कफ, वात और कमजोर पाचन से परेशान हैं? उज्जायी प्राणायाम से बदलेगा शरीर का संतुलन

Ujjayi Pranayama Benefits: आयुर्वेद की दृष्टि से उज्जायी केवल श्वास-प्रश्वास की प्रक्रिया नहीं, बल्कि कफ और वात दोष को संतुलित करने और पाचन अग्नि को जाग्रत करने वाला प्रभावशाली प्राणायाम माना गया है.

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Ujjayi Pranayama Benefits: उज्जायी प्राणायाम में सांस धीमी, गहरी और लयबद्ध हो जाती है.

Ujjayi Pranayama Benefits: अक्सर हम योग और प्राणायाम को सिर्फ शरीर को लचीला बनाने या फिट रहने का तरीका मान लेते हैं, लेकिन योग की असली शक्ति सांस के साथ जुड़ी हुई है. हमारी श्वास जितनी शांत, गहरी और कंट्रोल होती है, उतना ही गहरा असर वह शरीर और मन पर डालती है. उज्जायी प्राणायाम ऐसी ही एक खास श्वास तकनीक है, जो बाहर से देखने में सरल लगती है, लेकिन भीतर से शरीर की कई प्रणालियों को संतुलन में लाने का काम करती है.

उज्जायी प्राणायाम की पहचान गले से निकलने वाली हल्की, समुद्र की लहरों जैसी आवाज है. इसी कारण इसे ओशन ब्रीथ भी कहा जाता है. इस प्राणायाम में सांस को नाक से अंदर लिया और बाहर छोड़ा जाता है, लेकिन गले को थोड़ा संकुचित रखा जाता है, जिससे यह खास ध्वनि पैदा होती है. यह आवाज सिर्फ संकेत नहीं है, बल्कि बताती है कि सांस गहरी और कंट्रोल हो रही है.

आयुर्वेद की दृष्टि से उज्जायी केवल श्वास-प्रश्वास की प्रक्रिया नहीं, बल्कि कफ और वात दोष को संतुलित करने और पाचन अग्नि को जाग्रत करने वाला प्रभावशाली प्राणायाम माना गया है. आयुर्वेद में स्वास्थ्य की जड़ जठराग्नि यानी पाचन शक्ति को माना गया है. जब पाचन ठीक रहता है, तो शरीर खुद ही कई रोगों से बचा रहता है.

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पाचन अग्नि को करता है सक्रिय

उज्जायी प्राणायाम में सांस धीमी, गहरी और लयबद्ध हो जाती है. इससे शरीर के भीतर हल्की गर्मी पैदा होती है. यही आंतरिक ऊष्मा पाचन अग्नि को मजबूत करने में मदद करती है, जिन लोगों को बार-बार गैस, अपच, पेट भारी लगना या भूख कम लगने की समस्या रहती है, उनके लिए उज्जायी प्राणायाम खासतौर रूप से लाभकारी माना जाता है. नियमित अभ्यास से पाचन बेहतर होता है और शरीर हल्का महसूस करने लगता है.

कफ और वात दोष को करता है संतुलित

आज की इर्रेगुलर लाइफस्टाइल में कफ और वात दोष सबसे ज्यादा बिगड़ते हैं. कफ बढ़ने पर आलस्य, शरीर में जकड़न, बलगम, सर्दी-जुकाम जैसी परेशानियां होती हैं. वहीं वात बिगड़ने पर गैस, बेचैनी, घबराहट, अनिद्रा और शरीर में दर्द बढ़ सकता है. उज्जायी प्राणायाम श्वास को एक लय में लाकर कफ को ढीला करता है और वात को स्थिर करता है. गले और छाती में होने वाला हल्का घर्षण कफ के जमाव को कम करने में सहायक होता है.

मन और नर्वस को देता है शांति

उज्जायी प्राणायाम का असर सिर्फ शरीर तक सीमित नहीं रहता, बल्कि मन पर भी गहरा प्रभाव डालता है. सांस की आवाज पर ध्यान टिक जाने से मन भटकता नहीं. धीरे-धीरे तनाव, चिंता और बेचैनी कम होने लगती है. जो लोग जल्दी घबरा जाते हैं, बहुत सोचते रहते हैं या नींद की समस्या से जूझते हैं, उनके लिए यह प्राणायाम बेहद उपयोगी माना जाता है. यह तंत्रिका तंत्र को शांत कर शरीर को विश्राम की अवस्था में ले जाता है.

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गले और थायराइड क्षेत्र पर प्रभाव

उज्जायी में सांस गले से होकर कंट्रोल रूप से गुजरती है, जिससे गला और आसपास का क्षेत्र सक्रिय रहता है. योग में इसे विशुद्धि चक्र से जोड़ा गया है, जो अभिव्यक्ति और संतुलन का केंद्र माना जाता है. नियमित अभ्यास से आवाज में स्पष्टता, आत्मविश्वास और संवाद क्षमता में भी सुधार देखा जाता है.

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उज्जायी प्राणायाम एक ऐसा सरल लेकिन शक्तिशाली अभ्यास है, जो कफ-वात को संतुलित करता है, पाचन अग्नि को जाग्रत करता है और मन को शांति देता है। अगर इसे रोज कुछ मिनट सही तरीके से किया जाए, तो यह शरीर और मन दोनों के लिए गहरा लाभ पहुंचा सकता है.

(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)

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