- बदरुद्दीन अजमल ने असम में एसआईआर प्रक्रिया को हिटलरवाद बताया और इसे चुनाव से पहले रोकने की मांग की
- अजमल ने कहा कि असम में पुराने निवासियों के नाम काटे जा रहे हैं, जिससे असली वोटर प्रभावित हो रहे हैं
- उन्होंने चुनाव आयोग से आग्रह किया कि असम चुनावों में बाहर के लोगों के मतदान पर रोक लगाई जाए
एआईयूडीएफ के अध्यक्ष बदरुद्दीन अजमल ने शनिवार को एसआईआर को लेकर बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि ये हिटलरवाद है, भारत में एसआईआर की प्रक्रिया नहीं होनी चाहिए. अजमल ने कहा कि 60-70 साल से रह रहे लोगों का नाम काटा जा रहा है. सरकार को इसको खत्म करना चाहिए, चुनाव से पहले इसे लागू नहीं करना चाहिए.
बदरुद्दीन अजमल ने कहा, "चुनाव से पहले असम में एसआईआर प्रक्रिया नहीं होनी चाहिए और चुनाव आयोग को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि असम चुनावों में बाहर का कोई भी व्यक्ति मतदान न करे. असम में बिहार और महाराष्ट्र की तरह धांधली नहीं होनी चाहिए. जैसे महाराष्ट्र, बिहार और हरियाणा में धोखा हुआ वैसा असम में नहीं हो. वहीं असली वोटर का नाम काटकर नकली वोटर्स को ले आए."
वहीं आगामी राज्य चुनावों के लिए गठबंधन पर उन्होंने कहा, "हम अकेले चुनाव लड़ेंगे. अगर कांग्रेस को सत्ता में आना है, तो उसे हमारे साथ आना चाहिए. कांग्रेस भाजपा की बी टीम की तरह काम कर रही है."
असम विधानसभा चुनाव में एआईयूडीएफ के साथ गठबंधन नहीं- गौरव गोगोई
इससे पहले कांग्रेस की असम इकाई के अध्यक्ष गौरव गोगोई ने भी कहा था कि पार्टी राज्य में आगामी विधानसभा चुनावों के लिए बदरुद्दीन अजमल के नेतृत्व वाले एआईयूडीएफ के साथ कोई चुनावी गठबंधन नहीं करेगी. पिछले लोकसभा चुनाव में एआईयूडीएफ की पूर्ण विफलता के बाद 2026 के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस के साथ गठबंधन कर चुनावी बाधा को पार करने की उसकी (एआईयूडीएफ की) सोच पूरी तरह गलत और भ्रमपूर्ण है.
कांग्रेस 2024 के लोकसभा चुनावों के लिए किए गए गठबंधन की तर्ज पर कई अन्य विपक्षी दलों के साथ गठबंधन बनाने पर काम कर रही है और इससे एआईयूडीएफ को बाहर रखा गया है.














