11 महीने बाद फिर मां बनीं सीमा हैदर, छठे बच्चे को दिया जन्म, दो बच्चों में कितना अंतर है सही?

सीमा हैदर (Seema Haider) 11 महीने बाद दूसरी बार मां बनी हैं. इसी के साथ एक बहस छिड़ गई है कि 2 बच्चों के बीच कितना गैप होना चाहिए? यहां एक्सपर्ट्स से समझिए 2 प्रेग्नेंसी (Pregnancy) की सही अंतर कितना होना चाहिए और इसके क्या फायदे नुकसान हैं.

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दो गर्भावस्थाओं के बीच कम से कम 18 से 24 महीने का अंतर रखना बेहतर माना जाता है.

हाल ही में खबर आई कि सीमा हैदर (Seema Haider) एक बार फिर मां बनी हैं. उन्होंने अपने छठे बच्चे को जन्म दिया है. खास बात यह है कि यह खुशखबरी उनके पिछले बच्चे के जन्म के लगभग 11 महीने बाद आई है. इस खबर के बाद सोशल मीडिया और लोगों के बीच एक अहम सवाल चर्चा में है, क्या दो बच्चों के बीच इतना कम अंतर सही है? बच्चों के जन्म के बीच कितना अंतर होना चाहिए?

मां बनना किसी भी महिला के जीवन का बेहद खास और भावनात्मक पल होता है. लेकिन, हर गर्भावस्था (Pregnancy) महिला के शरीर पर असर डालती है. ऐसे में डॉक्टर अक्सर सलाह देते हैं कि बच्चों के बीच सही अंतर रखना जरूरी है, ताकि मां और बच्चे दोनों हेल्दी रह सकें. 

दो बच्चों के बीच कितना अंतर होना चाहिए? (How Much Gap Should There be Between Two Children?)

वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (WHO) ने जन्म के बीच के समय को बच्चों की मौत के रिस्क का एक जरूरी कारण माना है. साथ ही, यह सलाह दी है कि महिलाओं को बच्चों के जन्म के बीच तीन से पांच साल का अंतर रखना चाहिए ताकि बच्चों और मांओं को होने वाले हेल्थ रिस्क को कम किया जा सके. यह सलाह इस नतीजे पर आधारित है कि 36 महीने से कम और 60 महीने से ज्यादा के गैप से बच्चों की मौत और दूसरे बुरे नतीजों का खतरा बढ़ जाता है.

डॉक्टर ज्योति गुप्ता के अनुसार, दो गर्भावस्थाओं के बीच कम से कम 18 से 24 महीने का अंतर रखना बेहतर माना जाता है. इसका मतलब है कि पहले बच्चे के जन्म के बाद करीब डेढ़ से दो साल का समय शरीर को दोबारा तैयार होने के लिए मिलना चाहिए.

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2 बच्चों के बीच क्यों जरूरी है सही अंतर? | Why is Proper Gap Between two Children Important?

1. मां की सेहत के लिए

गर्भावस्था के दौरान शरीर में खून, कैल्शियम और पोषक तत्वों की कमी हो सकती है. अगर जल्दी-जल्दी गर्भ ठहर जाए तो शरीर को पूरी तरह संभलने का मौका नहीं मिलता. इससे कमजोरी, एनीमिया और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं.

2. बच्चे की ग्रोथ के लिए

बहुत कम अंतर होने पर समय से पहले जन्म (प्रीमैच्योर डिलीवरी) या कम वजन वाले बच्चे का खतरा बढ़ सकता है. पर्याप्त अंतर होने से अगला बच्चा बेहतर पोषण और देखभाल पा सकता है.

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3. मेंटल और इमोशनल बैलेंस

मां को नए बच्चे की देखभाल के साथ पहले बच्चे को भी समय देना होता है. अगर दोनों बच्चों में बहुत कम अंतर हो, तो तनाव और थकान बढ़ सकती है.

क्या 11 महीने का अंतर जोखिम भरा है?

अगर 11 महीने के भीतर फिर से गर्भ ठहर जाए, तो इसे शॉर्ट इंटर-प्रेग्नेंसी इंटरवल माना जाता है. हालांकि हर महिला की सेहत अलग होती है, लेकिन डॉक्टर आमतौर पर सलाह देते हैं कि शरीर को पूरी तरह ठीक होने का समय दिया जाए.

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फिर भी, सही मेडिकल केयर, बैलेंस डाइट और रेगुलर चेकअप से जोखिम कम किए जा सकते हैं. सबसे जरूरी है कि गर्भधारण से पहले और बाद में डॉक्टर की सलाह ली जाए.

परिवार नियोजन क्यों जरूरी?

परिवार नियोजन केवल बच्चों की संख्या तय करने के लिए नहीं, बल्कि मां और बच्चों की सेहत के लिए भी जरूरी है. आजकल कई सुरक्षित और प्रभावी तरीके उपलब्ध हैं, जैसे कंडोम, कॉपर-टी, गर्भनिरोधक गोलियां आदि. सही जानकारी और जागरूकता से मां अपने शरीर को आराम और सुरक्षा दे सकती है.

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(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)

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