Heart Attack: कभी आपने सोचा है अगर आप अकेले हैं और अचानक से दिल का दौरा यानी हार्ट अटैक आ जाए, तो आप क्या करेंगे? बता दें कि आज इस बारे में डॉक्टर सलीम जैदी के द्वारा बताए गए सुझावों के बारे में हम जानेंगे. उन्होंने अपने यूट्यूब वीडियो में बताया है कि ऐसी कंडीशन आने पर आपको क्या करना चाहिए. उन्होंने अपने वीडियो में बताया कि आज वो इसके बारे में एकदम स्ट्रेट टू द पॉइंट क्लियर और प्रैक्टिकल बात करेंगे.
इमेजिन कीजिए सुबह का टाइम है. आप घर पर अकेले हैं और अचानक से सीने में एक अजीब सा दबाव महसूस होता है. अक्सर दिल का दौरा एकदम साइलेंट तरीके से शुरू होता है और इसके सिम्टम्स बिल्कुल कंफ्यूजिंग होते हैं. वैसे तो हार्ट अटैक अपने आप में एक बहुत जानलेवा कंडीशन होती है. लेकिन जब कोई अकेला हो तो मरने का जोखिम कई गुना ज्यादा बढ़ जाता है. लेकिन अगर आप यह जान लें कि पहले 10 से 20 सेकंड में आपको क्या करना है तो बचने के चांसेस ड्रामेटिकली बढ़ जाते हैं. आज हम जानेंगे पांच सबसे इंपॉर्टेंट वार्निंग साइन के बारे में जिन्हें समझना सबसे पहली और सबसे बेसिक जरूरत है. इसके साथ ही वो प्रैक्टिकल स्टेप्स के बारे मे जानेंगे जो जिंदगी और मौत के बीच का फर्क तय कर सकते हैं.
हार्ट अटैक आने से पहले दिखने वाले लक्षण
चेस्ट के सेंटर में दबाव
पहला लक्षण है चेस्ट के सेंटर में दबाव, हैवीनेस या जकड़न जैसा फील होना. इस दर्द की खास बात यह होती है कि ये चुभन जैसा नहीं होता है. प्रिकिंग नहीं होता है. एकदम पिन पॉइंटेड नहीं होता है. बल्कि एक भारीपन जैसा महसूस होता है. कुछ लोग बताते हैं कि हार्ट अटैक के दौरान उन्हें ऐसा महसूस हुआ जैसे अंदर से कोई सीने को निचोड़ रहा है. कोई दबा रहा है कि जैसे कोई बहुत भारी चीज उनके सीने के ऊपर रख दी गई है.
पेन का बढ़ना
दूसरा क्लासिकल सिम्टम होता है पेन का स्प्रेड होना. यानी छाती से लेफ्ट आर्म, कभी दोनों आर्म्स, कभी गर्दन तक, जबड़े तक या फिर कभी अपर बैक तक अगर यह दर्द फैलने लगता है तो एकदम से अलर्ट हो जाइए क्योंकि यह खतरे की घंटी है. खासकर अगर महिलाओं की बात करें तो उनमें सीने का दर्द, जबड़े की तरफ जाना बहुत ज्यादा कॉमनली देखा जाता है.
बहुत ज्यादा थकान
तीसरा कॉमन लक्षण है बिना वजह की एक्सट्रीम थकान फील होना. ऐसा लगना जैसे बॉडी का पूरा सिस्टम चलना बंद हो गया हो. खाने के बाद भी बॉडी में एनर्जी नहीं आती है और किसी भी काम को करने की हिम्मत नहीं होती.
सांस फूंलना
चौथा है शॉर्टनेस ऑफ ब्रेथ यानी सांस का फूलना और ठंडे पसीने आना. जी हां, बिना किसी भारी काम को किए अगर आपकी सांस फूल रही है और ठंडा पसीना भी अगर आपको साथ में आ रहा है तो यह भी एक सीरियस लक्षण है जिसको नजरअंदाज नहीं करना है.
चक्कर आना
पांचवा और आखिरी लक्षण है जिसको आपको खास ध्यान रखना है वो है चक्कर आना या नजिया और वोमिटिंग जैसा फील होना. यह भी एक बहुत इंपॉर्टेंट लक्षण है, लेकिन बहुत से लोग इसे गैस समझकर नजरअंदाज कर देते हैं.
