क्या सिर्फ वेजिटेरियन्स में होती है Vitamin B12 की कमी? जानिए इससे जुड़े 5 बड़े जूठ जिन्हें सच मान लेते हैं लोग

Vitamin B12 Deficiency: अगर विटामिन बी12 की कमी समय पर पकड़ी न जाए, तो यह नसों, रेड ब्लड सेल्स और दिमाग पर असर डाल सकती है. आइए जानते हैं विटामिन बी12 से जुड़े 5 आम मिथ्स और उनकी सच्चाई.

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कई लोग मानते हैं कि B12 की कमी सिर्फ शाकाहारियों को होती है.

Vitaminb12 Ki Kami: आजकल विटामिन B12 का नाम अक्सर सुनने को मिलता है. इसे एनर्जी बढ़ाने, दिमाग को तेज रखने, मूड सुधारने और यहां तक कि वजन कंट्रोल से भी जोड़ा जाता है. लेकिन, इस जरूरी विटामिन को लेकर कई तरह की गलतफहमियां भी फैली हुई हैं. कई लोग मानते हैं कि बी12 की कमी सिर्फ शाकाहारियों को होती है. कुछ लोग सोचते हैं कि इसकी गोली लेते ही तुरंत ताकत आ जाती है. वहीं कुछ लोग यह भी मान लेते हैं कि अगर ब्लड टेस्ट नॉर्मल है, तो चिंता की कोई बात नहीं. लेकिन, सच्चाई इससे कहीं ज्यादा अलग है. अगर विटामिन बी12 की कमी समय पर पकड़ी न जाए, तो यह नसों, रेड ब्लड सेल्स और दिमाग पर असर डाल सकती है. आइए जानते हैं विटामिन बी12 से जुड़े 5 आम मिथ्स और उनकी सच्चाई.

मिथ 1. केवल शाकाहारियों को होती है B12 की कमी

यह सबसे आम धारणा है. सच यह है कि विटामिन बी B12 का सबसे बड़ा सोर्स मांस, मछली, अंडे और डेयरी प्रोडक्ट्स में पाया जाता है. इसलिए शाकाहारियों में इसकी कमी का जोखिम ज्यादा हो सकता है. लेकिन, सिर्फ नॉन-वेज खाने से यह गारंटी नहीं होती कि शरीर को पर्याप्त B12 मिल ही जाएगा.

B12 का अवशोषण (Absorption) पेट के एसिड और इंट्रिंसिक फैक्टर पर निर्भर करता है. उम्र बढ़ने के साथ पेट का एसिड कम हो सकता है, जिससे बुजुर्गों में कमी का खतरा बढ़ जाता है, यहां तक कि अगर वे नॉन-वेज खाते हों.

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मिथ 2. विटामिन B12 की कमी में हमेशा गंभीर लक्षण होते हैं

कई लोग सोचते हैं कि जब तक कमजोरी बहुत ज्यादा न हो, तब तक चिंता की जरूरत नहीं. लेकिन, शुरुआती लक्षण अक्सर हल्के होते हैं, जैसे लगातार थकान, हल्की याददाश्त की समस्या, चिड़चिड़ापन, ध्यान लगाने में कठिनाई. इन लक्षणों को अक्सर तनाव या उम्र का असर समझकर नजरअंदाज कर दिया जाता है। अगर इलाज न हो, तो एनीमिया, नसों को नुकसान और संतुलन की समस्या तक हो सकती है.

मिथ 3: फोर्टिफाइड फूड ही काफी है

आजकल कई सीरियल और पैकेज्ड फूड में B12 मिलाया जाता है. लेकिन डॉक्टरों के मुताबिक, हर व्यक्ति के लिए यह पर्याप्त नहीं होता. अगर किसी व्यक्ति के शरीर में अवशोषण की समस्या है, तो फोर्टिफाइड फूड से मिलने वाला B12 पूरी तरह उपयोग में नहीं आ पाता.

मिथ 4: सभी B12 सप्लीमेंट एक जैसे काम करते हैं

यह भी एक गलतफहमी है. हर सप्लीमेंट एक जैसा नहीं होता. हल्की कमी में ओरल टैबलेट्स काम कर सकती हैं. अगर एब्जॉर्प्शन की समस्या हो, तो सबलिंगुअल (जीभ के नीचे रखने वाली) टैबलेट या इंजेक्शन की जरूरत पड़ सकती है. इसलिए बिना डॉक्टर की सलाह के खुद से सप्लीमेंट लेना सही नहीं है.

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मिथ 5: नॉर्मल ब्लड टेस्ट का मतलब कोई कमी नहीं

कई बार सीरम B12 का लेवल सामान्य दिखता है, लेकिन शरीर में असली कमी मौजूद होती है. ऐसी स्थिति में डॉक्टर मिथाइलमैलोनिक एसिड और होमोसिस्टीन जैसे टेस्ट कराने की सलाह दे सकते हैं, जो शरीर में B12 की वास्तविक उपलब्धता को बेहतर तरीके से दिखाते हैं.

क्यों जरूरी है समय पर जांच?

विटामिन बी 12 की कमी धीरे-धीरे असर डालती है. अगर समय रहते पहचान न हो, तो यह नसों और दिमाग पर स्थायी प्रभाव छोड़ सकती है. इसलिए अगर लगातार थकान हो, हाथ-पैर में झनझनाहट हो, याददाश्त कमजोर लगे तो जांच जरूर कराएं.

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विटामिन बी12 सिर्फ शाकाहारियों की समस्या नहीं है. यह किसी को भी हो सकती है, खासकर बुजुर्गों और पाचन संबंधी समस्या वाले लोगों को. सही जानकारी, समय पर जांच और डॉक्टर की सलाह से सही सप्लीमेंट लेना बेहद जरूरी है.

(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)

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