क्या सच में अजगर के खून से घटेगा मोटापा? नई रिसर्च ने बढ़ाई उम्मीद, जानें कैसे करेगा काम

Python Blood Could Help In Reducing Obesity: आज के समय में मोटापा पूरी दुनिया के लिए एक बड़ी समस्या बन चुका है. लोग वजन घटाने के लिए डाइट, जिम और कई तरह की दवाओं का सहारा लेते हैं, लेकिन लंबे समय तक असर बनाए रखना मुश्किल होता है. इसी बीच एक नई रिसर्च ने लोगों का ध्यान खींचा है. वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि बर्मी अजगर के खून में एक ऐसा खास अणु पाया गया है, जो भविष्य में मोटापा कम करने की दवा बन सकता है. हालांकि यह रिसर्च अभी शुरुआती चरण में है, लेकिन इसके नतीजे काफी दिलचस्प बताए जा रहे हैं.

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Python Blood Could Help In Reducing Obesity
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Python Blood Could Help In Reducing Obesity: आज के समय में मोटापा पूरी दुनिया के लिए एक बड़ी समस्या बन चुका है. लोग वजन घटाने के लिए डाइट, जिम और कई तरह की दवाओं का सहारा लेते हैं, लेकिन लंबे समय तक असर बनाए रखना मुश्किल होता है. इसी बीच एक नई रिसर्च ने लोगों का ध्यान खींचा है. वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि बर्मी अजगर (Burmese Python) के खून (Blood) में एक ऐसा खास अणु (Molecule) पाया गया है, जो भविष्य में मोटापा (Obesity) कम करने की दवा बन सकता है. हालांकि यह रिसर्च अभी शुरुआती चरण में है, लेकिन इसके नतीजे काफी दिलचस्प बताए जा रहे हैं.

अजगर की खासियत ने खोला नया रास्ता

अजगर अपनी अनोखी खाने की आदतों के लिए जाना जाता है. यह अपने शरीर के बराबर बड़े शिकार को खा सकता है और फिर कई महीनों तक बिना खाना खाए रह सकता है. वैज्ञानिकों ने इसी खास क्षमता को समझने के लिए उसके खून का अध्ययन किया. रिसर्च में पाया गया कि खाना खाने के बाद अजगर के खून में कुछ खास अणुओं (Molecules) की मात्रा तेजी से बढ़ जाती है. यही अणु उसके शरीर के मेटाबॉलिज्म (Metabolism) को नियंत्रित करने में मदद करते हैं.

कैसे काम करता है यह अणु या मॉलिक्यूल?

स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने इस रिसर्च में 200 से ज्यादा अणुओं की पहचान की. इनमें से एक अणु, जिसे pTOS कहा जाता है, सबसे ज्यादा प्रभावी पाया गया. इसकी मात्रा खाने के बाद 1000 गुना तक बढ़ गई. इस अणु का परीक्षण मोटे चूहों पर किया गया. नतीजों में देखा गया कि चूहों ने कम खाना शुरू कर दिया और करीब 28 दिनों में उनके वजन में लगभग 9 प्रतिशत तक कमी आई.

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क्या यह दवा सुरक्षित होगी?

वैज्ञानिकों का कहना है कि यह अणु सीधे दिमाग के उस हिस्से पर असर करता है, जो भूख को नियंत्रित करता है. यही वजह है कि यह पारंपरिक दवाओं से अलग तरीके से काम करता है. मौजूदा वजन घटाने वाली दवाएं पेट खाली होने की प्रक्रिया को धीमा करती हैं, जिससे कई बार मतली (Vomitting) जैसे साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं. लेकिन इस नए तरीके में ऐसे साइड इफेक्ट कम होने की संभावना बताई जा रही है.

अभी और रिसर्च बाकी

हालांकि यह खोज उम्मीद जगाती है, लेकिन वैज्ञानिकों ने साफ किया है कि यह रिसर्च अभी शुरुआती चरण में है. इंसानों पर इसके असर और सुरक्षा को लेकर आगे और अध्ययन जरूरी हैं.अजगर के खून से जुड़ी यह खोज मोटापा घटाने के क्षेत्र में नया रास्ता खोल सकती है. हालांकि इसे दवा बनने में समय लगेगा, लेकिन भविष्य में यह एक बड़ा बदलाव ला सकती है.

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(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)

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