क्या तकनीक की कमी ने छीन ली अजित पवार की जान? कॉकपिट में बैठकर फ्लाइट कमांडर ने क्या समझाया

फ्लाइट कमांडर आलोक सिंह ने बताया कि 'एविएशन के अंदर मेट्रोलॉजि को सब पायलट को पढ़ाया जाता है. विमान ख़राब मौसम में चला जाए तो विमान क्षतिग्रस्त हो सकता है. दुर्घटना हो सकती है.

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  • अजित पवार की चार्टर्ड प्लेन दुर्घटना में असामयिक मृत्यु ने राजनीतिक और विमानन सुरक्षा सवाल खड़े किए.
  • बारामती एयरपोर्ट पर लैंडिंग के लिए आवश्यक आधुनिक तकनीकी व्यवस्थाओं का अभाव था, जो दुर्घटना का कारण बन सकता है.
  • फ्लाइट कमांडर आलोक सिंह ने खराब मौसम में ऑटो मोड लैंडिंग केवल आधुनिक सिस्टम वाले एयरपोर्ट पर संभव बताया.
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नई दिल्ली:

बुधवार की सुबह महाराष्ट्र की राजनीति और बारामती के आकाश से एक ऐसी स्तब्ध कर देने वाली खबर सामने आई है, जिसने पूरे देश को हिलाकर रख दिया है. महाराष्ट्र के डिप्टी CM अजित पवार की एक चार्टर्ड प्लेन दुर्घटना में हुई असामयिक मृत्यु ने न केवल कई सियासी सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि विमानन सुरक्षा पर भी एक बड़ी बहस छेड़ दी है. हादसे की असल वजह तलाशने के लिए जांच एजेंसियां सक्रिय हैं और विमान का 'ब्लैक बॉक्स' भी बरामद किया जा चुका है. लेकिन सवाल वही है कि आखिर यह हादसा हुआ कैसे? क्या बारामती का रनवे सुरक्षित था? क्या वहां लैंडिंग के लिए जरूरी आधुनिक तकनीकी व्यवस्थाएं मौजूद थीं या नहीं?

इन तमाम तकनीकी पहलुओं और अनसुलझे सवालों के जवाब तलाशने के लिए हमने बात की फ्लाइट कमांडर आलोक सिंह से. कई वर्षों तक कमर्शियल फ्लाइट्स उड़ाने का अनुभव रखने वाले और वर्तमान में प्राइवेट पायलटों को ट्रेनिंग दे रहे कैप्टन आलोक सिंह ने इस दुर्घटना के पीछे की संभावित कड़ियों को बारीकी से समझाया है.

'आधुनिक व्यवस्था लैंडिंग को लेकर नहीं'

फ्लाइट कमांडर आलोक सिंह ने बताया कि खराब मौसम में ऑटो मोड में पायलट विमान को लैंड कराते हैं. लेकिन ये बारामती जैसे एयरपोर्ट पर नहीं हो सकता है. ये वहीं हो सकता है जहां लैंडिंग सिस्टम होना चाहिए. बारामती में किसी तरह की आधुनिक व्यवस्था लैंडिंग को लेकर नहीं थी.

फ्लाइट कमांडर आलोक सिंह ने बताया कि अंनइटेंशनल फ्लाइंग का मतलब होता कि दोनों विंग थ्रस्ट प्रोड्यूस करता है. लेकिन ऐसा एंगल हो जाए जिससे एक विंग थ्रस्ट बंद कर दे और हेडर पर ज्यादा जोर लगा दें, तब इससे निकल पाना असंभव होता. जैसे दुबई के एयर शो में हमारा विमान ऐसे प्वाइंट पर चला गया था जहां से निकलना मुश्किल होता है.

फ्लाइट कमांडर आलोक सिंह ने बताया, 'एविएशन के अंदर मेट्रोलॉजि को सब पायलट को पढ़ाया जाता है. विमान ख़राब मौसम में चला जाए तो विमान क्षतिग्रस्त हो सकता है. दुर्घटना हो सकती है. कामार्शियल एयरक्राफ़्ट तीस हज़ार फिट की ऊंचाई पर उड़ता है तो इस विमान पर ज़्यादा असर नहीं होता है. ये विमान का डिस्प्ले है जहां राडार के संकेत हम रिसाव करते हैं और आजकल ऐसे एयरक्राफ़्ट हैं, जहां ज़ीरो विजिबिल्टी पर भी लैंड कर सकते हैं.

तकनीकी और पायलट की दक्षता के सवाल पर 

आलोक सिंह ने बताया कि अनुभवी पायलट मौसम को देकर पहले ही अंदाजा लगा सकता है कि लैंड करना चाहिए या नहीं. इसीलिए आप देखिए कई बार दूसरे एयरपोर्ट में विमान को लैंड करना पड़ता है. पायलट का प्रशिक्षण जब होता है, मौसम के बारे में उसको भी ट्रेनिंग और समझाया जाता है. 

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कामार्शियल विमान और पायलट में अंतर

आलोक सिंह ने बताया कि कामारिशियल विमान में फ़िक्स विंग होते हैं ये और ज़्यादा सुरक्षित होते हैं बहुत ऊंचाई पर उड़ते हैं लेकिन चॉपर में ऐसा नहीं होता है उसको थ्रस्ट उसके विंग के ज़रिए मिलता है जो हवा की गति के आधार पर बदलना पड़ता है इसीलिए चॉपर के दुर्घटना होने का रेश्यू ज़्यादा होता है.