खून को साफ करने और बुखार को कम करने समेत इन 5 समस्याओं के लिए काल है काममेघ के पत्तों का काढ़ा

Kalmegh Leaves Kadha: कालमेघ को आयुर्वेद में संजीवनी की संज्ञा दी गई है, जो एक नहीं, बल्कि अनेक रोगों में राहत देता है.

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Kalmegh Leaves Kadha: कालमेघ के पत्तों का काढ़ा पीने के फायदे.

आयुर्वेद में कई जड़ी-बूटियों का उल्लेख मिलता है, जो अपने गुणों के अनुसार बीमारियों से निजात पाने में मदद करती हैं. किसी जड़ी-बूटी की जड़ तो किसी के पत्ते गुणों से भरे होते हैं. ऐसा ही एक पत्तेदार पौधा कालमेघ है, जिसकी पत्तियां शरीर के हर अंग के लिए फायदेमंद हैं. ये सामान्य बुखार, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने, पेट की गैस, आंतों के कीड़े और कब्ज समेत कई परेशानियों में राहत देती हैं.

कालमेघ को आयुर्वेद में संजीवनी की संज्ञा दी गई है, जो एक नहीं, बल्कि अनेक रोगों में राहत देता है. कालमेघ के पत्ते स्वाद में कड़वे और कसैले होते हैं, इसलिए इसे 'बिटर किंग' के नाम से भी जाना जाता है. यह पौधा उत्तर भारत और बंगाल क्षेत्र में पाया जाता है. इसके पत्तों में एन्ड्रोग्राफोलाइड की मात्रा अधिक होती है और यही वजह है कि यह पौधा कई गुणों से भरपूर होता है.

काममेघ के पत्तों का काढ़ा पीने के फायदे- (Kalmegh Ke Patte Ka Kadha Pine Ke Fayde)

1.खून साफ करने-

सारी बीमारियों की जड़ रक्त होता है. अगर रक्त अशुद्ध है तो फ्लू, वायरल संक्रमण और मलेरिया जैसी स्थिति पैदा हो सकती है और हालत ज्यादा बिगड़ने पर अंग सक्रिय रूप से काम करना बंद कर देते हैं. ऐसे में कालमेघ के पत्तों का काढ़ा रक्त को शुद्ध करने में मदद कर सकता है.

2. ब्लड शुगर के लिए-

कालमेघ में एंटी-डायबेटिक गुण पाए जाते हैं, जो ब्लड शुगर को नियंत्रित करने में मदद कर सकते हैं. कुछ शोधों के अनुसार यह मधुमेह रोगियों के लिए उपयोगी है. अगर शुगर के मरीज काममेघ के पत्तों का काढ़ा पीते हैं तो रक्त में शर्करा को संतुलित किया जा सकता है.

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3. स्किन के लिए-

कुछ लोगों को स्किन से जुड़ी परेशानी बहुत होती है, क्योंकि पित और कफ दोष असंतुलित होते हैं. ऐसे में मुंहासे, फोड़े-फुंसी, खुजली और त्वचा संक्रमण जैसी परेशानियां बनी रहती हैं. इनसे बचाव के लिए कालमेघ के पत्तों का पेस्ट बनाकर लगाने से राहत मिलती है.

4. कोलेस्ट्रॉल के लिए- 

कालमेघ एंटी-क्लॉटिंग गुण से भरपूर होता है, जो धमनियों के जरिए रक्त के प्रवाह को बेहतर बनाता है और कोलेस्ट्रॉल को भी नियंत्रित करता है. यह रक्त में बनने वाले धक्कों के जोखिम को भी कम करता है. 

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5. बुखार के लिए-

कालमेघ लंबे समय तक रहने वाले या बार-बार होने वाले बुखार में उपयोगी माना जाता है. यह मलेरिया, टायफाइड और वायरल फीवर में शरीर को जल्दी रिकवर करने में मदद कर सकता है.

नोटः अब सवाल है कि किन लोगों को कालमेघ के सेवन में सावधानी बरतनी चाहिए. अगर कालमेघ के सेवन के बाद पेट में दर्द, चक्कर आना और उल्टी जैसी परेशानी होती है तो सेवन न करें. गर्भवती महिलाएं भी सेवन से बचें.

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(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)

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