर आपत्ति जताई
  • सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मीडिया को रोकना संभव नहीं है लेकिन कार्यवाही का दुरुपयोग रोकने की जरूरत है
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पश्चिम बंगाल में पहले चरण की वोटिंग चल रही है. इस बीच सुप्रीम कोर्ट में अलग घमासान चल रहा है. कोर्ट में IPAC पर ईडी की रेड मामले में सुनवाई चल रही है. बंगाल सरकार की ओर से पेश हुई सीनियर वकील मेनका गुरुस्वामी ने ED रेड पर कोर्ट की सुनवाई के सोशल मीडिया पर इस्तेमाल को लेकर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि अदालत में हो रही कार्यवाही का इस्तेमाल सोशल मीडिया पर राजनीतिक अभियान के हथियार के रूप में किया जा रहा है.

'कोर्ट की कार्यवाही का दुरुपयोग नहीं होना चाहिए'

मेनका गुरुस्वामी ने सुप्रीम कोर्ट में कहा,  क्या इस तरह अदालत की कार्यवाही का दुरुपयोग होना चाहिए? उन्होंने कहा कि अदालत की कार्यवाही को सोशल मीडिया के लिए औजार न बनने दें. विपक्षी खुद को एक अनिर्वाचित शासक और राजा ना समझें. इस पर सॉलसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा मैं गरिमापूर्ण चुप्पी बनाए रखूंगा. मैं स्ट्रीट फाइटर की तरह व्यवहार नहीं कर सकता. वहीं गुरुस्वामी बोलीं कि ये न तो गरिमापूर्ण हैं और न ही चुप्पी. इनमें दोनों में से कोई गुण नहीं हैं. 

वहीं जस्टिस पीके मिश्रा ने कहा कि आप अदालत के अंदर और बाहर कही जाने वाली बातों की तुलना क्यों कर रहे हैं? हम दलीलों को शांति से सुनने की कोशिश करते हैं. हम मीडिया को नहीं रोक सकते. एक बार हम कुछ कहते हैं, तो उसे तुरंत उठा लिया जाता है. फिर दोनों पक्ष इसका इस्तेमाल करते हैं. कई बार हमारे लिए यह सवाल होता है कि हमें कुछ कहना भी चाहिए या नहीं. 

इस पर गुरुस्वामी ने कहा कि मुझे पता है कि अदालत इस बात से व्यथित है कि उसकी कार्यवाही का इस तरह इस्तेमाल किया जा रहा है.

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'CM जबरदस्ती IPAC के दफ्तर में घुसीं'

SG मेहता ने कहा कि मुख्यमंत्री जबरदस्ती IPAC के दफ्तर में घुस गईं और डिजिटल डिवाइस और अपराध साबित करने वाले दस्तावेज उठा ले गईं. इस मामले के तथ्य इतने शर्मनाक हैं कि अब वे अंबेडकर का हवाला देकर यह बात साबित करने की कोशिश कर रहे हैं कि हमारे पास मौलिक अधिकार नहीं हैं. यह बेशर्मी भरा वाकया कोई अकेला मामला नहीं है. ⁠TMC की लीगल विंग के नेताओं ने अपने कार्यकर्ताओं को WhatsApp मैसेज भेजकर IPAC के दफ्तर के बाहर इकट्ठा होने को कहा. ⁠यह कानून के राज का पूरी तरह से उल्लंघन है. हम अपना फर्ज निभा रहे थे. हम एक केंद्रीय एजेंसी हैं.हम अपने अधिकार क्षेत्र के अंदर रहकर काम कर रहे थे. ⁠लेकिन राज्य की मुखिया हमें ऐसा करने से रोक रही थीं.

क्या है मामला?

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने आईपैक पर छापेमारी से जुड़े मामले में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ ईडी की याचिका पर सुनवाई की. आरोप है कि आईपैक के दफ्तर और को-फाउंडर प्रतीक जैन के आवास पर छापेमारी के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने ईडी की कार्रवाई में हस्तक्षेप किया था. दरअसल, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की टीम ने 8 जनवरी को आईपैक के कार्यालय और प्रतीक जैन के आवास पर छापेमारी की थी. यह कार्रवाई कथित कोयला तस्करी घोटाले से जुड़ी करोड़ों रुपए की मनी लॉन्ड्रिंग जांच के तहत की गई थी. एजेंसी ने आरोप लगाए कि ममता बनर्जी अपने साथ कई वरिष्ठ प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों को लेकर पहुंची थीं. उन्होंने छापेमारी के दौरान बिना किसी अधिकार के कई अहम सबूत हटा दिए, जिनमें लैपटॉप, मोबाइल फोन और चुनावी डेटा वाले दस्तावेज शामिल थे.

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