नींद में ही बीमारी का पता लगाएगा एआई डॉक्टर, स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी ने विकसित की अनोखी तकनीक

SleepFM One: अब तक किसी भी बीमारी का पता लगाने के लिए लोगों को डॉक्टर के पास जाना पड़ता था, टेस्ट कराने होते थे और रिपोर्ट का इंतज़ार करना पड़ता था. लेकिन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) ने हेल्थ सेक्टर में एक ऐसी क्रांतिकारी तकनीक विकसित कर ली है, जो इंसान की नींद के दौरान ही उसकी बीमारी का पता लगा सकेगी.

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अब सोते हुए ही पता लग जाएगी आपकी बीमारी.

SleepFM One: अब तक किसी भी बीमारी का पता लगाने के लिए लोगों को डॉक्टर के पास जाना पड़ता था, टेस्ट कराने होते थे और रिपोर्ट का इंतज़ार करना पड़ता था. लेकिन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) ने हेल्थ सेक्टर में एक ऐसी क्रांतिकारी तकनीक विकसित कर ली है, जो इंसान की नींद के दौरान ही उसकी बीमारी का पता लगा सकेगी.

अमेरिका की मशहूर स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने एक एडवांस्ड एआई मॉडल तैयार किया है, जिसे नाम दिया गया है SleepFM One. यह मॉडल इंसान के सोते समय शरीर के अंदर होने वाली गतिविधियों का विश्लेषण करके यह आकलन करता है कि व्यक्ति किसी बीमारी से ग्रस्त है या नहीं.

कैसे काम करता है ये एआई डॉक्टर?

इस एआई तकनीक में पॉलीसोमनोग्राफी (Polysomnography) का इस्तेमाल किया जाता है. पॉलीसोमनोग्राफी एक वैज्ञानिक प्रोसेस है, जिसमें नींद के दौरान शरीर के अलग-अलग हिस्सों की गतिविधियों को रिकॉर्ड किया जाता है.

सोने से पहले मरीज के शरीर पर कई सेंसर लगाए जाते हैं, जो दिल, दिमाग, सांस लेने की गति, मांसपेशियों की हलचल और शरीर के अंदर होने वाले सूक्ष्म कंपन को रिकॉर्ड करते हैं. जब व्यक्ति गहरी नींद में होता है, तब उसका शरीर बिना किसी बनावट के अपनी वास्तविक स्थिति को दर्शाता है.

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ये सेंसर नींद के दौरान शरीर से मिलने वाले डेटा को इकट्ठा करते हैं. इसके बाद SleepFM One एआई मॉडल इस डेटा का विश्लेषण करता है और पैटर्न के आधार पर यह अनुमान लगाता है कि व्यक्ति को कौन-सी बीमारी हो सकती है.

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किन बीमारियों का चल सकता है पता?

शोधकर्ताओं के अनुसार, यह एआई मॉडल नींद से जुड़ी बीमारियों के साथ-साथ

  • दिल की समस्याएं
  • न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर
  • सांस संबंधी रोग
  • मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी परेशानियां

जैसी स्थितियों के शुरुआती संकेत पहचानने में सक्षम हो सकता है.

हेल्थ सेक्टर में नई क्रांति

एक्सपर्ट का मानना है कि यह तकनीक भविष्य में रोगों की समय पर पहचान (Early Detection) में अहम भूमिका निभा सकती है. इससे न सिर्फ इलाज जल्दी शुरू हो सकेगा, बल्कि गंभीर बीमारियों को बढ़ने से पहले ही रोका जा सकेगा.

हालांकि, अभी यह तकनीक रिसर्च और ट्रायल के चरण में है, लेकिन अगर यह सफल होती है तो आने वाले समय में डॉक्टर के पास जाने की परंपरा पूरी तरह बदल सकती है.

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(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)

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