भारत के किस राज्य में लोग खाना छोड़ सकते हैं, लेकिन चाय नहीं? जानिए चाय के दीवानों की दिलचस्प कहानी

भारत का वह कौन-सा राज्य है, जहां लोग एक समय का खाना तो छोड़ सकते हैं, लेकिन चाय छोड़ना उनके लिए लगभग नामुमकिन है? इस सवाल का जवाब यहां है.

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असम इस मामले में सबसे आगे है, लेकिन भारत के कुछ और राज्य भी चाय के बेहद शौकीन हैं.

भारत में चाय सिर्फ एक पेय नहीं है, बल्कि एक एहसास है. सुबह की शुरुआत हो या शाम की थकान, मेहमान आए हों या दफ्तर में ब्रेक का वक्त चाय हर मौके पर मौजूद रहती है. भारत में करोड़ों लोग ऐसे हैं जिनका दिन चाय के बिना अधूरा लगता है. लेकिन, सवाल यह है कि भारत का वह कौन-सा राज्य है, जहां लोग एक समय का खाना तो छोड़ सकते हैं, लेकिन चाय छोड़ना उनके लिए लगभग नामुमकिन है? इस सवाल का जवाब है असम. जी हां, असम को यूं ही चाय की राजधानी नहीं कहा जाता. यहां चाय सिर्फ पी जाती ही नहीं, बल्कि जी जाती है.

असम और चाय का गहरा रिश्ता

असम दुनिया के सबसे बड़े चाय उत्पादक इलाकों में से एक है. यहां की हरियाली से भरी चाय बागानें, चाय की खुशबू और चाय से जुड़ी रोजमर्रा की जिंदगी लोगों की पहचान बन चुकी है. असम की चाय न सिर्फ भारत में, बल्कि पूरी दुनिया में मशहूर है.

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यहां के लोग मजाक में कहते हैं- "भात (चावल) बाद में, चाय पहले." कई घरों में दिन की शुरुआत चाय से होती है और कभी-कभी हल्का नाश्ता या खाना बाद में आता है.

क्यों असम में चाय इतनी जरूरी है? | Why is Tea So Important in Assam? 

1. मौसम की वजह से

असम में ज्यादातर समय नमी और हल्की ठंड रहती है. ऐसे मौसम में गर्म चाय शरीर को सुकून देती है और एनर्जी भी.

2. कामकाजी जिंदगी और चाय

चाय बागानों में काम करने वाले मजदूर हों या शहरों में दफ्तर जाने वाले लोग, सबके लिए चाय थकान दूर करने का सबसे आसान तरीका है.

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3. संस्कृति और आदत

असम में मेहमान का स्वागत बिना चाय के अधूरा माना जाता है. अगर घर में चाय नहीं है, तो लोग पहले दुकान से चाय लाते हैं, फिर बात आगे बढ़ती है.

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क्या सिर्फ असम ही ऐसा राज्य है?

असम इस मामले में सबसे आगे है, लेकिन भारत के कुछ और राज्य भी चाय के बेहद शौकीन हैं.

  • पश्चिम बंगाल: यहां चाय के साथ आड्डा यानी लंबी बातचीत का मजा लिया जाता है.
  • उत्तर प्रदेश और बिहार: यहां चाय सिर्फ पेय नहीं, बल्कि सामाजिक जुड़ाव का जरिया है.
  • महाराष्ट्र: कटिंग चाय के बिना मुंबई की जिंदगी अधूरी है.

लेकिन, इन सबमें भी असम का स्थान सबसे अलग है, क्योंकि यहां चाय आदत नहीं, पहचान है.

क्या लोग सच में खाना छोड़ देते हैं?

पूरी तरह खाना छोड़ देना तो मुश्किल है, लेकिन कई बार लोग सुबह या शाम का खाना हल्का कर लेते हैं, पर चाय जरूर पीते हैं. खासकर सुबह-सुबह कई लोगों के लिए चाय ही पहला भोजन होती है.

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चाय का भावनात्मक रिश्ता

असम में चाय सिर्फ स्वाद या आदत नहीं, बल्कि भावनाओं से जुड़ी है. खुशी हो, दुख हो, बारिश हो या ठंड, हर हाल में चाय साथ होती है. चाय पीते हुए लोग अपने दिन की प्लानिंग करते हैं, परेशानियां साझा करते हैं और रिश्ते मज़बूत करते हैं.

सेहत और संतुलन भी जरूरी

हालांकि चाय के फायदे हैं जैसे ताजगी, एकाग्रता और थकान में राहत. लेकिन, बहुत ज्यादा चाय पीना भी सेहत के लिए ठीक नहीं. असम में भी अब लोग समझने लगे हैं कि चाय का मजा संतुलन में ही अच्छा लगता है.

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अगर पूछा जाए कि भारत के किस राज्य में लोग खाना छोड़ सकते हैं, लेकिन चाय नहीं तो जवाब साफ है असम. यहां चाय सिर्फ एक ड्रिंक नहीं, बल्कि लोगों की जिंदगी, संस्कृति और पहचान का हिस्सा है.

(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)

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