Shukra Pradosh Vrat 2026 Date: हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत का बहुत महत्व है. इस दिन भगवान शिव की पूजा करने का विधान है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार देवों के देव महादेव की पूजा करने से जीवन में सुख-शांति बनी रहती है और मन की इच्छाएं पूरी होती हैं. पंचांग के अनुसार, फिलहाल माघ महीना चल रहा है और इसी माह का दूसरा प्रदोष व्रत कल यानी 30 जनवरी को रखा जाएगा. इस बार प्रदोष व्रत शुक्रवार के दिन पड़ रहा है, जिस वजह से यह शुक्र प्रदोष व्रत कहलाएगा. इसी कड़ी में आज हम आपको इस लाइव ब्लॉग में शुक्र प्रदोष व्रत की तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, मंत्र समेत अन्य जरूरी जानकारियां देने जा रहे हैं. आइए जानते हैं...
करें शिव तांडव स्त्रोत का पाठ
जटाटवीगलज्जल प्रवाहपावितस्थले
गलेऽवलम्ब्य लम्बितां भुजंगतुंगमालिकाम्।
डमड्डमड्डमड्डमनिनादवड्डमर्वयं
चकार चंडतांडवं तनोतु नः शिवः शिवम ॥1॥
जटा कटा हसंभ्रम भ्रमन्निलिंपनिर्झरी ।
विलोलवी चिवल्लरी विराजमानमूर्धनि ।
धगद्धगद्ध गज्ज्वलल्ललाट पट्टपावके
किशोरचंद्रशेखरे रतिः प्रतिक्षणं ममं ॥2॥
धरा धरेंद्र नंदिनी विलास बंधुवंधुर-
स्फुरदृगंत संतति प्रमोद मानमानसे ।
कृपाकटा क्षधारणी निरुद्धदुर्धरापदि
कवचिद्विगम्बरे मनो विनोदमेतु वस्तुनि ॥3॥
जटा भुजं गपिंगल स्फुरत्फणामणिप्रभा-
कदंबकुंकुम द्रवप्रलिप्त दिग्वधूमुखे ।
मदांध सिंधु रस्फुरत्वगुत्तरीयमेदुरे
मनो विनोदद्भुतं बिंभर्तु भूतभर्तरि ॥4॥
सहस्र लोचन प्रभृत्य शेषलेखशेखर-
प्रसून धूलिधोरणी विधूसरांघ्रिपीठभूः ।
भुजंगराज मालया निबद्धजाटजूटकः
श्रिये चिराय जायतां चकोर बंधुशेखरः ॥5॥
ललाट चत्वरज्वलद्धनंजयस्फुरिगभा-
निपीतपंचसायकं निमन्निलिंपनायम् ।
सुधा मयुख लेखया विराजमानशेखरं
महा कपालि संपदे शिरोजयालमस्तू नः ॥6॥
कराल भाल पट्टिकाधगद्धगद्धगज्ज्वल-
द्धनंजया धरीकृतप्रचंडपंचसायके ।
धराधरेंद्र नंदिनी कुचाग्रचित्रपत्रक-
प्रकल्पनैकशिल्पिनि त्रिलोचने मतिर्मम ॥7॥
नवीन मेघ मंडली निरुद्धदुर्धरस्फुर-
त्कुहु निशीथिनीतमः प्रबंधबंधुकंधरः ।
निलिम्पनिर्झरि धरस्तनोतु कृत्ति सिंधुरः
कलानिधानबंधुरः श्रियं जगंद्धुरंधरः ॥8॥
प्रफुल्ल नील पंकज प्रपंचकालिमच्छटा-
