जब सब कुछ सही है फिर भी मन बेचैन क्यों रहता है? जानिए श्री श्री रवि शंकर का सरल उपाय

Stressed Without Reason : तनाव हमेशा किसी बड़ी परेशानी का नतीजा नहीं होता. कभी-कभी यह संकेत होता है कि हमारी ज़िंदगी में कोई गहराई या जुड़ाव कम हो गया है. ऐसे में सेवा का रास्ता अपनाकर हम न सिर्फ दूसरों के लिए कुछ अच्छा कर सकते हैं, बल्कि खुद के लिए भी.

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जब सब कुछ सही है फिर भी मन बेचैन क्यों रहता है?

Stressed Without Reason : कभी-कभी ज़िंदगी की तस्वीर देखने में बिल्कुल सही लगती है. नौकरी अच्छी चल रही होती है, परिवार भी ठीक होता है, किसी तरह की आर्थिक परेशानी नहीं होती - फिर भी भीतर एक खालीपन महसूस होता है. मन बेचैन रहता है और समझ नहीं आता कि आखिर दिक्कत क्या है. ऐसे में यह सवाल उठता है - "जब सब कुछ ठीक है, तब भी मैं ऐसा क्यों महसूस कर रहा हूं?". आइए जानते हैं इसको लेकर क्या कहते हैं श्री श्री रवि शंकर जी.

बिना कारण मन बैचेन क्यों रहता है? (Stressed Without Reason)

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साधारण नहीं है ये स्थिति

यह बात जितनी साधारण लगती है, उतनी ही गहरी है. आज लाखों लोग इसी स्थिति से गुज़र रहे हैं, जहां बाहरी दुनिया में सब कुछ सामान्य दिखता है, लेकिन अंदर ही अंदर एक तनाव बना रहता है. श्री श्री रवि शंकर इस स्थिति को जीवन के मूल उद्देश्य से दूर होने का संकेत मानते हैं.

जब जीवन में मतलब की कमी हो

असली तनाव वहां से शुरू होता है जहां जीवन में कोई गहराई नहीं बचती. जब सब कुछ मिल जाए, लेकिन उस “मिलने” में कोई संतोष न हो, तो समझिए कि कहीं न कहीं अर्थ की कमी है. आज की भागदौड़ भरी दुनिया में हम हर चीज़ को पा लेना चाहते हैं - पैसा, पद, पहचान. पर क्या इन सबसे सच्चा संतोष मिलता है? जब जिंदगी का मतलब सिर्फ "मेरे लिए क्या है?" बन जाता है, तब धीरे-धीरे मन खाली होने लगता है. और यही खालीपन, धीरे-धीरे तनाव का रूप ले लेता है.

समाधान कहां है?

इस सवाल का जवाब है - जुड़ाव. जब हम सिर्फ अपने बारे में सोचते हैं, तो जीवन एक सीमित दायरे में सिमट जाता है. लेकिन जब हम किसी और की ज़िंदगी में थोड़ा योगदान देते हैं, तो वही अनुभव हमें भीतर से जोड़ता है. श्री श्री रवि शंकर इसे "सेवा" कहते हैं.

सेवा: मन को जोड़ने का रास्ता

सेवा कोई बड़ा काम नहीं है, यह सोच का तरीका है. जब आप किसी के लिए बिना किसी स्वार्थ के कुछ करते हैं, तो मन हल्का हो जाता है. सेवा से आत्म-संतुलन बढ़ता है, और यही संतुलन तनाव को कम करता है. अक्सर लोग सोचते हैं कि सेवा का मतलब है किसी संस्था से जुड़ना या बड़ा दान करना. लेकिन इसकी शुरुआत बहुत छोटे कदमों से हो सकती है:

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  • किसी की मदद करना जब वह मायूस हो.
  • किसी बुजुर्ग से बैठकर बात करना.
  • अपने समय में से कुछ मिनट निकालकर बच्चों को कुछ नया सिखाना.
  • किसी जरूरतमंद को भोजन देना.

ये काम दिखने में छोटे हैं, लेकिन इनका असर गहरा होता है.

वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी लाभ

मनोवैज्ञानिक रिसर्च बताते हैं कि जब हम किसी और के लिए कुछ अच्छा करते हैं, तो हमारे शरीर में ऐसे रसायन बनते हैं जो तनाव को घटाते हैं और खुशी बढ़ाते हैं. ऑक्सीटोसिन, डोपामाइन और सेरोटोनिन जैसे केमिकल सेवा के भाव से एक्टिव होते हैं.

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(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)

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