बुढ़ापे को दूर भगाकर जवां दिखने में दवा की तरह काम करती है स्वर्ण भस्म, जान लें सेवन का सही तरीका

Swarna Bhasma Benefits: यह साधारण सोना नहीं होता, बल्कि शुद्ध सोने को कई बार शोधन और भस्मीकरण की प्रक्रिया से तैयार किया जाता है. यही वजह है कि यह बेहद महंगी होती है और इसकी थोड़ी-सी मात्रा ही प्रयोग में लाई जाती है.

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Swarna Bhasma Benefits: स्वर्ण भस्म में सूक्ष्म कण होते हैं जो शरीर की कोशिकाओं तक आसानी से पहुंच जाते हैं.

Gold Ash Benefits: सदियों से भारत में आयुर्वेदिक पद्धति के जरिये शरीर और मन को स्वस्थ रखने की परंपरा रही है. आयुर्वेद सिर्फ जड़ी-बूटियों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें धातुओं से बनी औषधियों का भी खास महत्व बताया गया है. इन्हीं में से एक है स्वर्ण भस्म, जिसे आयुर्वेद में अत्यंत प्रभावशाली और कीमती औषधि माना गया है. परंपरागत मान्यताओं के अनुसार, स्वर्ण भस्म शरीर को अंदर से मजबूत बनाती है और बढ़ती उम्र के असर को धीमा करने में मदद करती है.

आयुर्वेदिक ग्रंथों जैसे चरक संहिता, सुश्रुत संहिता और अष्टांग हृदय में स्वर्ण भस्म का विस्तार से वर्णन मिलता है. यह साधारण सोना नहीं होता, बल्कि शुद्ध सोने को कई बार शोधन और भस्मीकरण की प्रक्रिया से तैयार किया जाता है. यही वजह है कि यह बेहद महंगी होती है और इसकी थोड़ी-सी मात्रा ही प्रयोग में लाई जाती है.

स्वर्ण भस्म क्या है और कैसे काम करती है? | What is Swarna Bhasma and How Does it Work?

आयुर्वेद के अनुसार, स्वर्ण भस्म में सूक्ष्म कण होते हैं जो शरीर की कोशिकाओं तक आसानी से पहुंच जाते हैं. पारंपरिक मान्यता है कि ये कण शरीर की ऊर्जा को बढ़ाते हैं और कमजोर अंगों को ताकत देते हैं. इसी कारण इसे रसायन श्रेणी की औषधि माना गया है, यानी ऐसी दवा जो उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को धीमा करने में सहायक हो सकती है.

बुढ़ापे और कमजोरी में कैसे मानी जाती है उपयोगी?

आयुर्वेदिक दृष्टि से स्वर्ण भस्म शरीर की सामान्य दुर्बलता को कम करने में सहायक मानी जाती है. मांसपेशियों और नसों को मजबूती देने में मदद करती है. त्वचा की चमक और जवांपन बनाए रखने में सहायक बताई जाती है.

इसी वजह से इसे एंटी-एजिंग औषधि के रूप में देखा जाता है, हालांकि इसका असर व्यक्ति की प्रकृति और सेवन के तरीके पर निर्भर करता है.

दिल और इम्यून सिस्टम के लिए क्या कहता है आयुर्वेद?

परंपरागत ग्रंथों में उल्लेख मिलता है कि स्वर्ण भस्म का उपयोग हार्ट को हेल्दी रखने के लिए किया जाता रहा है. आयुर्वेद में माना जाता है कि यह शरीर के क्रॉनिक असंतुलन को सुधारने में मदद कर सकती है. साथ ही, इसे इम्यूनिटी बढ़ाने वाली औषधि भी माना गया है. बदलते मौसम में होने वाले संक्रमण से बचाव के लिए भी पारंपरिक रूप से इसका प्रयोग बताया गया है.

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एनीमिया और मेंटल हेल्थ के लिए फायदेमंद

आयुर्वेदिक मान्यताओं के अनुसार, जिन लोगों में लंबे समय से खून की कमी बनी रहती है, उनके लिए स्वर्ण भस्म सहायक हो सकती है. यह शरीर में ऑक्सीजन के बेहतर संचार में मदद करने वाली औषधि मानी जाती है.

इसके अलावा, मानसिक थकान, तनाव और उदासी जैसी स्थितियों में भी आयुर्वेद स्वर्ण भस्म को उपयोगी बताता है. इसलिए इसे मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं में सहायक माना गया है.

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सेवन का सही तरीका और सावधानियां:

यह सबसे जरूरी बात है कि स्वर्ण भस्म कोई सामान्य सप्लीमेंट नहीं है. इसका सेवन हमेशा अनुभवी आयुर्वेद की सलाह से ही करें. अलग-अलग रोगों में इसकी मात्रा अलग होती है. गर्भवती महिलाएं, बच्चे और गंभीर रोगों से पीड़ित लोग बिना सलाह सेवन न करें. ज्यादा मात्रा नुकसानदेह हो सकती है.

स्वर्ण भस्म को आयुर्वेद में एक शक्तिशाली रसायन औषधि माना गया है, जो बुढ़ापे, कमजोरी, इम्यूनिटी और मानसिक स्वास्थ्य में मददगार मानी जाती है.

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(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)

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