विडंबि कंठकंध रारुचि प्रबंधकंधरम्
स्मरच्छिदं पुरच्छिंद भवच्छिदं मखच्छिदं
गजच्छिदांधकच्छिदं तमंतकच्छिदं भजे ॥9॥
अगर्वसर्वमंगला कलाकदम्बमंजरी-
रसप्रवाह माधुरी विजृंभणा मधुव्रतम् ।
स्मरांतकं पुरातकं भावंतकं मखांतकं
गजांतकांधकांतकं तमंतकांतकं भजे ॥10॥
जयत्वदभ्रविभ्रम भ्रमद्भुजंगमस्फुर-
द्धगद्धगद्वि निर्गमत्कराल भाल हव्यवाट्-
धिमिद्धिमिद्धिमि नन्मृदंगतुंगमंगल-
ध्वनिक्रमप्रवर्तित प्रचण्ड ताण्डवः शिवः ॥11॥
दृषद्विचित्रतल्पयोर्भुजंग मौक्तिकमस्रजो-
र्गरिष्ठरत्नलोष्टयोः सुहृद्विपक्षपक्षयोः ।
तृणारविंदचक्षुषोः प्रजामहीमहेन्द्रयोः
समं प्रवर्तयन्मनः कदा सदाशिवं भजे ॥12॥
कदा निलिंपनिर्झरी निकुजकोटरे वसन्
विमुक्तदुर्मतिः सदा शिरःस्थमंजलिं वहन्।
विमुक्तलोललोचनो ललामभाललग्नकः
शिवेति मंत्रमुच्चरन्कदा सुखी भवाम्यहम्॥13॥
निलिम्प नाथनागरी कदम्ब मौलमल्लिका-
निगुम्फनिर्भक्षरन्म धूष्णिकामनोहरः ।
तनोतु नो मनोमुदं विनोदिनींमहनिशं
परिश्रय परं पदं तदंगजत्विषां चयः ॥14॥
प्रचण्ड वाडवानल प्रभाशुभप्रचारणी
महाष्टसिद्धिकामिनी जनावहूत जल्पना ।
विमुक्त वाम लोचनो विवाहकालिकध्वनिः
शिवेति मन्त्रभूषगो जगज्जयाय जायताम् ॥15॥
इमं हि नित्यमेव मुक्तमुक्तमोत्तम स्तवं
पठन्स्मरन् ब्रुवन्नरो विशुद्धमेति संततम्।
हरे गुरौ सुभक्तिमाशु याति नांयथा गतिं
विमोहनं हि देहना तु शंकरस्य चिंतनम ॥16॥
पूजाऽवसानसमये दशवक्रत्रगीतं
यः शम्भूपूजनमिदं पठति प्रदोषे ।
तस्य स्थिरां रथगजेंद्रतुरंगयुक्तां
लक्ष्मी सदैव सुमुखीं प्रददाति शम्भुः ॥17॥
Shiv Pradosh Vrat 2026: शिव प्रदोष व्रत पर करें 11 बेलपत्र अर्पित
शिव प्रदोष व्रत के अवसर पर भगवान शिव को 11 बेलपत्र अर्पित करने चाहिए. मान्यता के अनुसार, इससे बिजनेस इंवेस्टमेंट में आ रही सभी तरह की परेशानी दूर होती हैं.
Shukra Pradosh Vrat 2026 Significance: क्यों खास है शुक्र प्रदोष व्रत?
जब प्रदोष व्रत शुक्रवार को पड़ता है, तो शिव जी के साथ-साथ शुक्र ग्रह की कृपा भी प्राप्त होती है. जानकारी के लिए बता दें, कि शुक्र ग्रह को सुख, प्रेम, विवाह, कला, धन-वैभव और विलासिता का कारक माना जाता है. इसी कारण से शुक्र प्रदोष व्रत रखने से जीवन में आर्थिक स्थिरता बनी रहती है.
