भारतीयों को रोज कितना घी-तेल लेना चाहिए? ज्यादा हुआ तो दिल की सेहत पर पड़ सकता है भारी

Ghee And Oil: पराठे, पूरी, कचौड़ी,वड़ा जैसे फ्राइड व्यंजन हमारे रुटीन का हिस्सा है. सुबह का नाश्ता हो, दोपहर की दाल-सब्जी हो या रात की रोटी, लगभग हर चीज में किसी न किसी रूप में फैट शामिल रहता है. लेकिन क्या आप ये जानते हैं कि रोजाना इनका कितना सेवन करें.

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Ghee And Oil: भारतीयों को रोज कितना घी-तेल लेना चाहिए?

Oil And Ghee: गलत डाइट और बिगड़ती लाइफस्टाइल की वजह से भारत में हार्ट अटैक के मामले लगातार बढ़ रहे हैं. इसी बीच तेल और घी को लेकर लोगों के बीच काफी कन्फ्यूजन बना रहता है. कोई इन्हें पूरी तरह छोड़ने की सलाह देता है, तो कोई इन्हें ताकत का जरिया मानता है. सच्चाई यह है कि तेल और घी भारतीय खाने का अहम हिस्सा हैं, लेकिन इनकी मात्रा और क्वालिटी पर ध्यान देना बेहद जरूरी है. तेल और घी हिन्दुस्तानी खाने का बहुत ही अहम हिस्सा है. पराठे, पूरी, कचौड़ी,वड़ा जैसे फ्राइड व्यंजन हमारे रुटीन का हिस्सा है. सुबह का नाश्ता हो, दोपहर की दाल-सब्जी हो या रात की रोटी, लगभग हर चीज में किसी न किसी रूप में फैट शामिल रहता है. समस्या तब शुरू होती है जब इसकी मात्रा जरूरत से ज्यादा हो जाती है.

रोजाना कितनी मात्रा सुरक्षित मानी जाती है?

एक सामान्य व्यक्ति दिनभर में कुल मिलाकर 1 से 2 चम्मच घी या तेल ले सकता है. इसमें खाना पकाने और ऊपर से डाला गया फैट दोनों शामिल हैं. यानी अगर आपने एक चम्मच घी लिया है और एक चम्मच तेल सब्जी में इस्तेमाल किया है, तो यही आपकी दिन की लिमिट मानी जाएगी. लेकिन अक्सर इससे कहीं ज्यादा मात्र हम कंज्यूम कर लेते हैं.

पहले और अब के खाने में क्या बदला?

पहले भारतीय ट्रेडिशनल ईटिंग पैटर्न ऐसा था कि तला-भुना खाना किसी खास मौके पर ही खाया जाता था. मिठाईयां और डीप फ्राइड व्यंजन कभी कभार शादी ब्याह या किसी उत्सव पर ही बना करती थी.  रोजमर्रा के खाने में लोग ज्यादा सादा, उबला या कच्चा खाना खाते थे. लेकिन अब फास्ट फूड और डीप फ्राई आइटम्स हर जगह मिल जाते हैं. इसी वजह से भारतीय थाली का संतुलन बिगड़ गया है और फैट का सेवन जरूरत से ज्यादा होने लगा है.

पहले थाली की सबसे महंगी चीज क्या थी?

पुराने समय में थाली की सबसे महंगी चीज तेल या देसी घी मानी जाती थी, जबकि मोटे अनाज, सब्जी और दालें जैसी चीजें सस्ती होती थीं. इसी कारण कहा जाता था कि पहले गरीब लोगों को दिल की बीमारी कम होती थी और हार्ट डिजीज अमीरों की बीमारी मानी जाती थी. आज हालात बदल चुके हैं और दिल की बीमारी किसी को भी हो सकती है.

क्या तेल और घी दिल के लिए ठीक हैं?

देसी घी और वेजिटेबल ऑयल सीमित मात्रा में लिए जाएं तो नुकसानदेह नहीं माने जाते. लेकिन ध्यान रखना जरूरी है कि तेल हाइड्रोजनीकृत न हो. जिस तेल को प्रोसेस करके सफेद और सख्त बना दिया जाता है, उसमें ट्रांस फैट ज्यादा होता है, जो सेहत के लिए सही नहीं है. इसे वनस्पति घी के नाम से भी जाना जाता है. इसके अलावा सिर्फ जानवरों की चर्बी से बने फैट को ज्यादा नुकसानदेह माना जाता है, क्योंकि इनमें सैचुरेटेड फैट ज्यादा होता है. यह बैड कोलेस्ट्रॉल बढ़ाने की क्षमता रखता है और दिल की बीमारी का खतरा बढ़ा सकता है.

दिल की सेहत के लिए जरूरी आदतें-

-खाना बनाते समय तेल नापकर इस्तेमाल करें.
-एक ही तरह के तेल का लगातार उपयोग न करें, समय-समय पर बदलते रहें.
-डीप फ्राई चीजें रोज खाने से बचें.
-फल, सब्जी, सलाद और फाइबर वाली चीजें डाइट में जरूर शामिल करें.

हार्ट अटैक से जुड़ा चिंताजनक आंकड़ा-

2022 में NCRB के आंकड़ों के मुताबिक, भारत में हार्ट अटैक से 32,457 मौतें दर्ज की गईं. इनमें से करीब 70 प्रतिशत मौतें 30 से 60 साल की उम्र के लोगों की थीं. यह दिखाता है कि दिल की बीमारी अब केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं रही. ऐसे में कहा जा सकता है कि तेल और घी को पूरी तरह छोड़ना जरूरी नहीं है. जरूरत है सही मात्रा, सही क्वालिटी और संतुलित डाइट की. छोटी-छोटी आदतों में बदलाव करके दिल की सेहत को काफी हद तक सुरक्षित रखा जा सकता है.

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(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)

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