अगर आपको इनमें से कोई भी दो या तीन सिम्टम्स एक साथ नजर आए, तो तुरंत अपने डॉक्टर से संपर्क कीजिए क्योंकि जितना जल्दी आप रिस्पांस करेंगे, उतना ही ज्यादा चांसेस होंगे सर्वाइवल के.
अकेले हैं और हार्ट अटैक आए तो क्या करें
अब जानते हैं कि अगर आप घर अकेले हैं, कोई और आपकी मदद के लिए वहां पर नहीं है और आपको हार्ट अटैक अचानक से आ जाता है तो आपको क्या करना चाहिए? ये स्टेप्स बहुत ही सिंपल से हैं-
पहला स्टेप
सबसे पहला स्टेप है कि आपको अगर यह महसूस हो कि आप हार्ट अटैक में हैं तो फौरन रुक कर एक जगह पर बैठ जाइए. मूवमेंट बिल्कुल बंद कर दीजिए. जैसे ही आपको सीने में दबाव, जकड़न या कुछ भी अजीब सा लगने लगे, तो सबसे पहला और सबसे इंपॉर्टेंट स्टेप है तुरंत रुक जाना. चाहे आप चल रहे हो, किचन में काम कर रहे हो, बाथरूम में हो, सीढ़ियां चढ़ रहे हो, बस तुरंत रुक जाइए. आप किसी चेयर, सोफा या फिर बेड के कोने के ऊपर पीछे सहारा लेकर बैठ जाइए. यानी आपकी जो बैक है, पीठ है वो आपकी किसी चीज से टिकी हुई होनी चाहिए और आपकी बॉडी स्टेबल होनी चाहिए.
दूसरा स्टेप
इसके बाद सेकंड स्टेप में अगर आपके घर में एस्पिरन टैबलेट है तो 75 से 100 मिलीग्राम एस्पिन चबाकर पानी के साथ निगल लीजिए. जी हां, आपको साबुत टेबलेट नहीं निगलनी है बल्कि इसको मुंह में डाल के चबाना है और उसके बाद पानी से इसको आपको पी लेना है. ताकि यह जो एस्पिरिन है आपके मुंह के अंदर ही अब्सॉर्ब होना शुरू हो जाए और खून को पतला करने का काम जो है वो और ज्यादा तेजी से शुरू हो जाए. हार्ट अटैक में दिल की आर्टरी में क्लॉट बन जाता है. एस्पिरिन उस क्लॉट को जल्दी से तोड़ने में मदद करती है और रिसर्च के मुताबिक इससे दिल को होने वाला परमानेंट नुकसान 35 से 40% तक कम हो सकता है. यह आपको एंबुलेंस आने तक का टाइम देता है जो सबसे ज्यादा क्रिटिकल टाइम है. लेकिन ध्यान रखिएगा कि अगर आपको एस्पिरन से एलर्जी है, सीवियर गैस्ट्रिक अल्सर है या डॉक्टर ने स्पेसिफिकली आपको एस्पिरिन लेने से मना किया है तो इसे बिल्कुल भी मत लीजिए. इसलिए अगर आप हाई रिस्क कैटेगरी में आते हैं तो आप अपने डॉक्टर से पहले से ही इस बारे में बात करके रखें.
तीसरा स्टेप
स्टेप तीन में एस्पिरन खाने के बाद तुरंत इमरजेंसी सर्विस को कॉल कीजिए और एंबुलेंस बुलाइए. अगर आप अकेले हैं, तुरंत अपने नजदीकी हॉस्पिटल को या एंबुलेंस को या 112 पर कॉल करके अपने लिए एंबुलेंस मंगवाइए और तुरंत डॉक्टर के पास चले जाइए.
