अहमदाबाद: दो दिन से जिस बैटर का खा रहे थे डोसा, वही बना जहर! दो बहनों ने तोड़ा दम, माता-पिता भी क्रिटिकल

चांदखेड़ा इलाके में एक दुकान से लाए इस बैटर ने दो बहनों की जान ले ली और माता-पिता भी जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहे हैं. जिस दुकान से ये जहरीला बैटर लाया गया,उसके मालिक की सफाई भी आई है.

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  • अहमदाबाद में एक परिवार ने स्थानीय डेयरी से खरीदे डोसा बैटर से दो मासूम बच्चियों की मौत, माता-पिता गंभीर
  • परिवार ने लगातार दो दिन डोसा बैटर से बने डोसे खाए, जिसके बाद सभी सदस्य उल्टियां और कमजोरी हो गई
  • मृत बच्चियों का पोस्टमार्टम किया गया है और फॉरेंसिक टीम ने डेयरी तथा घर से भोजन के नमूने जांच के लिए जब्त किए
अहमदाबाद:

अहमदाबाद के एक परिवार के लिए कथित डोसा बैटर जहर बन गया. आरोप है कि चांदखेड़ा इलाके में एक दुकान से लाए इस बैटर ने दो बहनों की जान ले ली और माता-पिता भी जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहे हैं. जिस दुकान से ये जहरीला बैटर लाया गया,उसके मालिक की सफाई भी आई है. उसका कहना है कि उस दिन 20 और लोगों ने भी वही बैटर खरीदा था पर ऐसी कोई शिकायत नहीं आई. पुलिस और FSL की टीम भी जांच कर रही है. 

डोसा बैटर कैसे बना जहर? 

अहमदाबाद के चांदखेड़ा इलाके में रहने वाले एक परिवार ने डोसा खाने का प्लान किया. डोसा के लिए बैटर की जरूरत थी जो घर में बना नहीं था. तो घर के मुखिया विमल प्रजापति ने आईओसी (IOC) रोड पर स्थित एक स्थानीय डेयरी से बना-बनाया डोसा बैटर (खीलू) खरीदा. परिवार ने लगातार दो शाम उस बैटर से बने डोसे खाए. इसके बाद परिवार के चारों सदस्य विमल, उनकी पत्नी भावना, उनकी तीन साल की बेटी मिष्टी और लगभग तीन महीने की मासूम बेटी राहा की तबीयत धीरे-धीरे बिगड़ने लगी.उन्हें लगातार उल्टियां और भारी कमजोरी जैसे गंभीर लक्षण दिखाई दिए. दो मासूम बहनों की जान चली गई, वहीं, उनके माता-पिता एक निजी अस्पताल में जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहे हैं.

तबीयत ठीक हुई फिर मौत

शुरुआत में इस स्थिति की गंभीरता का पता नहीं चल पाया क्योंकि बीच में परिवार की तबीयत थोड़ी सुधर गई थी. चांदखेड़ा पुलिस स्टेशन के पुलिस इंस्पेक्टर जे.के. मकवाना ने बताया कि राहत महसूस होने पर परिवार ने पहले केवल सामान्य इलाज कराया और तुरंत अस्पताल में भर्ती नहीं हुए.हालांकि, जल्द ही बच्चों की हालत बहुत ज्यादा बिगड़ गई.ढाई महीने की छोटी बच्ची, राहा की अचानक घर पर ही मौत हो गई. दुख की घड़ी में और कानूनी नियमों की जानकारी न होने के कारण, परिवार ने पुलिस को सूचित किए बिना ही उसका अंतिम संस्कार कर दिया.इसके बाद तीन साल की बेटी मिष्टी को अचानक चक्कर आया और वह गिर पड़ी. उसे तुरंत केडी (KD) अस्पताल ले जाया गया, लेकिन वहां पहुंचते ही उसे मृत घोषित कर दिया गया.बच्चियों के माता-पिता अभी भी केडी अस्पताल में गंभीर स्थिति में भर्ती हैं, जहां डॉक्टरों की टीम लगातार उनकी सेहत पर नजर रखे हुए है.

डेयरी की जांच

दूसरी मौत के बाद, चांदखेड़ा पुलिस ने आकस्मिक मृत्यु (accidental death) का मामला दर्ज किया और व्यापक जांच शुरू कर दी. डॉक्टरों के एक पैनल ने मिष्टी का पोस्टमार्टम किया और फॉरेंसिक विशेषज्ञों ने प्रजापति के घर और स्थानीय डेयरी, दोनों जगहों से भोजन के नमूने इकट्ठे किए हैं.डेयरी प्रबंधन ने अपनी साफ-सफाई के मानकों का बचाव किया है. मालिक, केतन पटेल ने बताया कि उनकी दुकान से रोजाना 100 से 125 किलो बैटर बिकता है. उन्होंने दावा किया कि 1 अप्रैल को उसी बैच से कम से कम 20 अन्य नियमित ग्राहकों ने भी बैटर खरीदा था, लेकिन किसी ने भी बीमार होने की शिकायत नहीं की. इन दावों की पुष्टि के लिए दुकान के सीसीटीवी (CCTV) फुटेज पुलिस को सौंप दिए गए हैं. जांच अधिकारी इस बात पर भी गौर कर रहे हैं कि इतनी छोटी बच्ची (राहा) कैसे प्रभावित हुई, क्योंकि उस उम्र के बच्चे ठोस आहार नहीं लेते. एक मुख्य थ्योरी यह है कि मां के बीमार होने के बाद स्तनपान (breastfeeding) के जरिए बच्ची तक जहर या संक्रमण पहुंचा हो सकता है.

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प्रयोगशाला की रिपोर्ट का इंतजार

मुख्य संदेह अभी भी फूड पॉइजनिंग या बैटर (घोल) में किसी तरह की मिलावट पर है, लेकिन अधिकारी अभी किसी अंतिम नतीजे पर पहुंचने से बच रहे हैं.पुलिस इंस्पेक्टर मकवाना ने जोर देते हुए कहा, "प्रयोगशाला (लैब) की रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के असली कारण का पता चल पाएगा." खाद्य एवं औषधि विभाग (Food and Drugs Department) फिलहाल जब्त किए गए नमूनों की जांच कर रहा है ताकि उनमें बैक्टीरिया या हानिकारक रसायनों का पता लगाया जा सके.जब तक वे नतीजे सामने नहीं आते, तब तक उस जहर के असली स्रोत का पता लगाना एक सक्रिय जांच का विषय बना हुआ है जिसने प्रजापति परिवार को तबाह कर दिया.

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