- नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पहले चरण का PM मोदी कल उद्घाटन करेंगे, जो उत्तर भारत की कनेक्टिविटी बढ़ाएगा.
- यह एयरपोर्ट लगभग 5,000 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला है और सालाना 4 करोड़ यात्रियों की क्षमता रखेगा.
- जेवर एयरपोर्ट मल्टीमॉडल कार्गो हब के रूप में विकसित किया जा रहा है.
करीब ढाई दशक तक राजनीति और मंजूरियों में उलझा रहा नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट अब हकीकत बनने जा रहा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 28 मार्च को नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पहले चरण का उद्घाटन करेंगे, जो उत्तर भारत की कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक्स का नया केंद्र बनेगा.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार सुबह करीब 11:30 बजे एयरपोर्ट के टर्मिनल भवन का दौरा करेंगे और दोपहर 12 बजे पहले चरण का औपचारिक उद्घाटन करेंगे. इसके बाद वे एक जनसभा को भी संबोधित करेंगे.
सबसे बड़ी ग्रीनफील्ड परियोजना
जेवर में बना यह एयरपोर्ट देश की सबसे बड़ी ग्रीनफील्ड परियोजनाओं में से एक है, जिसे पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल के तहत विकसित किया गया है. इस प्रोजेक्ट को यमुना इंटरनेशनल एयरपोर्ट प्राइवेट लिमिटेड ने विकसित किया है, जो स्विट्जरलैंड की ज्यूरिक एयरपोर्ट इंटरनेशनल एजी की पूर्ण स्वामित्व वाली कंपनी है.
यह भी पढ़ें- Noida Airport: पीपीपी मॉडल से तैयार हुआ नोएडा एयरपोर्ट, ILS System से बनेगा 'हाई-टेक', जानिए क्या-क्या होगी सुविधा
करीब 5,000 हेक्टेयर में फैले इस मेगा प्रोजेक्ट का पहला चरण 1,334 हेक्टेयर में तैयार हुआ है, जिसकी सालाना क्षमता करीब 1.2 करोड़ यात्रियों की होगी। आने वाले वर्षों में चार चरणों में विकसित होने के बाद यह एयरपोर्ट हर साल 7 करोड़ यात्रियों को संभाल सकेगा, जिससे यह दुनिया के सबसे बड़े एयरपोर्ट्स में शामिल हो जाएगा.
कनेक्टिविटी का नया हब बनेगा जेवर
यह एयरपोर्ट नोएडा (50 किमी), ग्रेटर नोएडा (36 किमी) और दिल्ली (71 किमी) से जुड़ा होगा. यमुना एक्सप्रेसवे, वेस्टर्न और ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे, दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे जैसे बड़े नेटवर्क इसे सीधे जोड़ेंगे. भविष्य में मेट्रो, RRTS और हाई-स्पीड रेल कनेक्टिविटी भी इसे देश के सबसे बेहतर कनेक्टेड एयरपोर्ट्स में शामिल कर देगी.
लॉजिस्टिक्स और रोजगार का बड़ा इंजन
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को एक मल्टीमॉडल कार्गो हब के रूप में विकसित किया जा रहा है. पहले चरण में ही 2.5 लाख मीट्रिक टन कार्गो हैंडलिंग की क्षमता होगी, जिसे आगे बढ़ाकर 80 लाख मीट्रिक टन तक ले जाने की योजना है. इससे उत्तर प्रदेश को ग्लोबल लॉजिस्टिक्स मैप पर नई पहचान मिलेगी और बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे.
यह भी पढ़ें- 28 मार्च से शुरू होगा नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, जानें कौन-कौन सी एयरलाइन्स भरेंगी उड़ान?
टेक्नोलॉजी और पर्यावरण पर खास फोकस
3900 मीटर लंबा रनवे, 24×7 ऑपरेशन की सुविधा, Boeing 777 जैसे बड़े विमानों की लैंडिंग क्षमता और 'स्विंग एयरक्राफ्ट स्टैंड' जैसी आधुनिक तकनीक इसे खास बनाती है. इतना ही नहीं, यह देश का पहला 'नेट ज़ीरो एमिशन' एयरपोर्ट बनने की दिशा में भी काम कर रहा है, जहां पर्यावरण संरक्षण के लिए वन पार्क जैसी पहल भी की गई है.