चौथा स्टेप
चौथा पॉइंट है दरवाजा खुला छोड़ देना. यह स्टेप आपको थोड़ा सा छोटा लग सकता है. लेकिन इमरजेंसी के वक्त यह बहुत इंपॉर्टेंट होता है कि जो भी आपकी मदद के लिए आपके पास आ रहा है वो आप तक आसानी से पहुंच जाए. उसे कोई प्रॉब्लम ना हो. अक्सर क्या होता है कि अगर आप अकेले हैं और पैरामेडिक्स आपके पास आते हैं, एंबुलेंस वगैरह आती है या डॉक्टर आता है तो दरवाजा लॉक्ड होता है अंदर से. वो नॉक करते हैं कि यार खोलो खोलो. लेकिन कई बार आपकी कंडीशन ऐसी नहीं होती है कि आप उठकर दरवाजा खोल पाए. इसलिए कॉल करते ही तुरंत दरवाजा पूरा खोल दीजिए.
पांचवा स्टेप
स्टेप फाइव है 45° एंगल पर झुक कर पैर थोड़ा सा ऊपर उठाकर रखना. जब हार्ट अटैक के सिम्टम्स शुरू होते हैं, तो आपकी बॉडी ऑलरेडी स्ट्रेस में होती है. इस वक्त सही पोश्चर बहुत ज्यादा बड़ा रोल प्ले करता है. आपको ना सीधे लेटना है ना ही बिल्कुल सीधा बैठना है. क्योंकि इन दोनों से ब्रीथिंग और सर्कुलेशन और ज्यादा खराब हो सकता है. इसलिए बेस्ट पोजीशन है 45° एंगल पर आगे की तरफ झुक कर बैठना और पीछे से टेक लगा कर रखना.
छठा स्टेप
छठे स्टेप में आपको अपने फैमिली मेंबर्स को एक छोटा सा टेक्स्ट मैसेज भेजना है. कॉल नहीं करना है. क्यों? क्योंकि हार्ट अटैक के वक्त बात करना आपके दिल पर एक्स्ट्रा लोड डालता है. लोग घबराहट में फैमिली को कॉल कर देते हैं और फैमिली वाले अपने प्यार में मोहब्बत में आपसे सवाल जवाब करने लगते हैं. क्या हो रहा है, कैसे हो रहा है, किससे करना है, क्या करना है? बात लंबी हो जाती है. और इससे ब्रीथिंग और हार्ट रेट और ज्यादा खराब हो जाता है. इसलिए कॉल नहीं कीजिए. सिर्फ एक छोटा सा मैसेज डाल दीजिए
सांतवा स्टेप
एक और इंपॉर्टेंट लाइफ सेवर पॉइंट है कंट्रोल्ड ब्रीथिंग करना. आप 4 सेकंड के लिए इन्हेल कीजिए और फिर 6 सेकंड एक्सहेल कीजिए. धीरे-धीरे डीपली डायफ्रामेटिक ब्रीथिंग कीजिए. नाक से चार गिनने तक सांस अंदर की तरफ लीजिए और फिर मुंह से धीरे-धीरे छह गिनने तक सांस को छोड़िए. इससे क्या होगा? आपकी ए्जायटी कम होगी और ऑक्सीजनेशन बॉडी में आपकी बेहतर होगा जो कि लाइफ सेवर हो सकता है.
आठवां स्टेप
आखिरी स्टेप है कलाई पर प्रेशर डालना और तीन बार जोर से खांसी करना. अपने अंगूठे से अपनी कलाई यानी अपने रिस्ट के इनर साइड पर जहां पर आपकी जो पल्स है वो आपको फील होती है वहां पर जोर से दबाइए. साथ ही तीन बार जोर-जोर से खांसने की कोशिश कीजिए. खांसी नहीं भी आ रही है तो खांसने की कोशिश कीजिए.
ऊपर बताए गए टिप्स आपको एंबुलेंस आने तक स्टेबल रखने में मदद कर सकता है. पर हां, यह कोई मेडिकल ट्रीटमेंट नहीं है. कोई इसका सब्स्टट्यूट नहीं है इलाज का. यानी यह मत सोचिएगा कि इससे सब कुछ ठीक हो जाएगा. यह आपको कुछ देर सपोर्ट करेगा. बट अल्टीमेटली आपको मेडिकल हेल्प से ही असल ट्रीटमेंट मिलेगा. इस टेक्निक से होगा क्या? बस आपके सर्वाइवल के जो चांसेस हैं वो थोड़े से बढ़ जाएंगे. तो इसको भी आप चाहे तो ट्राई कर सकते हैं.
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(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)














