अब इलाज में काम आ रहा है बच्चे का गर्भनाल या प्लेसेंटा, घाव भरने से लेकर आंखों के इलाज तक कर रहा मदद

Uses Of Placenta: कई सालों तक प्लेसेंटा यानी गर्भनाल को सिर्फ एक ऐसा अंग माना जाता था जो गर्भ में बच्चे को पोषण देने का काम करता है. बच्चे के जन्म के बाद इसे अक्सर मेडिकल कचरा समझकर हटा दिया जाता था. लेकिन अब डॉक्टर और वैज्ञानिक इसे एक बेहद खास जैविक सिस्टम (बायोलॉजिकल सिस्टम) के रूप में देखने लगे हैं. रिसर्च में पता चला है कि प्लेसेंटा में ऐसे कई तत्व मौजूद होते हैं जो नए तरह के इलाज विकसित करने में मदद कर सकते हैं.

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Uses Of Placenta
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Uses Of Placenta: कई सालों तक प्लेसेंटा यानी गर्भनाल को सिर्फ एक ऐसा अंग माना जाता था जो गर्भ में बच्चे को पोषण देने का काम करता है. बच्चे के जन्म के बाद इसे अक्सर मेडिकल कचरा समझकर हटा दिया जाता था. लेकिन अब डॉक्टर और वैज्ञानिक इसे एक बेहद खास जैविक सिस्टम (Biological System) के रूप में देखने लगे हैं. रिसर्च (Research) में पता चला है कि प्लेसेंटा में ऐसे कई तत्व मौजूद होते हैं जो नए तरह के इलाज विकसित करने में मदद कर सकते हैं.

विशेषज्ञों के मुताबिक प्लेसेंटा में स्टेम सेल (Stem Cell), ग्रोथ फैक्टर (Growth Factor) और खास टिश्यू (Tissue) पाए जाते हैं. यही वजह है कि अब इसका इस्तेमाल कई मेडिकल उपचारों में किया जा रहा है. खासकर ऐसे घाव जो लंबे समय तक नहीं भरते या आंखों से जुड़ी मुश्किल सर्जरी में प्लेसेंटा काफी उपयोगी साबित हो रहा है.

एमनियोटिक मेम्ब्रेन क्यों है खास

प्लेसेंटा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा एमनियोटिक मेम्ब्रेन होता है. यह झिल्ली उस थैली की सबसे अंदरूनी परत होती है जिसमें गर्भ के दौरान बच्चा सुरक्षित रहता है. डॉक्टरों का कहना है कि इस झिल्ली में घाव भरने की बहुत अच्छी क्षमता होती है. इस टिश्यू की खास बात यह है कि इसे शरीर में लगाने पर आमतौर पर शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली (Immune System) इसे अस्वीकार नहीं करती. इसलिए इसे कई मरीजों के इलाज में सुरक्षित तरीके से इस्तेमाल किया जा सकता है.

आंखों के इलाज में कैसे होता है इस्तेमाल

आंखों के इलाज में एमनियोटिक मेम्ब्रेन (Amniotic Membrane) का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है. डॉक्टर इसे एक तरह के बायोलॉजिकल बैंडेज की तरह इस्तेमाल करते हैं. अगर किसी व्यक्ति की आंख में केमिकल जलन हो जाए या कॉर्निया (Cornea) में घाव हो जाए तो इस झिल्ली की पतली परत आंख पर लगाई जाती है. यह झिल्ली नई कोशिकाओं को बढ़ने में मदद करती है और सूजन (Inflamation) को कम करती है. साथ ही यह आंख में दाग बनने से भी बचाती है. कई मामलों में इससे मरीज की आंखों की रोशनी बचाई जा सकती है.

घाव भरने में भी मिल रही मदद

प्लेसेंटा से मिलने वाले स्टेम सेल और ग्रोथ फैक्टर शरीर में नए ऊतकों के बनने में मदद करते हैं. इसलिए इसका इस्तेमाल पुराने घावों, जलने के घाव और लंबे समय से न भरने वाले जख्मों के इलाज में भी किया जा रहा है.

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रिसर्च में बढ़ रहा महत्व

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में प्लेसेंटा से जुड़े इलाज और भी विकसित हो सकते हैं. इसमें मौजूद जैविक तत्व नई दवाओं और उपचार तकनीकों को विकसित करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं.

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कभी जिसे सिर्फ मेडिकल कचरा माना जाता था, वही प्लेसेंटा अब आधुनिक चिकित्सा में नई उम्मीद बनकर सामने आ रहा है.

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(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)

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