Processed Food Ke Nuksan: आज के समय में लोगों के पास समय की बहुत कमी हो गई है. इसलिए वो हर चीज का शॉर्टकट ढूंढने लगे हैं. फिर वो चाहे अपनी लाइफ को इजी बनाने के लिए अप्लायंस का इस्तेमाल करना हो या फिर अपने खाने को आसान बनाने के लिए पैकेज्ड, डिब्बाबंद फूड और प्रोसेस्ड फूड का सेवन करना हो. ये आपकी जिंदगी को थोड़ा आसान तो बना ही देते हैं. लेकिन आपको बता दें कि ये स्वादिष्ट फूड आइटम्स जिनको आप फ्रिज में स्टोर करते हैं और मन होने पर गर्म कर के खा लेते हैं वो आपकी सेहत के लिए खतरा बन रहे हैं. एक नए अंतरराष्ट्रीय अध्ययन में ये चेतावनी दी गई है कि ऐसे केमिकल्स का ज्यादा सेवन टाइप-2 डायबिटीज के खतरे को तेजी से बढ़ा सकता है.
बता दें कि ये स्टडी फ्रांस के प्रतिष्ठित संस्थानों इंसर्म, आइएनआरएई, सोरबोन पेरिस नॉर्ड यूनिवर्सिटी, पेरिस सिटे यूनिवर्सिटी और सीएनएएम से जुड़े वैज्ञानिकों द्वारा की गई है. इस स्टडी के नतीजे जर्नल नेचर कम्युनिकेशंस में प्रकाशित हुए हैं.
एक लाख से ज्यादा लोगों पर हुई रिसर्च
इस स्टडी में वैज्ञानिकों ने एक लाख से ज्यादा वयस्कों के खान-पान और सेहत से जुड़े आंकड़ों का विश्लेषण किया है. बता दें कि इस स्टडी में शामिल सभी लो 2009 से 2023 के बीच चले फ्रांसीसी न्यूट्रीनेट-सांते अध्ययन का हिस्सा थे. इन सभी लोगों से सालों तक उनके खाने, लाइफस्टाइल, फिजिकल एक्टिविटी और हेल्थ से जुड़े रेगुलर अपडेट्स के बारे में सभी इंफॉर्मेशन रखी.
इस स्टडी में खास बात ये समझ में आई कि जो भी पैकेटबंद फूड आइटम्स खाए गए इन लोगों के द्वारा उनके नाम और ब्रांड तक का नाम नोट किया गया था. इसके बाद वैज्ञानिकों ने इन सारी इंफॉर्मेशन को फूड आइटम्स के बड़े डाटाबेस से मिलाकर यह पता लगाया कि लोग कितनी मात्रा में प्रिजरवेटिव्स खा रहे हैं.
क्या होते हैं प्रिजरवेटिव्स?
अब सवाल ये उठता है कि ये प्रिजरवेटिव्स होते क्या हैं. आपको बता दें कि ये वो केमिकल्स होते हैं जो खाने-पीने की चीजों को लंबे समय तक खराब होने से बचाते हैं. आज के समय में दुनिया में बिकने वाले लाखों पैकेज्ड फूड में ये केमिकल मिलाया जाता है. 2024 में ओपन फूड फैक्ट्स वर्ल्ड डाटाबेस में दर्ज किए गए 35 लाख से ज्यादा खाने-पीने के प्रोडक्ट्स में से करीब सात लाख से ज्यादा प्रोडक्ट्स में प्रिजरवेटिव मौजूद था.
इंसर्म के वैज्ञानिकों ने इन प्रिजरवेटिव्स को दो समूहों में बांटा है. पहले में उस केमिकल को रखा गया है जो बैक्टीरिया और फंगस को बढ़ने से रोकता है और खाने को खराब होने की केमिकल प्रोसेस को धीमा करता है. दूसरे समूह में उन एंटीऑक्सिजेंट प्रिजरवेटिव्स को रखा गया है जो खाने की पैकेजिंग में ऑक्सीजन की मात्रा को घटाकर या खत्म करके भोजन को खराब होने से बचाते हैं.
