देशभर के उच्च न्यायालयों में सामाजिक प्रतिनिधित्व के मुद्दे पर कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने राज्यसभा में महत्वपूर्ण आंकड़े पेश किए. RJD सांसद मनोज झा के सवाल के जवाब में मंत्री ने बताया कि 2018 से 23 जनवरी 2026 के बीच हाई कोर्ट्स में कुल 847 जजों की नियुक्ति हुई. लेकिन इनमें सामाजिक न्याय से जुड़े वर्गों का प्रतिनिधित्व बेहद कम रहा है.
8 साल का डेटा: कितने जज किस वर्ग से आए?
कानून मंत्री के मुताबिक 847 जजों में
33 SC (करीब 4%)
17 ST
104 OBC (करीब 12%)
46 अल्पसंख्यक वर्ग से
130 महिलाएं
ये आंकड़े साफ दिखाते हैं कि उच्च न्यायालयों में SC/ST और OBC वर्ग का प्रतिनिधित्व बेहद सीमित है, जबकि न्यायपालिका में विविधता बढ़ाने पर लगातार बहस होती रही है.
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कानून मंत्री ने क्या कहा?
अपने लिखित बयान में मेघवाल ने कहा, 'हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में जजों की नियुक्ति संविधान के अनुच्छेद 124, 217 और 224 के तहत होती है. इन प्रावधानों में जाति आधारित आरक्षण का कोई उल्लेख नहीं है. इसी वजह से केंद्र के पास जाति आधारित प्रतिनिधित्व के कैटेगरी-वाइज आंकड़े औपचारिक रूप से मेंटेन नहीं किए जाते.'
उन्होंने यह भी बताया कि 2018 के बाद से ही जजों के लिए सामाजिक पृष्ठभूमि विवरण देना अनिवार्य किया गया, जिसके आधार पर यह आंकड़ा जुटाया जा सकता है.
सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट में जजों के पदों की स्थिति (27 जनवरी 2026)
सुप्रीम कोर्ट: सिर्फ 1 पद खाली
हाई कोर्ट्स:
1122 स्वीकृत पद
814 कार्यरत जज
308 पद खाली
कानून मंत्रालय के अनुसार, लंबित मामलों को देखते हुए रिक्तियों को तेजी से भरना जरूरी है और इस दिशा में कोशिशें जारी हैं.














