Mid Day Meal: बच्चों के लिए अच्छा खानपान बेहद जरूरी होता है. उनके खाने में सभी तरह के पोषक तत्वों का होना बेहद जरूरी है. जिसके चलते स्कूलों में भी बच्चे के के लिए मिड डे मील भी शुरु किया गया है. बता दें कि अब स्कूलों में भी पढ़ाई के साथ-साथ वहां की कैटीन और मिड डे मील बच्चों के भविष्य को गढ़ रही है. अपने पूरे दिन का एक बड़ा हिस्सा बच्चों का स्कूल में गुजरता है, जिसमें वो अच्छी और बुरी आदतें भी सीखते हैं. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) का कहना है कि अगर स्कूलों में बच्चों को पौष्टिक और बैलेंस डाइट दी जाए तो वो पूरे लाइफटाइम खानपान की स्वस्थ आदतों को अपना सकता है. इन्हीं सभी बातों को ध्यान रखते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन ने एक नई डाइटरी गाइडलाइंस जारी की है.
बता दें कि ये पहली बार है जब डब्ल्यूएचओ ने स्कूलों में हेल्दी डाइट को लेकर के कोई गाइडलाइन जारी की है. इस गाइडलाइन के मुताबिक स्कूलों में बच्चों को जो भी खाना या ड्रिंक दिया जा रहा है या जो भी कैंटीन में बिक रहा है, सब कुछ सेहतमंद और पोषण से भरपूर होना चाहिए. जानकारी की मानें तो आज के समय में स्कूलों में करीब 47 करोड़ बच्चों को खाना प्रोवाइड किया जाता है. लेकिन इसके बावजूद इस बात की जानकारी बेहत सीमित है कि उन्हें जो खाना दिया जा रहा है, वो कितना पौष्टिक और बैलेंस्ड है.
बढ़ता मोटापा और कुपोषण
WHO की मानें तो आज के समय में दुनिया पोषण की दोहरी समस्या से जूझ रही है. एक तरफ बच्चे वजन बढ़ने और मोटापे से ग्रस्त हो रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ कुपोषण भी एक चुनौती बना हुआ है. स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 में दुनिया भर में स्कूल जाने की उम्र का हर दसवां बच्चा मोटापे से ग्रसित था. यानी करीब 18.8 करोड़ बच्चे और किशोर मोटापे के साथ जीवन गुजरने को मजबूर थे. इसी तरह हर पांचवां बच्चा (39.1 करोड़) बढ़ते वजन से जूझ रहा था. यहां पर चिंता इस बात की हो रही है कि ये संख्या पहली बार उन बच्चों से ज्यादा हो गई है जो कम वजन या कुपोषण का शिकार हैं.
डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक डॉक्टर टैड्रॉस एडहेनॉम घेबरेयेसस का कहना है, स्कूलों में बच्चों को जैसा भोजन मिलता है और जिस तरह के परिवेश में उनका खान-पान तय होता है, उसका असर उनके सीखने, पढ़ने और सेहत पर भी पड़ता है. उन्होंने बताया कि बच्चों को मिलने वाला सही पोषण न सिर्फ बीमारियों से बचाने में मदद करता है बल्कि उनके हेल्दी भविष्य को भी सुनिश्चित करता है.
जंक फूड से दूरी है जरूरी
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने नई गाइडलाइन में स्कूलों को फूड क्वालिटी को बेहतर बनाने के कुछ सुझाव दिए हैं. उन्होंने स्कूलों में जंक फूड जैसे अनहेल्दी ऑप्शंस को सीमित करने के लिए कुछ नियम बनाए हैं. इस नई गाइडलाइन के मुताबिक शुगर, संतृप्त वसा, सोडियम की मात्रा को सीमित किया जाना चाहिए, जबकि साबुत अनाज, फल, सूखे मेवे और दालों को ज्यादा मात्रा में बच्चों की डाइट में शामिल करना होगा.
नीतियां पर निगरानी रखना भी है जरूरी
डब्ल्यूएचओ की मानें तो इस दिशा में केवल नीतियां ही नहीं बनानी हैं बल्कि उनका सही तरीके से पालन करना भी बेहद जरूरी है. स्वास्थ्य संगठन के आंकड़ों के मुताबिक, अक्टूबर 2025 तक 104 देशों में स्कूलों के लिए हेल्दी डाइट से जुड़ी नीतियां मौजूद थीं. लेकिन केवल 48 देशों ने चीनी, नमक और हानिकारक फैट से भरपूर फूड आइटम्स के प्रचार पर रोक लगाई.
(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)