स्टडी के दौरान इसमें शामिल लोगों के खाने में कुल 58 तरह के प्रिजरवेटिव्स पाए गए, इनमें 33 नॉर्मल प्रिजरवेटिव्स और 27 एंटीऑक्सिडेंट एडिटिव्स शामिल थे. इनमें से उन 17 प्रिजरवेटिव्स की जांच गहराई से की गई जिनका सेवन 10 फीसदी प्रतिभागी नियमित तौर पर कर रहे थे. इन्हीं केमिकल्स के सेवन और इनसे होने वाली बीमारियों के खतरे क्या और कितना संबंध है इसका विश्लेषण किया गया.
नतीजों ने किया हैरान
जिन 17 प्रिजरवेटिव्स का गहराई से और अलग-अलग अध्ययन किया गया, उनमें से 12 केमिकल्स के ज्यादा सेवन से टाइप-2 डायबिटीज का खतरा बढ़ता पाया गया. इनमें आमतौर पर इस्तेमाल होने वाले कुछ प्रिजरवेटिव्स थे जिनमें शामिल था पोटैशियम सोर्बेट, पोटैशियम मेटाबाइसल्फाइट, सोडियम नाइट्राइट, एसिटिक एसिड, सोडियम एसीटेट और कैल्शियम प्रोपियोनेट.
इसके अलावा कुछ एंटीऑक्सिडेंट एडिटिव्स भी इस खतरे को बढ़ाते पाए गए जैसे सोडियम एस्कॉर्बेट, अल्फा-टोकोफेरॉल, सोडियम एरिथॉर्बेट, साइट्रिक एसिड, फॉस्फोरिक एसिड और रोजमेरी एक्सट्रैक्ट. बता दें कि ये वहीं केमिकल हैं जो अमूमन सॉसेज, बेकरी प्रोडक्ट्स, कोल्ड ड्रिंक्स, सॉस, रेडी-टू-ईट फूड और पैकेज्ड स्नैक्स में मिलते हैं.
लगभग 14 सालों तक की गई इस स्टडी के दौरान 1,131 लोगों में टाइप-2 डायबिटीज की पहचान हुई. स्टडी में ये भी पाया गया कि जो लोग बहुत ज्यादा मात्रा में प्रिजरवेटिव्स का सेवन कर रहे थे, उनमें डायबिटीज का खतरा 47 से 49 फीसदी तक ज्यादा था. वहीं जो लोग एंटीऑक्सिडेंट एडिटिव्स का सेवन कर रहे थे उनमें ये खतरा 40 फीसदी ज्यादा पाया गया है.
बता दें कि इन्हीं सब से जुड़ी एक और बात ने लोगों को डरा दिया. दरअसल फ्रांस से आई एक नई वैज्ञानिक चेतावनी ने तब लोगों की चिंता और बढ़ा दी जब उन्होंने बताया कि एक स्टडी में पाया गया है कि जो चीजें औद्योगिक रूप से तैयार की गई हैं उनमें मिलाए जाने वाले प्रिजरवेटिव्स का ज्यादा सेवन कैंसर के खतरे को बढ़ा सकता है. इस अध्ययन के नतीजे प्रतिष्ठित मेडिकल जर्नल द बीएमजे में प्रकाशित हुए हैं.
रिसर्चस का मानना है कि अब फूड आइटम्स में एडिटिव्स के इस्तेमाल पर नियमों को एक बार और से देख लेना चाहिए. इसके साथ ही विशेषज्ञों ने लोगों को घर का बना फ्रेश फूड खाने को कहा है. इसके साथ ही आप जिन चीजों का सेवन कर रहे हैं उन पर कौन से और कितने प्रिजरवेटिव्स हैं इसकी जांच एक बार जरूर करें.
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(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)














