Shakambhari Navratri 2024: शुरू हो गई है शाकंभरी नवरात्रि, जानिए पूजा विधि और व्रत का महत्व 

Shakambhari Navratri 2024: शाकंभरी माता की एक मुट्ठी में कमल का पुष्प है तो दूसरी मुट्ठी में बाण कहे जाते हैं. जानिए पौष माह में किस दिन से शाकंभरी नवरात्रि शुरू हो रही है. 

Advertisement
Read Time: 24 mins
S

Shakambhari Navratri 2024: पौराणिक कथाओं के अनुसार, आदिशक्ति दुर्गा के कई अवतारों में से एक हैं देवी शांकभरी. मां दुर्गा के इस रूप की पूजा शाकंभरी नवरात्रि में होती है. माना जाता है कि दुर्गा सप्तशती के मूर्ति रहस्य में मां शाकंभरी (Shakambhari) का वर्ण नील कहा गया है. मां के नेत्र नील कमल की तरह हैं और वे कमल के पुष्प पर विराजित होती हैं. मां की एक मुट्ठी में कमल का पुष्प है तो दूसरी मुट्ठी में बाण कहे जाते हैं. जानिए पौष माह में किस दिन से शाकंभरी नवरात्रि शुरू हो रही है. 

Holi 2024: इस साल कब मनाई जाएगी होली, जानिए होलिका दहन का शुभ मुहूर्त यहां 

शाकंभरी नवरात्रि की पूजा | Shakambhari Ekadashi Puja 

पंचांग के अनुसार, शाकंभरी नवरात्रि पौष माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि से शुरू होकर पौष माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा के दिन तक रहती है. इस साल अष्टमी तिथी का प्रारंभ 17 जनवरी दोपहर 1 बजकर 36 मिनट से शुरू हो चुकी है. 

शाकंभरी नवरात्रि में सुबह स्नान पश्चात स्वच्छ वस्त्र धारण किए जाते हैं. इसके बाद पूजा सामग्री एकत्र की जाती है. पूजा सामग्री में मिश्री, मेवा, पूरी, हलवा और शाक सब्जियां आदि शामिल किए जाते हैं. माता की प्रतिमा को चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर रखा जाता है. इसके बाद माता पर गंगाजल छिड़ककर पूजा की जाती है. पूजा (Navratri) के बाद आरती होती और माता के मंत्रों के जाप किया जाता है. शाकंभरी नवरात्रि के दिनों में रोजाना एक माला का जार करना बेहद शुभ कहा जाता है. भक्त इन दिनों में माता का ध्यान करते हैं. 

शाकंभरी माता की आरती

जय जय शाकंभरी माता ब्रह्मा विष्णु शिव दाता
हम सब उतारे तेरी आरती री मैया हम सब उतारे तेरी आरती

संकट मोचनी जय शाकंभरी तेरा नाम सुना है
री मैया राजा ऋषियों पर जाता मेधा ऋषि भजे सुमाता
हम सब उतारे तेरी आरती

Advertisement

मांग सिंदूर विराजत मैया टीका सूब सजे है
सुंदर रूप भवन में लागे घंटा खूब बजे है
री मैया जहां भूमंडल जाता जय जय शाकम्भरी माता
हम सब उतारे तेरी आरती

Advertisement

क्रोधित होकर चली मात जब शुंभ- निशुंभ को मारा
महिषासुर की बांह पकड़ कर धरती पर दे मारा
री मैया मारकंडे विजय बताता पुष्पा ब्रह्मा बरसाता
हम सब उतारे तेरी आरती

Advertisement

चौसठ योगिनी मंगल गाने भैरव नाच दिखावे।
भीमा भ्रामरी और शताक्षी तांडव नाच सिखावें
री मैया रत्नों का हार मंगाता दुर्गे तेरी भेंट चढ़ाता
हम सब उतारे तेरी आरती

Advertisement

कोई भक्त कहीं ब्रह्माणी कोई कहे रुद्राणी
तीन लोक से सुना री मैया कहते कमला रानी
री मैया दुर्गे में आज मानता तेरा ही पुत्र कहाता हम सब उतारे तेरी आरती

सुंदर चोले भक्त पहनावे गले मे सोरण माला
शाकंभरी कोई दुर्गे कहता कोई कहता ज्वाला
री मैया मां से बच्चे का नाता ना ही कपूत निभाता
हम सब उतारे तेरी आरती

पांच कोस की खोल तुम्हारी शिवालिक की घाटी
बसी सहारनपुर मे मैय्या धन्य कर दी माटी
री मैय्या जंगल मे मंगल करती सबके भंडारे भरती
हम सब उतारे तेरी आरती

शाकंभरी मैया की आरती जो भी प्रेम से गावें
सुख संतति मिलती उसको नाना फल भी पावे
री मैया जो जो तेरी सेवा करता लक्ष्मी से पूरा भरता हम सब उतारे तेरी आरती ||

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)

Featured Video Of The Day
One Nation One Election: एक देश एक चुनाव पर कैबिनेट की मुहर, NDA एकजुट लेकिन विपक्ष ने उठाए सवाल
Topics mentioned in this article