राजनीति में फंसा रहा 25 साल का सफर
इस एयरपोर्ट का सपना 2001 में देखा गया था, लेकिन BJP, BSP और SP की अलग-अलग सरकारों के बीच यह प्रोजेक्ट वर्षों तक अटका रहा। केंद्र से मंजूरी, IGI एयरपोर्ट की आपत्तियां और वैकल्पिक लोकेशन जैसे विवादों ने इसे लंबा खींचा। आखिरकार 2017 के बाद इस प्रोजेक्ट ने रफ्तार पकड़ी और 2021 में इसकी आधारशिला रखी गई.
टाइमलाइन: नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का सफर
- 2001- जेवर एयरपोर्ट की परिकल्पना, तत्कालीन CM राजनाथ सिंह के कार्यकाल में पहली बार विचार सामने आया.
- 2002- मायावती सरकार ने प्रोजेक्ट का औपचारिक प्रस्ताव तैयार किया.
- 2003-2007- मुलायम सिंह यादव सरकार के दौरान प्रोजेक्ट ठंडे बस्ते में.
- 2007–2012- मायावती सरकार ने फिर प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाया, लेकिन केंद्र से मंजूरी नहीं मिली.
- 2012-2017- अखिलेश यादव सरकार ने वैकल्पिक एयरपोर्ट (ताज इंटरनेशनल एयरपोर्ट) का प्रस्ताव दिया, जेवर प्रोजेक्ट फिर अटका.
- 2016- केंद्र को जेवर एयरपोर्ट के लिए प्रस्ताव भेजा गया.
- 6 जुलाई 2017- साइट क्लीयरेंस मिली.
- 11 जनवरी 2018- रक्षा मंत्रालय से NOC प्राप्त.
- 8 मई 2018- नागरिक उड्डयन मंत्रालय से मंजूरी.
- 7 अक्टूबर 2020- कंसेशन एग्रीमेंट साइन.
- 25 नवंबर 2021- PM नरेंद्र मोदी ने आधारशिला रखी.
- 6 मार्च 2026- DGCA ने एयरोड्रोम लाइसेंस जारी किया.
- 28 मार्च 2026- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा उद्घाटन, 25 साल का इंतजार खत्म.
यह टाइमलाइन दिखाती है कि कैसे 25 साल तक राजनीति और मंजूरियों में फंसा प्रोजेक्ट अब जमीन पर उतरकर हकीकत बन गया.
यह भी पढ़ें- एयरपोर्ट के उद्घाटन के लिए नोएडा ट्रैफिक एडवाइजरी जारी, इन रास्तों पर जाने से बचें
दो टर्मिनल कॉम्प्लेक्स
इस हवाई अड्डे में दो यात्री टर्मिनल होंगे. टर्मिनल 1 की क्षमता प्रति वर्ष 3 करोड़ यात्रियों की होगी और टर्मिनल 2 की क्षमता प्रति वर्ष 4 करोड़ यात्रियों की होगी. यात्रियों के ट्रांसफर को आसान बनाने, ऑपरेशन्स, चलने की दूरी को कम करने और पर्यावरण पर पड़ने वाले असर को घटाने के लिए टर्मिनल आपस में जुड़े होंगे.
टर्मिनल 1 दो चरणों में बनाया जाएगा- पहला चरण प्रति वर्ष 1.2 करोड़ यात्रियों के लिए और दूसरा चरण प्रति वर्ष 1.8 करोड़ यात्रियों की अतिरिक्त क्षमता के साथ. इस चरण को वर्ष 2024 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था. लेकिन इसमें लगातार देरी होती रही. इसके अलावा टर्मिनल 2 भी दो चरणों में बनाया जाएगा.
क्यों है इतना अहम?
दिल्ली के IGI एयरपोर्ट पर बढ़ते दबाव को कम करने के साथ-साथ यह एयरपोर्ट पश्चिमी यूपी, NCR और आसपास के शहरों के लिए गेमचेंजर साबित होगा. नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट सिर्फ एक इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि उत्तर भारत के विकास की नई उड़ान है. जहां कनेक्टिविटी, कारोबार और रोजगार तीनों को एक साथ रफ्तार मिलने वाली है.














