अब बिना सर्जरी ठीक होगा कान का पर्दा, रूस में सेल-बेस्ड तकनीक का क्लिनिकल ट्रायल शुरू

रूस में पहली बार कान के पर्दे के पुनर्जनन (Regeneration) के लिए सेल-बेस्ड तकनीक का क्लिनिकल ट्रायल शुरू हुआ है, जिसमें मरीज की अपनी कोशिकाओं से नया कान का पर्दा तैयार किया जाएगा.

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इस तकनीक को सेल-बेस्ड मेडिकल प्रोडक्ट (Cell-Based Medical Product - CBMP) कहा जाता है.

कान का पर्दा फटना या खराब होना आज भी एक आम लेकिन गंभीर समस्या मानी जाती है. तेज आवाज, संक्रमण, चोट या लंबे समय तक कान की बीमारी के कारण यह स्थिति बन सकती है. अब तक ऐसे मामलों में इलाज के लिए सर्जरी या कृत्रिम पैच का सहारा लिया जाता था, जिसमें समय, जोखिम और रिकवरी तीनों की चुनौती रहती थी. लेकिन, अब मेडिकल साइंस ने एक ऐसा कदम बढ़ाया है जो इलाज की परिभाषा बदल सकता है.

रूस में पहली बार कान के पर्दे के पुनर्जनन (Regeneration) के लिए सेल-बेस्ड तकनीक का क्लिनिकल ट्रायल शुरू हुआ है, जिसमें मरीज की अपनी कोशिकाओं से नया कान का पर्दा तैयार किया जाएगा. यह न सिर्फ़ सर्जरी-फ्री इलाज का रास्ता खोलता है, बल्कि भविष्य की पर्सनलाइज्ड मेडिसिन की दिशा भी दिखाता है.

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क्या है यह नई सेल-बेस्ड तकनीक?

इस तकनीक को सेल-बेस्ड मेडिकल प्रोडक्ट (Cell-Based Medical Product - CBMP) कहा जाता है. इसमें मरीज के शरीर से ली गई हेल्दी सेल्स को प्रयोगशाला में विकसित किया जाता है. इन कोशिकाओं से ऐसा जैविक ऊतक (Tissue) तैयार किया जाता है, जो संरचना और कार्य दोनों में प्राकृतिक कान के पर्दे जैसा होता है. बाद में इसी टिश्यू को क्षतिग्रस्त हिस्से पर लगाया जाता है, जहां यह धीरे-धीरे जुड़कर नया पर्दा बना लेता है.

अपनी ही कोशिकाओं से इलाज: क्यों है यह खास?

इस तकनीक की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें मरीज की अपनी कोशिकाएं इस्तेमाल होती हैं. इससे कई फायदे होते हैं:

  • रिजेक्शन का खतरा बेहद कम हो जाता है, क्योंकि शरीर इसे बाहरी चीज नहीं मानता.
  • एलर्जी या इन्फेक्शन की संभावना घटती है.
  • शरीर नई संरचना को आसानी से स्वीकार करता है.

यही कारण है कि इसे पारंपरिक सर्जरी या सिंथेटिक मटीरियल से कहीं ज्यादा सुरक्षित माना जा रहा है.

समय और रिकवरी दोनों में बड़ी बचत

पारंपरिक कान की सर्जरी में ऑपरेशन थिएटर, एनेस्थीसिया, कई हफ्तों की रिकवरी जैसे स्टेज शामिल होते हैं. वहीं सेल-बेस्ड तकनीक में प्रक्रिया अपेक्षाकृत कम समय में पूरी हो सकती है और दर्द कम, अस्पताल में रहने की जरूरत कम, रोजमर्रा की जिंदगी में जल्दी वापसी संभव हो पाती है. यही वजह है कि डॉक्टर इसे रोगी-अनुकूल नवाचार मान रहे हैं.

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क्लिनिकल ट्रायल क्यों है इतना अहम?

यह ट्रायल इसलिए ऐतिहासिक है क्योंकि यह कान के पर्दे के पुनर्जनन के लिए CBMP का पहला क्लिनिकल उपयोग है.

क्लिनिकल ट्रायल के ज़रिए वैज्ञानिक यह जांचेंगे कि नया टिश्यू कितनी अच्छी तरह जुड़ता है. सुनने की क्षमता में कितना सुधार होता है. लंबे समय में कोई साइड-इफेक्ट तो नहीं. अगर ये परिणाम सकारात्मक रहते हैं, तो यह तकनीक आगे चलकर दुनिया भर में अपनाई जा सकती है.

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पर्सनलाइज्ड मेडिसिन की ओर बड़ा कदम

  • यह तकनीक सिर्फ कान के इलाज तक सीमित नहीं है. यह एक बड़े बदलाव का संकेत है. जहां इलाज हर मरीज के शरीर के अनुसार तैयार किया जाएगा.
  • भविष्य में त्वचा, हड्डी, कार्टिलेज यहां तक कि अन्य अंगों की मरम्मत भी कृत्रिम सामग्री की जगह शरीर के अपने बायोलॉजिकल कॉम्पोनेंट से की जा सकेगी.

इलाज का भविष्य शरीर के अंदर ही छिपा है:

रूस में शुरू हुआ यह सेल-बेस्ड क्लिनिकल ट्रायल दिखाता है कि मेडिकल साइंस अब कट-छांट से आगे बढ़कर रीजनरेशन की ओर जा रही है. बिना सर्जरी, कम जोखिम और तेज रिकवरी यह तकनीक न केवल कान के मरीजों के लिए उम्मीद है, बल्कि यह साबित करती है कि आने वाला समय शरीर से ही शरीर को ठीक करने का होगा.

(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)

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