Shiv Aarti Lyrics in Hindi: शिव जी आरती लिरिक्स
ओम जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा।
ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव, अर्द्धांगी धारा॥ ओम जय शिव ओंकारा॥
एकानन चतुरानन पञ्चानन राजे।
हंसासन गरूड़ासन वृषवाहन साजे॥ ओम जय शिव ओंकारा॥
दो भुज चार चतुर्भुज दसभुज अति सोहे।
त्रिगुण रूप निरखत त्रिभुवन जन मोहे॥ ओम जय शिव ओंकारा॥
अक्षमाला वनमाला मुण्डमालाधारी।
त्रिपुरारी कंसारी कर माला धारी॥ ओम जय शिव ओंकारा॥
श्वेताम्बर पीताम्बर बाघंबर अंगे।
सनकादिक गरुड़ादिक भूतादिक संगे॥ ओम जय शिव ओंकारा॥
कर के मध्य कमण्डल चक्र त्रिशूलधारी।
जगकर्ता जगभर्ता जगसंहारकर्ता॥ ओम जय शिव ओंकारा॥
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका।
प्रणवाक्षर के मध्ये ये तीनों एका॥ ओम जय शिव ओंकारा॥
पर्वत सोहैं पार्वती, शंकर कैलासा।
भांग धतूरे का भोजन, भस्मी में वासा॥ ओम जय शिव ओंकारा॥
जटा में गंग बहत है, गल मुण्डन माला।
शेष नाग लिपटावत, ओढ़त मृगछाला॥ ओम जय शिव ओंकारा॥
काशी में विराजे विश्वनाथ, नन्दी ब्रह्मचारी।
नित उठ दर्शन पावत, महिमा अति भारी॥ ओम जय शिव ओंकारा॥
त्रिगुणस्वामी जी की आरति जो कोइ नर गावे।
कहत शिवानन्द स्वामी, मनवान्छित फल पावे॥
ओम जय शिव ओंकारा॥ स्वामी ओम जय शिव ओंकारा॥
Shukra Pradosh Vrat 2026: शिव नामावली मंत्र
।। श्री शिवाय नम:।।
।। श्री शंकराय नम:।।
।। श्री महेश्वराय नम:।।
।। श्री सांबसदाशिवाय नम:।।
।। श्री रुद्राय नम:।।
।। ओम पार्वतीपतये नम:।।
।। ओम नमो नीलकण्ठाय नम:।।
Shukra Pradosh Vrat 2026 Mantra: शुक्र प्रदोष व्रत पर करें इन मंत्रों का जाप
- भगवान शिव का गायत्री मंत्र
ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्॥ - महामृत्युंजय मंत्र
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥
Shukra Pradosh Vrat 2026 Do's: शुक्र प्रदोष व्रत पर क्या करें?
शुक्र प्रदोष व्रत पर सात्विकता का पालन विशेष रूप से करना चाहिए. इस दिन भूलकर भी मांस, शराब, लहसुन-प्याज जैसे तामसिक भोजन का सेवन न करें. ऐसा करने से आपको पूजा का फल प्राप्त नहीं होगा.
Shukra Pradosh Vrat 2026 Puja Vidhi: शुक्र प्रदोष व्रत 2026 पूजा विधि
- प्रदोष व्रत के दिन सुबह सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें.
- इसके बाद भगवान शिव का दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल से अभिषेक करें.
- शिवलिंग पर बेलपत्र, पुष्प, धूप और दीप अर्पित करें.
- इसके बाद शिव चालीसा का पाठ करें.
- शाम के समय पुनः स्नान करें और प्रदोष काल में भगवान शिव की विधि-विधान से पूजा करें.
- 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र का जाप करें और शिव चालीसा का पाठ करें.
- अंत में भगवान शिव की आरती करें.
Shukra Pradosh Vrat 2026 Shubh Muhurat: शुक्र प्रदोष व्रत पूजा मुहूर्त
शुक्र प्रदोष व्रत की पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 5 बजकर 59 मिनट से लेकर रात 8 बजकर 37 मिनट तक है. ऐसे में पूजा का शुभ मुहूर्त 2 घंटे 38 मिनट का है.
Shukra Pradosh Vrat 2026 Tithi: शुक्र प्रदोष व्रत 2026 तिथि
पंचांग के अनुसार माघ महीने के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि की शुरुआत 30 जनवरी को सुबह 11 बजकर 09 मिनट पर होगी. वहीं, इसका समापन 31 जनवरी को सुबह 8 बजकर 25 मिनट पर होगा. प्रदोष काल को देखते हुए प्रदोष व्रत 30 जनवरी, दिन शुक्रवार को रखा जाएगा.














