ठगी का सबसे खतरनाक तरीका: एआई से बनाया आपका 'जुड़वां', बायोमेट्रिक्स को दी मात, उठाए लाखों के लोन

Deepfake Fraud: अहमदाबाद पुलिस ने एआई और डीपफेक के जरिए आधार हैक करने वाले सबसे अनोखे गैंग को पकड़ा है. 12वीं पास दिमाग ने पलकें झपकाने वाला वीडियो बनाकर बायोमेट्रिक सिस्टम को धोखा दिया और लोगों के नाम पर लाखों का लोन निकाल लिया.

विज्ञापन
Read Time: 3 mins
फटाफट पढ़ें
Summary is AI-generated, newsroom-reviewed
  • अहमदाबाद साइबर क्राइम ब्रांच ने एक ऐसे गिरोह को पकड़ा है जो AI टूल्स से सरकारी डेटा में सेंध लगा रहा था
  • गिरोह ने जेमिनाई और मेटा जैसे एआई टूल्स से डीपफेक वीडियो बनाकर बायोमेट्रिक सिस्टम की सुरक्षा को मात दी थी
  • आधार कार्ड में मोबाइल नंबर बदलने के लिए एआई वीडियो का इस्तेमाल कर मशीन को जीवित व्यक्ति समझाकर धोखा दिया गया
क्या हमारी AI समरी आपके लिए उपयोगी रही?
हमें बताएं।

Ahmedabad Cyber Crime: अहमदाबाद साइबर क्राइम ब्रांच ने एक ऐसे गिरोह को दबोचा है जिसने तकनीक के जरिए ठगी का सबसे अनूठा रास्ता निकाला था.यह भारत में साइबर ठगी का संभवतः सबसे अनोखा मामला है, क्योंकि इसमें ठगों ने जेमिनाई (Gemini) और मेटा (Meta) जैसे एआई टूल्स का इस्तेमाल कर लोगों के चेहरे का क्लोन बनाया और सरकारी डेटा में सेंध लगा दी. अब तक ठगी के मामलों में लोग बातों में फंसाते थे, लेकिन यहां एआई ने आंखों के सामने असली इंसान जैसा 'डीपफेक' वीडियो तैयार कर मशीन तक को बेवकूफ बना दिया. इस गिरोह में हैरानी की बात यह भी है कि इसका एक मुख्य किरदार सिर्फ 12वीं पास है, जिसने अपनी शातिर सोच से बड़े-बड़े बायोमेट्रिक सिस्टम को फेल कर दिया. 

ऐसे दिया 'मशीन' को धोखा: पलकें झपकते ही बदली पहचान

आमतौर पर जब हम आधार कार्ड में मोबाइल नंबर बदलवाते हैं, तो मशीन यह चेक करती है कि सामने बैठा व्यक्ति जीवित है या नहीं (Liveness Detection). इस गिरोह ने इसी सुरक्षा चक्र को तोड़ने का तोड़ निकाल लिया. इन्होंने पीड़ित का फोटो लेकर एआई से उसका ऐसा वीडियो बनाया जिसमें वह हूबहू असली इंसान की तरह पलकें झपकाता (Eye-blink) दिखता था. जब वेरिफिकेशन के लिए कैमरा ऑन होता, तो ये उस वीडियो को स्क्रीन के सामने रख देते. कंप्यूटर को लगता कि सामने असली आदमी बैठा है और इसी तरह इन्होंने चुपचाप लोगों के आधार से जुड़े मोबाइल नंबर बदल दिए.

ओटीपी अपना और कर्ज पीड़ित के नाम

जैसे ही आधार में मोबाइल नंबर बदला गया, इन ठगों के पास उस व्यक्ति की पूरी डिजिटल पहचान आ गई. इसके बाद इन्होंने पीड़ितों के डिजिलॉकर (DigiLocker) को अपने कब्जे में लिया और कोटक महिंद्रा, जियो पेमेंट्स और आईडीएफसी जैसे बैंकों में धड़ाधड़ खाते खोल दिए. इतना ही नहीं, 'अर्ली सैलरी' और 'ट्रू क्रेडिट्स' जैसे लोन ऐप्स से लाखों के पर्सनल लोन उठा लिए. मतलब कर्ज ठगों की जेब में गया और बोझ उन लोगों के सिर पर आ गया जिन्हें यह पता भी नहीं था कि उनके नाम पर कोई फ्रॉड हुआ है.
ये भी पढ़ें: पुणे में 81 साल के पिता की समझदारी ने 12 लाख की ठगी से बचाया परिवार

पुलिस की गिरफ्त में चार शातिर दिमाग

डीसीपी डॉ. लवीना सिन्हा की टीम ने इस मामले में कनुभाई परमार, आशीष वालैंड, मोहम्मद कैफ पटेल और दीप गुप्ता को गिरफ्तार किया है. इनमें से कोई बीबीए है तो कोई आईटी डिप्लोमा धारक, लेकिन गिरोह में 12वीं पास युवक की सक्रियता ने पुलिस को भी चौंका दिया है कि कैसे कम पढ़ा-लिखा व्यक्ति भी तकनीक का इतना खतरनाक इस्तेमाल कर रहा है. फिलहाल ये चारों जेल में हैं, लेकिन पुलिस अब इस नेटवर्क से जुड़े दूसरे लोगों की तलाश में जुटी है ताकि पता चल सके कि इन्होंने कितने और लोगों को अपनी एआई की मायाजाल में फंसाया है.
ये भी पढ़ें: अब PNG कनेक्शन के नाम पर हो रहा स्कैम, एक गलती और खाली हो सकता है अकाउंट, जानें PNG Connection लेते समय किन बातों का ध्यान रखें

Advertisement
Featured Video Of The Day
Bengal Elections 2026: बंगाल में रिकाॅड तोड़ मतदान जारी, 3 बजे तक 78.7% मतदान | Breaking News
Topics mentioned in this article