दंतेश्वरी मंदिर में स‍िले हुए कपड़े पहनकर जाने की नहीं है अनुम‍त‍ि, बांहों में स्‍तंभ आने से भक्‍तों की हर मन्‍नत होती है पूरी

छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा में मां भगवती का शक्तिशाली दंतेश्वरी मंदिर है. मान्‍यता है क‍ि इस मंद‍िर मन्‍नत हो जाती है पूरी अगर आपकी बांहों में स्‍तंभ आ जाता है.

विज्ञापन
Read Time: 3 mins
मंद‍िर में मन्‍नत हो जाती है पूरी.

नई दिल्ली : देश के लगभग हर कोने में मां भगवती के कई ऐसे मंदिर हैं, जो सच्ची आस्था और चमत्कार के प्रतीक हैं. कुछ शक्तिपीठ मंदिरों में दर्शन मात्र से ही मनोकामना पूरी होती है, तो कई चमत्कार आस्था पर भारी पड़ते हैं. ऐसा ही एक मंदिर छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा में स्थित है, जहां स्तंभ को पकड़कर पता चलता है कि भक्त की मुराद पूरी होगी या नहीं. ये अंधविश्वास नहीं, बल्कि भक्तों की मां के प्रति आस्था है.

रमजान का पहला रोजा आज, दिल्ली, लखनऊ, बिहार और जयपुर की इफ्तार के टाइमिंग यहां जानिए

मन्‍नत पूरी होने की मान्‍यता 

छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा में मां भगवती का शक्तिशाली दंतेश्वरी मंदिर है, जहां छह भुजाओं में मां अस्त्र-शस्त्र, शंख और असुर के बाल और कपाल को लिए विराजमान हैं. मां का रूप अत्यंत प्रभावी और मनोकामना को पूर्ण करने वाला है, लेकिन मंदिर में मौजूद स्तंभ मां के प्रति भक्तों के विश्वास को और बढ़ा देता है. स्थानीय मान्यता है कि मंदिर के प्रांगण में मौजूद स्तंभ को अगर दोनों बाहों से समेट लिया जाए, तो मां से मांगी इच्छा जरूर पूरी होती है और अगर भक्त ऐसा नहीं कर पाता है, तो उसकी अर्जी पूरी नहीं होती. भक्त दूर-दूर से मां के इसी चमत्कार को देखने के लिए आते हैं.

सिले हुए कपड़े पहनकर आने पर पाबंदी 

मां भगवती का शक्तिशाली दंतेश्वरी मंदिर बहुत पुराना है और पूजा-पाठ भी पुरातन तरीके से की जाती है. इस मंदिर में सिले हुए कपड़े पहनकर आना मना होता है. मंदिर में धोती या लुंगी पहनकर ही मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश मिलता है. अगर कोई भक्त किसी कारणवश सामान्य कपड़ों में आ जाता है, तो मंदिर प्रशासन की तरफ से धोती दी जाती है, जिससे भक्त मां के दर्शन आराम से कर सके. 

मंद‍िर से जुड़ी पौराणिक कथाएं

400 साल से ज्यादा पुराने मंदिर को लेकर कई किंवदंतियां और पौराणिक कथाएं मौजूद हैं. दक्षिण भारतीय शैली में बने मां दंतेश्वरी मंदिर को लेकर कहा जाता है कि यहां मां सती का दांत गिरा, जिसकी वजह से मंदिर का नाम दंतेश्वरी और जगह का नाम दंतेवाड़ा पड़ा. मां को दंतेवाड़ा और बस्तर की आराध्य देवी के रूप में पूजा जाता है.  इसके साथ ही मंदिर काकतीय वंश से भी जुड़ा है. माना जाता है कि काकतीय वंश के राजा अन्नमदेव ने मां दंतेश्वरी के दर्शन किए थे और उनकी कृपा से राजा को बड़ा राज्य मिला था. मंदिर के पास नदी के किनारे मां के पदचिह्न भी मौजूद हैं. भक्त मां दंतेश्वरी के दर्शन के बाद पदचिह्नों के दर्शन जरूर करते हैं. 
 

Advertisement
(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
Featured Video Of The Day
Bengal Election Results 2026: बंगाल में भगवा लहर, ममता बनर्जी साफ | Mamata Banerjee | PM Modi | TMC
Topics mentioned in this article