रेलवे में मिलने वाला नॉनवेज हलाल या झटका? NHRC का FSSAI और संस्कृति मंत्रालय को नोटिस, जानें क्या है दोनों में फर्क

Halal vs Jhatka: कुछ सिख संगठनों ने आरोप लगाया है कि भारतीय रेलवे की नॉनवेज थाली में केवल हलाल मांस परोसा जाता है और यह जानकारी यात्रियों को साफतौर से नहीं दी जा रही.

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Halal vs Jhatka on Trains: रेलवे की नॉनवेज थाली पर झटका बनाम हलाल मांस को लेकर बड़ा विवाद.

Halal vs Jhatka on Trains: भारतीय रेलवे लाखों यात्रियों की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा है. ट्रेन में मिलने वाला खाना, खासकर नॉनवेज, यात्रियों के लिए यात्रा का स्वादिष्ट हिस्सा होता है. लेकिन, अब इसी रेलवे थाली ने झटका बनाम हलाल मांस को लेकर बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है, जिसके बारे में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने रेलवे बोर्ड, FSSAI और संस्कृति मंत्रालय को नोटिस जारी किया है. यह बहस सिर्फ खाने का स्वाद नहीं, बल्कि धार्मिक अधिकार, उपभोक्ता स्वतंत्रता और पारदर्शिता से जुड़ी है. ट्रेन में परोसे या बेचे जाने वाले नॉन-वेज खाने को लेकर लंबे समय से यह सवाल उठता रहा है कि वह हलाल पद्धति से तैयार होता है या झटका तरीके से.

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झटका और हलाल में क्या अंतर है?

झटका मीट क्या है?

झटका मीट वह होता है, जिसमें जानवर को एक ही स्थिर कट में काटा जाता है, जिससे उसकी इच्छा शक्ति जल्द ही खत्म हो जाती है. यह तरीका मुख्य रूप से सिख और कुछ हिंदू परंपराओं से जुड़ा माना जाता है. मान्यता यह है कि एक ही वार में जीवन समाप्त होने से जानवर को कम समय तक पीड़ा होती है. सिख परंपरा में, खासतौर से रहत मर्यादा के अनुसार, झटका विधि से तैयार किया गया मांस स्वीकार्य माना जाता है. झटका में किसी प्रकार का धार्मिक मंत्र या विशेष उच्चारण आवश्यक नहीं होता. यह पद्धति तुरंत प्रक्रिया पर आधारित है.

हलाल मीट क्या है?

हलाल मीट इस्लामी परंपरा से जुड़ा है. हलाल का अर्थ होता है, जो वैध या स्वीकार्य हो. इस विधि में जानवर को काटते समय ईश्वर का नाम लिया जाता है और एक विशेष प्रक्रिया का पालन किया जाता है. इसमें यह ध्यान रखा जाता है कि जानवर को अनावश्यक कष्ट न हो और रक्त पूरी तरह निकल जाए. मुसलमान समुदाय के लिए हलाल मीट धार्मिक रूप से महत्वपूर्ण है और इसे शुद्ध माना जाता है.

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विवाद कैसे शुरू हुआ?

कुछ सिख संगठनों ने आरोप लगाया है कि भारतीय रेलवे की नॉनवेज थाली में केवल हलाल मांस परोसा जाता है और यह जानकारी यात्रियों को साफतौर से नहीं दी जा रही. उनके मुताबिक, अगर यह सच है तो यह उपभोक्ता की आजादी और धार्मिक स्वतंत्रता का उल्लंघन है. इसलिए उन्होंने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) के समक्ष याचिका दायर की.

NHRC ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए रेलवे बोर्ड, खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) और संस्कृति मंत्रालय के सचिवों को नोटिस जारी किया है और उनसे इस बारे में सवाल पूछे हैं. आयोग ने कहा है कि यात्रियों को यह बताना अनिवार्य है कि परोसा गया मांस हलाल है, झटका है, या दोनों विकल्प उपलब्ध हैं, ताकि वे अपनी धार्मिक मान्यताओं और व्यक्तिगत पसंद के हिसाब से चुनाव कर सकें.

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NHRC ने किस बात पर ध्यान दिया?

NHRC का प्रमुख तर्क यह है कि अगर केवल हलाल मांस ही उपलब्ध कराया जा रहा है और इसकी स्पष्ट जानकारी नहीं दी जा रही, तो यह उपभोक्ता के भोजन के विकल्प के अधिकार का उल्लंघन हो सकता है. यह धार्मिक स्वतंत्रता के खिलाफ माना जा सकता है, खासकर उन लोगों के लिए जिनके धर्म में हलाल मांस का सेवन वर्जित है.

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पारदर्शिता और समाधान के सुझाव

NHRC ने कहा है कि पारदर्शिता बेहद जरूरी है. चाहे रेलवे की ट्रेन की थाली हो या प्लेटफॉर्म पर मिलने वाला खाना. वे सुझाव दे रहे हैं कि, सभी खाने के ठेकेदारों को स्पष्ट रूप से बता देना चाहिए कि मांस किस विधि से काटा गया है. FSSAI को भी मानक में स्पष्ट रूप से हलाल या झटका की जानकारी शामिल करनी चाहिए ताकि उपभोक्ता सही चुनाव कर सके. संस्कृति मंत्रालय और रेलवे दोनों को अपने नियमानुसार स्पष्ट जानकारी देना सुनिश्चित करना चाहिए.

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(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)

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