- गुजरात में समान नागरिक संहिता लागू करने हेतु गठित उच्चस्तरीय समिति ने मुख्यमंत्री को अंतिम रिपोर्ट सौंप दी है
- रिपोर्ट तीन वॉल्यूम में तैयार की गई है जिसमें विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और गोद लेने के कानून शामिल हैं
- समिति ने सभी धर्मों और समुदायों पर लागू होने वाले मानकीकृत कानूनी ढांचे का प्रस्ताव रखा है
गुजरात में समान नागरिक संहिता को लागू करने की दिशा में एक अहम कदम उठाया गया है. UCC के मसौदे को लेकर गठित उच्चस्तरीय समिति ने अपनी अंतिम और व्यापक रिपोर्ट मंगलवार को मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल को सौंप दी. राज्य की राजधानी में हुई बैठक के दौरान समिति की अध्यक्ष और सुप्रीम कोर्ट की सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई ने यह रिपोर्ट मुख्यमंत्री को प्रस्तुत की. रिपोर्ट तीन वॉल्यूम में तैयार की गई है, जिसमें UCC से जुड़े सभी पहलुओं को शामिल किया गया है.
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विवाह, तलाक और उत्तराधिकार पर समान कानून का प्रस्ताव
समिति ने राज्य में सभी धर्मों और समुदायों पर लागू होने वाले एक मानकीकृत कानूनी ढांचे का प्रस्ताव दिया है. सिफारिशों में विशेष रूप से विवाह और तलाक के कानून, उत्तराधिकार और संपत्ति के अधिकार तथा गोद लेने की प्रक्रिया को शामिल किया गया है. मसौदे का मुख्य फोकस महिलाओं को समान अधिकार और कानूनी संरक्षण सुनिश्चित करने पर है. अधिकारियों के अनुसार, रिपोर्ट में एकरूपता के साथ-साथ गुजरात की भौगोलिक और सांस्कृतिक विविधता का भी ध्यान रखा गया है.
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व्यापक परामर्श प्रक्रिया के बाद तैयार हुआ मसौदा
यह रिपोर्ट एक विस्तृत अध्ययन प्रक्रिया का परिणाम है, संतुलित मसौदा तैयार करने के लिए समिति ने राज्यभर में जिला स्तर पर फील्ड विजिट, जनता से व्यापक परामर्श और मौजूदा व्यक्तिगत कानूनों की गहन कानूनी समीक्षा की. जस्टिस देसाई के नेतृत्व वाली इस उच्चस्तरीय समिति में सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी सी. एल. मीणा, वरिष्ठ अधिवक्ता आर. सी. कोडेकर, पूर्व कुलपति डॉ. दक्षेश ठाकर और सामाजिक कार्यकर्ता गीता श्रॉफ शामिल हैं.














